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खंड 13

कच्चा माल और मशीनें

कहाँ से ख़रीदें, कौन-सी मशीन चुनें और पैसे देने से पहले सप्लायर पर भरोसा कैसे करें। नीचे का हर क्लस्टर किसी सरकारी सूची में दर्ज है।

उत्पादन क्लस्टर
198
राज्य
24
ख़रीद गाइड
5

ख़रीदने से पहले

01पैसे देने से पहले सप्लायर की जाँच कैसे करें
  1. सप्लायर से उसका GSTIN माँगें और GST पोर्टल (services.gst.gov.in → Search Taxpayer) पर जाँचें। कानूनी नाम, व्यापार का नाम, पता और स्थिति (Active या Cancelled) बिल से मेल खाने चाहिए।
  2. Udyam रजिस्ट्रेशन नंबर माँगें और Udyam पोर्टल (udyamregistration.gov.in → Verify Udyam) पर जाँचें। उद्यम का नाम और काम का प्रकार देखें।
  3. बैंक खाते का नाम GST रिकॉर्ड के कानूनी नाम से मिलाएँ। कंपनी की बिक्री का पैसा बिना लिखित कारण के किसी निजी खाते में न भेजें।
  4. हो सके तो खुद यूनिट देखने जाएँ, या उस शहर के किसी भरोसेमंद व्यक्ति को भेजें। मशीनें, माल और कारीगर अपनी आँखों से देखें।
  5. पहले पैसे देकर सैंपल मँगाएँ। एक सैंपल दोनों पक्षों के हस्ताक्षर के साथ सील करके रखें, ताकि बाद की बड़ी सप्लाई उससे मिलाई जा सके।
  6. उसके दो-तीन मौजूदा ग्राहकों के नंबर माँगें। उनसे क्वालिटी, समय पर डिलीवरी और शिकायत निपटाने के बारे में पूछें।
  7. ऑर्डर लिखित में दें: माल का विवरण, मात्रा, दाम, टैक्स, डिलीवरी की तारीख, पैकिंग, भाड़ा, भुगतान की किस्तें और माल रिजेक्ट होने पर क्या होगा।
  8. जहाँ तक हो सके थोड़ा एडवांस दें और बाकी पैसा जाँच या डिलीवरी के बाद दें।
02मशीन के कोटेशन की तुलना कैसे करें
  1. हर सप्लायर को एक जैसी लिखित ज़रूरत भेजें: क्या बनाना है, प्रति घंटा या प्रति शिफ्ट कितना उत्पादन चाहिए, कच्चा माल क्या है, और आपके पास कितनी जगह और बिजली है।
  2. स्पेसिफिकेशन लाइन-दर-लाइन मिलाएँ: क्षमता, मोटर की ताकत, उत्पाद को छूने वाले पुर्ज़ों का मटीरियल, कंट्रोल सिस्टम और मुख्य पुर्ज़ों का ब्रांड।
  3. देखें कि दाम में क्या शामिल है: GST, पैकिंग, भाड़ा, रास्ते का बीमा, उतराई, नींव, इंस्टॉलेशन, ट्रायल रन और ऑपरेटर की ट्रेनिंग।
  4. वारंटी ध्यान से पढ़ें: कितने समय की है, किन पुर्ज़ों पर है, और इंजीनियर के आने-जाने का खर्च कौन देगा।
  5. पूछें कि स्पेयर पार्ट और सर्विस कहाँ से मिलेगी, इंजीनियर कितनी जल्दी पहुँचेगा, और घिसने वाले पुर्ज़ों की दाम-सूची माँगें।
  6. ऑर्डर देने से पहले मशीन की बिजली ज़रूरत (सिंगल फेज़ या थ्री फेज़, कनेक्टेड लोड) अपने बिजली कनेक्शन से मिलाएँ।
  7. वही मॉडल चलाने वाले ग्राहकों के नाम माँगें और हो सके तो एक चलती मशीन देखकर आएँ।
  8. देखें कि मशीन पर BIS का कोई क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर या सुरक्षा मानक लागू है या नहीं (bis.gov.in), और सप्लायर से उसका प्रमाणपत्र माँगें।
  9. भुगतान को चरणों से जोड़ें: एडवांस, सप्लायर की फैक्ट्री में जाँच के बाद डिस्पैच, और आख़िरी हिस्सा सफल इंस्टॉलेशन के बाद।
03पुरानी (सेकंड-हैंड) मशीन खरीदना
  1. मशीन को लोड पर चलते हुए देखें, हो सके तो अपने ही कच्चे माल पर। जो मशीन सिर्फ बंद हालत में दिखाई जाए, उसमें जोखिम है।
  2. किसी भरोसेमंद मिस्त्री या इंजीनियर को साथ ले जाएँ। वह मुख्य शाफ़्ट, बेयरिंग, गियर, गाइडवे, हाइड्रोलिक, मोटर और कंट्रोल पैनल की घिसाई जाँचे।
  3. असली खरीद का बिल, सर्विस रिकॉर्ड, कंपनी का नाम, मॉडल और सीरियल नंबर माँगें। पक्का करें कि मशीन बेचने वाले की ही है और उस पर कोई बैंक लोन या गिरवी बाकी नहीं है।
  4. मूल निर्माता कंपनी से पूछें कि उस मॉडल के स्पेयर पार्ट और सर्विस अभी भी मिलती है या नहीं।
  5. बिक्री का पक्का टैक्स इनवॉइस लें। बैंक और सब्सिडी योजनाएँ अक्सर इसे माँगती हैं, और कुछ योजनाएँ पुरानी मशीन पर लागू नहीं होतीं, इसलिए पहले योजना की गाइडलाइन पढ़ें।
  6. नई मशीन से तुलना करने से पहले दाम में खोलने, ढुलाई, नींव, दोबारा लगाने और मरम्मत का खर्च जोड़ें।
  7. विदेश से पुरानी मशीन मँगाने के अपने नियम विदेश व्यापार नीति और कस्टम में हैं। विदेशी विक्रेता को पैसा देने से पहले DGFT और अपने कस्टम ब्रोकर से जाँच लें।
04कच्चा माल: दाम का जोखिम और भंडारण
  1. पता करें कि आपके किस कच्चे माल का दाम सबसे ज़्यादा बदलता है (जैसे धातु, कपास, प्लास्टिक दाना या काग़ज़), और हर हफ़्ते उसका दाम दर्ज करें।
  2. हर ज़रूरी माल के लिए कम से कम दो भरोसेमंद सप्लायर रखें, ताकि एक की देरी या दाम बढ़ने से काम न रुके।
  3. अपने ग्राहक को कोटेशन देते समय लिखें कि दाम कितने दिन मान्य है, या उसे ऑर्डर की तारीख के कच्चे माल के रेट से जोड़ें।
  4. लंबे ऑर्डर के लिए उतने ही समय का माल का दाम अपने सप्लायर से लिखित में तय कर लें।
  5. सिर्फ आज दाम कम होने की वजह से ज़रूरत से बहुत ज़्यादा माल न खरीदें। ज़्यादा स्टॉक में पैसा फँसता है और माल खराब या चोरी हो सकता है।
  6. माल ज़मीन से ऊपर, नमी और सीधी धूप से दूर रखें, और पुराना माल पहले इस्तेमाल करें। रसायन और जल्दी आग पकड़ने वाला माल उनकी सुरक्षा शीट के अनुसार अलग रखें।
  7. गोदाम के माल का बीमा कराएँ और एक सरल स्टॉक रजिस्टर रखें, जिसे हर महीने असली गिनती से मिलाएँ।
  8. हर आने वाली खेप को तय सैंपल और स्पेसिफिकेशन से मिलाकर ही स्वीकार करें, और यह जाँच सप्लायर की गाड़ी जाने से पहले करें।
05विदेश से मशीन मँगाना (आयात)
  1. आयात से पहले DGFT से इम्पोर्टर-एक्सपोर्टर कोड (IEC) लेना ज़रूरी है (dgft.gov.in)।
  2. ऑर्डर पर हस्ताक्षर से पहले मशीन का कस्टम टैरिफ हेडिंग (HS कोड) पता करें और ड्यूटी व आयात की शर्तें जाँचें। इसमें कस्टम ब्रोकर मदद कर सकता है।
  3. अगर मशीन पर बना माल आप निर्यात करेंगे, तो DGFT साइट पर EPCG (एक्सपोर्ट प्रमोशन कैपिटल गुड्स) योजना पढ़ें। इसमें निर्यात की ज़िम्मेदारी (एक्सपोर्ट ऑब्लिगेशन) के बदले मशीनें बिना कस्टम ड्यूटी दिए मँगाई जा सकती हैं, इसलिए आवेदन से पहले वह ज़िम्मेदारी समझ लें।
  4. इनकोटर्म (जैसे FOB या CIF) तय करें, ताकि साफ़ रहे कि किस जगह तक भाड़ा और बीमा कौन देगा।
  5. बाकी भुगतान से पहले शिपमेंट से पहले की जाँच या फैक्ट्री में टेस्ट (फोटो और वीडियो के साथ) माँगें।
  6. जाँचें कि मशीन भारत की बिजली (वोल्टेज और फ़्रीक्वेंसी) पर चलेगी, और उसकी मैनुअल व कंट्रोल पैनल ऐसी भाषा में हों जिसे आपकी टीम पढ़ सके।
  7. भारत में इंस्टॉलेशन और सर्विस की योजना बनाएँ: क्या कंपनी का यहाँ एजेंट है, स्पेयर पार्ट कैसे मिलेंगे, और इंजीनियर के आने का खर्च कौन देगा।
  8. अनजान विक्रेता को सीधा एडवांस देने के बजाय अपने बैंक के ज़रिए सही दस्तावेज़ों पर भुगतान करें (लेटर ऑफ़ क्रेडिट या डॉक्यूमेंट्स अगेंस्ट पेमेंट)।

सरकारी मदद

भारत में कहाँ बनता है

24 राज्यों में 198 उत्पादन क्लस्टर — हर एक ODOP, DGFT के निर्यात उत्कृष्टता नगर या MSE-CDP क्लस्टर सूची में दर्ज। क्लस्टर जाकर एक ही जगह कई निर्माताओं से मिलें।

उत्तर प्रदेश

पंजाब

हरियाणा

तमिलनाडु

राजस्थान

गुजरात

महाराष्ट्र

कर्नाटक

पश्चिम बंगाल

मध्य प्रदेश

आंध्र प्रदेश

तेलंगाना

केरल

झारखंड

दिल्ली

हिमाचल प्रदेश

उत्तराखंड

ओडिशा

बिहार

असम

जम्मू और कश्मीर

छत्तीसगढ़

त्रिपुरा

पुरानी MSE-CDP सूचियाँ (1998–2012) बताती हैं कि क्लस्टर था, यह नहीं कि आज भी सक्रिय है। स्थानीय स्तर पर पक्का करें।