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खंड 37

जेट एयरवेज़ को दोबारा क्यों नहीं उड़ाया जा सका

जब किसी कंपनी की नक़दी ख़त्म हो जाए और बचाव का सौदा कभी पूरा न हो, तो क्या होता है?

केस
नाकामी
वर्ष
2019-2024
₹8,000 करोड़ से अधिक
बैंकों का बकाया · 2019
लगभग ₹15,000 करोड़
बकाया वेतन सहित कुल देनदारियाँ (रिपोर्ट के अनुसार) · 2019
₹200 करोड़
सुप्रीम कोर्ट द्वारा ज़ब्त बोलीदाता की राशि · 2024
  1. 01

    हालात

    कभी प्रमुख निजी एयरलाइन रही जेट एयरवेज़ की नक़दी ख़त्म हो गई और उसने 17 अप्रैल 2019 को सभी उड़ानें बंद कर दीं। उस पर बैंकों के 8,000 करोड़ रुपये से अधिक बकाया थे, और बकाया वेतन सहित कुल देनदारियाँ लगभग 15,000 करोड़ रुपये बताई गईं।

  2. 02

    फ़ैसला

    जून 2019 में राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (NCLT) ने भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व वाले क़र्ज़दाताओं की दिवाला याचिका स्वीकार की। दिवाला प्रक्रिया में बाद में जालान कालरॉक समूह की समाधान योजना मंज़ूर हुई, लेकिन समूह ने 350 करोड़ रुपये की पहली किस्त नहीं चुकाई और योजना लागू नहीं हो सकी।

  3. 03

    नतीजा

    7 नवंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए जेट एयरवेज़ के परिसमापन (लिक्विडेशन) का आदेश दिया, क्योंकि समाधान योजना पाँच साल तक लागू नहीं हुई थी। अदालत ने समूह द्वारा जमा 200 करोड़ रुपये ज़ब्त करने, क़र्ज़दाताओं को उसकी 150 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी भुनाने की अनुमति देने और NCLT मुंबई पीठ को परिसमापक नियुक्त करने का निर्देश दिया।

स्रोत (3)
  1. NCLT admits SBI's plea for insolvency of Jet Airways · 2019
  2. Supreme Court Orders Liquidation Of Jet Airways On Failure Of Resolution Plan · 2024
  3. Jet Airways grounded permanently: SC orders liquidation, forfeits Jalan Kalrock's investment · 2024

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