Building Businessसेवाएँ

खंड 12

अपना बाज़ार खोजें

बेचने के सत्रह रास्ते — पड़ोस की दुकान से विदेश के ख़रीदार तक। हर एक के लिए: किसके लिए ठीक है, शुरुआत कैसे करें, खर्च और नियम — हर शुल्क सरकारी पेज से।

बेचने के रास्ते
17
समूह
5
सरकारी स्रोत
38

स्थानीय

अपने ही शहर में बेचें

4
स्थानीय01

स्थानीय दुकानों और खुदरा विक्रेताओं को बेचना

आप अपना सामान सीधे अपने शहर की किराना, हार्डवेयर, मेडिकल या दूसरी दुकानों को देते हैं। दुकानदार आपसे खरीदकर ग्राहक को बेचता है।

किसके लिए ठीक हैरोज़ इस्तेमाल का सामान (खाद्य, सफ़ाई का सामान, स्टेशनरी, पुर्ज़े) बनाने वाले नए उद्यमी जो खुद आसपास की दुकानों तक माल पहुँचा सकें।शुरुआत, खर्च और नियमबंद करें

शुरुआत कैसे करें

  1. Udyam पंजीकरण (निःशुल्क) करवाएँ, ताकि दुकानदार और बैंक आपको पंजीकृत MSME के रूप में पहचानें।
  2. अगर खाद्य सामान बेचते हैं, तो पहली बिक्री से पहले FoSCoS पर FSSAI पंजीकरण या लाइसेंस लें।
  3. हर पैक्ड सामान पर विधिक माप विज्ञान (पैक की गई वस्तुएँ) नियम, 2011 के अनुसार ज़रूरी जानकारी छापें, जिसमें अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) शामिल है।
  4. एक पन्ने की मूल्य सूची बनाएँ, जिसमें दुकान के लिए आपकी कीमत और छपा हुआ MRP हो।
  5. पास की 10–20 दुकानों से शुरुआत करें; तय दिन पर माल रखें और अगली बार भुगतान या बचा माल लें।
  6. हर दुकान का माल, बिक्री और बकाया एक सरल बही में लिखें।

खर्च

  • Udyam पंजीकरण: निःशुल्क (स्रोत: Udyam पंजीकरण पोर्टल)।
  • FSSAI पंजीकरण या लाइसेंस शुल्क आपकी श्रेणी पर निर्भर है; मौजूदा शुल्क FoSCoS पर देखें (स्रोत: FSSAI FoSCoS)।
  • दुकानदार का मार्जिन हर दुकान से बातचीत से तय होता है; कोई सरकारी दर नहीं है। अपनी दर तय करने से पहले 3–4 दुकानों से पूछें कि दूसरे सप्लायर कितना देते हैं।

नियम

  • खुदरा बिक्री वाले पैक्ड सामान पर विधिक माप विज्ञान (पैक की गई वस्तुएँ) नियम, 2011 में बताई गई जानकारी छापना ज़रूरी है, जिसमें खुदरा बिक्री मूल्य शामिल है (स्रोत: उपभोक्ता मामले विभाग)।
  • पैक्ड सामान छपे हुए खुदरा बिक्री मूल्य से ज़्यादा पर नहीं बेचा जा सकता (स्रोत: विधिक माप विज्ञान (पैक की गई वस्तुएँ) नियम, 2011)।
  • खाद्य व्यवसाय को बेचने से पहले FSSAI पंजीकरण या लाइसेंस चाहिए (स्रोत: FSSAI FoSCoS)।

फ़ायदे

  • शुरुआत का सबसे सस्ता तरीका: कोई प्लेटफ़ॉर्म शुल्क या लिस्टिंग खर्च नहीं।
  • दुकानदार के ज़रिए कुछ ही दिनों में ग्राहकों की राय मिल जाती है।
  • पैसा स्थानीय स्तर पर घूमता है; कूरियर या वापसी का खर्च नहीं।

सावधानी

  • दुकानदार अक्सर माल बिकने के बाद ही भुगतान करते हैं, इसलिए पैसा अटका रहता है।
  • बढ़त इस पर टिकी है कि आप खुद कितनी दुकानों तक पहुँच सकते हैं।
  • दुकान में जगह उन ब्रांडों को मिलती है जो ज़्यादा मार्जिन या स्कीम देते हैं।
स्रोत (3)
  1. Udyam Registration portal (Ministry of MSME)
  2. FSSAI: FoSCoS licensing and registration portal
  3. Department of Consumer Affairs: Legal Metrology (Packaged Commodities) Rules, 2011
स्थानीय02

साप्ताहिक हाट, मेले और फेरी/ठेले पर बिक्री

आप साप्ताहिक बाज़ार, गाँव के हाट, मेले या वेंडिंग ज़ोन में ठेले/स्टॉल से सीधे ग्राहकों को बेचते हैं।

किसके लिए ठीक हैकिसान, कारीगर, घर पर खाना बनाने वाले और कम पैसे में नया सामान आज़माने वाले लोग।शुरुआत, खर्च और नियमबंद करें

शुरुआत कैसे करें

  1. ग्राम पंचायत, मंडी समिति या नगर निकाय कार्यालय से पूछें कि हाट कौन चलाता है और स्टॉल कैसे मिलते हैं।
  2. शहर में ठेला/फेरी के लिए अपने नगर निकाय से वेंडिंग प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करें।
  3. रेहड़ी-पटरी वाले छोटे कार्यशील पूँजी कर्ज़ के लिए PM SVANidhi पोर्टल देखें।
  4. मूल्य बोर्ड, तराज़ू (अगर तौलकर बेचते हैं) और UPI QR कोड साथ रखें।
  5. हर बाज़ार के दिन लिखें कि क्या बिका और किस दाम पर।

खर्च

  • स्टॉल या जगह का शुल्क स्थानीय निकाय या हाट समिति तय करती है; कोई राष्ट्रीय दर नहीं है। स्थानीय कार्यालय से पूछें।
  • PM SVANidhi कर्ज़ की राशि और शर्तें: मौजूदा जानकारी PM SVANidhi पोर्टल पर देखें (स्रोत: आवास और शहरी कार्य मंत्रालय)।

नियम

  • शहरों में फेरी/ठेले का नियंत्रण नगर निकाय करता है; केवल अनुमति वाले वेंडिंग ज़ोन में बेचें।
  • अगर तौलकर बेचते हैं, तो तराज़ू राज्य के विधिक माप विज्ञान विभाग से सत्यापित और मुहर लगा होना चाहिए।
  • पका हुआ या पैक्ड खाना बेचने के लिए FSSAI पंजीकरण चाहिए (स्रोत: FSSAI FoSCoS)।

फ़ायदे

  • पूरा खुदरा दाम आपको मिलता है; कोई बिचौलिया नहीं।
  • असली ग्राहकों से दाम और स्वाद परखने का सबसे तेज़ तरीका।
  • रोज़ नकद कमाई।

सावधानी

  • बिक्री मौसम, सीज़न और भीड़ पर निर्भर है।
  • आपका समय बनाने के बजाय बेचने में जाता है।
  • कुछ बाज़ारों से आगे बढ़ना मुश्किल है।
स्रोत (3)
  1. PM SVANidhi portal (Ministry of Housing and Urban Affairs)
  2. FSSAI: FoSCoS licensing and registration portal
  3. Department of Consumer Affairs: Legal Metrology (Packaged Commodities) Rules, 2011
स्थानीय03

अपनी दुकान या फ़ैक्टरी आउटलेट

आप फ़ैक्टरी के गेट पर, बाज़ार में या घर से अपना काउंटर खोलकर अपने नाम से बेचते हैं।

किसके लिए ठीक हैजिनके पास कई तरह का सामान है (मिठाई, बेकरी, फ़र्नीचर, कपड़े) और रोज़ इतने ग्राहक आते हैं कि किराया और स्टाफ़ का खर्च निकल जाए।शुरुआत, खर्च और नियमबंद करें

शुरुआत कैसे करें

  1. किराया पक्का करने से पहले एक हफ़्ते तक उस जगह पर ग्राहकों की आवाजाही देखें।
  2. अपने राज्य के दुकान और स्थापना (Shops and Establishments) कानून के तहत दुकान का पंजीकरण कराएँ और जहाँ ज़रूरी हो नगर निकाय से ट्रेड लाइसेंस लें।
  3. अगर कारोबार तय सीमा से ऊपर जाए या दूसरे राज्यों में बेचें, तो GST पंजीकरण लें।
  4. खाद्य सामान बेचते हैं तो उस परिसर के लिए FSSAI पंजीकरण या लाइसेंस लें।
  5. साफ़ मूल्य-टैग लगाएँ और हर बिक्री का बिल रखें।

खर्च

  • दुकान और स्थापना पंजीकरण तथा ट्रेड लाइसेंस का शुल्क हर राज्य या नगर निकाय तय करता है; अपने राज्य का पोर्टल देखें।
  • किराया, जमानत राशि, साज-सज्जा और स्टाफ़ सबसे बड़े खर्च हैं; इनका कोई सरकारी मानक नहीं है।

नियम

  • दुकान पंजीकरण के नियम हर राज्य में अलग हैं; अपने राज्य के श्रम विभाग या सिंगल-विंडो पोर्टल पर देखें।
  • पैक्ड सामान छपे खुदरा बिक्री मूल्य से ज़्यादा पर नहीं बेचा जा सकता (स्रोत: विधिक माप विज्ञान (पैक की गई वस्तुएँ) नियम, 2011)।
  • खाद्य परिसर के लिए FSSAI पंजीकरण या लाइसेंस चाहिए (स्रोत: FSSAI FoSCoS)।

फ़ायदे

  • पूरा खुदरा मार्जिन आपके पास रहता है।
  • इलाके में आपके ब्रांड का नाम बनता है।
  • ग्राहकों से सीधे मिलकर उनकी राय ली जा सकती है।

सावधानी

  • बिक्री हो या न हो, हर महीने तय किराया और वेतन देना पड़ता है।
  • गलत जगह चुनने से कारोबार डूब सकता है।
  • केवल आसपास के ग्राहकों तक पहुँच।
स्रोत (3)
  1. Udyam Registration portal (Ministry of MSME)
  2. FSSAI: FoSCoS licensing and registration portal
  3. Department of Consumer Affairs: Legal Metrology (Packaged Commodities) Rules, 2011
स्थानीय04

किसान उत्पादक संगठन (FPO) और सामूहिक समूह

FPO किसानों के स्वामित्व वाली पंजीकृत कंपनी या सहकारी संस्था है। यह सदस्यों की उपज इकट्ठा करती है, खाद-बीज थोक में खरीदती है और बड़े लॉट में प्रोसेसर, निर्यातक, मंडी और दुकानदारों को बेचती है, ताकि हर किसान की मोलभाव की ताकत बढ़े।

किसके लिए ठीक हैएक इलाके में एक जैसी फ़सल उगाने वाले छोटे और सीमांत किसान; साथ ही ऐसे प्रोसेसर और खरीदार जो किसानों से नियमित थोक आपूर्ति चाहते हैं।शुरुआत, खर्च और नियमबंद करें

शुरुआत कैसे करें

  1. पता करें कि आपके ब्लॉक में पहले से कोई FPO काम कर रहा है या नहीं (राज्यवार FPO सूची SFAC की साइट पर है)।
  2. केंद्र की 10,000 FPO योजना में नया FPO बनाने के लिए अपने क्षेत्र की कार्यान्वयन एजेंसी या क्लस्टर आधारित व्यावसायिक संगठन (CBBO) से संपर्क करें।
  3. FPO को उत्पादक कंपनी या सहकारी संस्था के रूप में पंजीकृत कराएँ।
  4. सदस्यों से शेयर पूँजी इकट्ठा करें, फिर मैचिंग इक्विटी अनुदान और क्रेडिट गारंटी के लिए आवेदन करें।
  5. ज़्यादा खरीदारों तक पहुँचने के लिए FPO को e-NAM और ONDC पर जोड़ें।

खर्च

  • योजना सहायता: 3 साल के प्रबंधन खर्च के लिए प्रति FPO ₹18 लाख (स्रोत: PIB पृष्ठभूमि नोट, 28 फ़रवरी 2025)।
  • मैचिंग इक्विटी अनुदान प्रति किसान सदस्य ₹2,000 तक, प्रति FPO अधिकतम ₹15.00 लाख (स्रोत: PIB पृष्ठभूमि नोट, 28 फ़रवरी 2025)।
  • प्रति FPO ₹2 करोड़ तक के परियोजना कर्ज़ पर क्रेडिट गारंटी सुविधा (स्रोत: PIB पृष्ठभूमि नोट, 28 फ़रवरी 2025)।
  • योजना का बजट 2027-28 तक ₹6,865 करोड़ (स्रोत: PIB पृष्ठभूमि नोट, 28 फ़रवरी 2025)।
  • कंपनी या सहकारी संस्था पंजीकरण शुल्क कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय (MCA) या राज्य सहकारिता विभाग तय करता है — मौजूदा शुल्क वहीं देखें।

नियम

  • इक्विटी अनुदान केवल मैचिंग अनुदान है, सरकार की इक्विटी में हिस्सेदारी नहीं (स्रोत: SFAC परिचालन दिशानिर्देश, 10,000 FPO योजना)।
  • प्रति शेयरधारक इक्विटी अनुदान अधिकतम ₹2,000 है और तीन किस्तों तक में लिया जा सकता है (स्रोत: SFAC परिचालन दिशानिर्देश)।
  • योजना का 10,000वाँ FPO प्रधानमंत्री ने शुरू किया (स्रोत: PIB पृष्ठभूमि नोट, 28 फ़रवरी 2025); अपनी कार्यान्वयन एजेंसी से पूछें कि क्या इसके तहत अब भी नए FPO बन रहे हैं।

फ़ायदे

  • बड़े लॉट से बेहतर दाम मिलते हैं और प्रोसेसर व निर्यातक आकर्षित होते हैं।
  • प्रबंधन खर्च और मैचिंग इक्विटी के लिए सरकारी अनुदान।
  • गारंटी सुविधा से बिना गिरवी के कर्ज़।

सावधानी

  • सक्रिय सदस्य और ईमानदार प्रबंधन ज़रूरी; सहायता अवधि खत्म होने के बाद कई FPO मुश्किल में पड़ते हैं।
  • कंपनी के रूप में अनुपालन (हिसाब-किताब, ऑडिट, फ़ाइलिंग) से काम बढ़ता है।
  • लाभ चरणों में मिलते हैं और सदस्यों के योगदान पर निर्भर हैं।
स्रोत (3)
  1. PIB backgrounder, 28 Feb 2025: 10,000 FPOs achieved under Government's flagship scheme
  2. SFAC: Operational Guidelines — Formation & Promotion of 10,000 FPOs
  3. SFAC: Farmer Producer Organization Scheme page

व्यापार

दूसरे व्यवसायों के ज़रिए बेचें

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व्यापार01

वितरक (डिस्ट्रीब्यूटर), स्टॉकिस्ट और थोक व्यापारी

डिस्ट्रीब्यूटर आपसे थोक में माल खरीदकर किसी ज़िले या इलाके की दुकानों तक पहुँचाता है। बड़े ब्रांडों में डिस्ट्रीब्यूटर के ऊपर सुपर स्टॉकिस्ट या C&F (कैरिंग एंड फ़ॉरवर्डिंग) एजेंट भी होता है। हर स्तर अपनी खरीद और बिक्री कीमत के बीच मार्जिन रखता है; पूरी श्रृंखला के लिए छपा MRP ऊपरी सीमा है।

किसके लिए ठीक हैजिनका सामान कुछ दुकानों में पहले से बिक रहा है और जो अब अपनी बिक्री टीम के बिना पूरा ज़िला या राज्य कवर करना चाहते हैं।शुरुआत, खर्च और नियमबंद करें

शुरुआत कैसे करें

  1. MRP से पीछे की ओर हिसाब लगाएँ: अपनी लागत, डिस्ट्रीब्यूटर को आपकी कीमत, डिस्ट्रीब्यूटर की दुकानदार को कीमत और MRP लिखें। देखें कि हर स्तर के पास आपके व्यापार में चलने वाला मार्जिन बचता है (मौजूदा दुकानदारों और डिस्ट्रीब्यूटरों से पूछें; कोई सरकारी दर नहीं है)।
  2. ऐसे डिस्ट्रीब्यूटर खोजें जो पहले से आपकी तरह की दुकानों को माल देते हैं (दुकानदारों से पूछें कि उन्हें माल कौन देता है)।
  3. लिखित समझौता करें: इलाका, न्यूनतम ऑर्डर, उधार के दिन, वापसी या एक्सपायरी नीति, और दोनों पक्ष कैसे अलग हो सकते हैं।
  4. हर आपूर्ति पर GST बिल बनाएँ; जहाँ GST नियम कहें, वहाँ ई-वे बिल बनाएँ।
  5. हर महीने डिस्ट्रीब्यूटर की बिक्री देखें और प्रमुख दुकानों पर खुद जाएँ।

खर्च

  • डिस्ट्रीब्यूटर और दुकानदार का मार्जिन बातचीत से तय होता है और सामान व इलाके के हिसाब से बदलता है; कोई सरकारी प्रतिशत नहीं है, इसलिए हम कोई प्रतिशत नहीं छापते।
  • कई डिस्ट्रीब्यूटर उधार के दिन, डिस्प्ले या ट्रेड स्कीम और एक्सपायर माल की बदली माँगते हैं; हर बात लिखित समझौते में रखें।
  • GST पोर्टल पर ई-वे बिल बनाने का कोई शुल्क सूचीबद्ध नहीं है (स्रोत: GST ई-वे बिल सिस्टम)।

नियम

  • श्रृंखला में कोई भी — निर्माता, थोक व्यापारी या दुकानदार — पैक्ड सामान छपे खुदरा बिक्री मूल्य से ज़्यादा पर नहीं बेच सकता (स्रोत: विधिक माप विज्ञान (पैक की गई वस्तुएँ) नियम, 2011)।
  • व्यवसायों के बीच माल भेजने पर GST बिल चाहिए, और जहाँ GST ई-वे बिल नियम लागू हों वहाँ ई-वे बिल (स्रोत: GST ई-वे बिल सिस्टम)।
  • अगर आप सूक्ष्म या लघु उद्यम हैं और खरीदार पंजीकृत व्यवसाय है, तो देर से भुगतान की शिकायत MSME Samadhaan पर कर सकते हैं (स्रोत: MSME Samadhaan)।

फ़ायदे

  • अपने बिक्री स्टाफ़ के बिना सैकड़ों दुकानों तक पहुँच।
  • माल रखने और दुकानदारों से वसूली का काम डिस्ट्रीब्यूटर करता है।
  • थोक ऑर्डर से उत्पादन की योजना आसान होती है।

सावधानी

  • हर स्तर पर कीमत का एक हिस्सा छोड़ना पड़ता है।
  • डिस्ट्रीब्यूटर उन ब्रांडों को आगे बढ़ाते हैं जो बेहतर स्कीम देते हैं।
  • उधार और वापसी की शर्तों से आपकी कार्यशील पूँजी फँस सकती है।
स्रोत (3)
  1. Department of Consumer Affairs: Legal Metrology (Packaged Commodities) Rules, 2011
  2. GST e-Way Bill System
  3. MSME Samadhaan: delayed payment monitoring portal
व्यापार02

संस्थागत खरीदार: अस्पताल, होटल, स्कूल, कैंटीन, कंपनियाँ

आप किसी संस्था की नियमित थोक ज़रूरत पूरी करते हैं — अस्पताल को चादरें, होटल को सब्ज़ियाँ, स्कूल को वर्दी, फ़ैक्टरी को पैकिंग सामान — आम तौर पर खरीद आदेश (परचेज़ ऑर्डर) और स्वीकृत विक्रेता सूची के आधार पर।

किसके लिए ठीक हैऐसे निर्माता और सेवा देने वाले जो एक जैसी गुणवत्ता, तय तारीख पर डिलीवरी दे सकें और उधार की शर्तों पर भुगतान का इंतज़ार कर सकें।शुरुआत, खर्च और नियमबंद करें

शुरुआत कैसे करें

  1. डिलीवरी की पहुँच में 20 संस्थाओं की सूची बनाएँ और हर जगह के खरीद या स्टोर अधिकारी का पता करें।
  2. विक्रेता फ़ाइल तैयार करें: Udyam प्रमाणपत्र, GST प्रमाणपत्र, PAN, रद्द चेक, सामान के नमूने, जाँच रिपोर्ट और मूल्य सूची।
  3. उनकी स्वीकृत विक्रेता सूची में नाम जुड़वाने के लिए आवेदन करें; कई बड़े खरीदार ऑनलाइन विक्रेता पंजीकरण करते हैं।
  4. भुगतान की अवधि खरीद आदेश पर लिखित में तय करें।
  5. अगर खरीदार बड़ी कंपनी या केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम (CPSE) है, तो पूछें कि क्या वह MSE बिलों का भुगतान TReDS से करता है।

खर्च

  • कोई मानक शुल्क नहीं; कुछ खरीदार विक्रेता पंजीकरण या टेंडर शुल्क लेते हैं — आवेदन से पहले पूछें।
  • TReDS पर स्वीकृत बिलों को भुनाकर जल्दी नकद लिया जा सकता है; छूट की दर प्लेटफ़ॉर्म पर बैंक और NBFC बोली लगाकर तय करते हैं (स्रोत: PIB, 10 जुलाई 2026)।

नियम

  • Udyam पर पंजीकृत सूक्ष्म और लघु उद्यम खरीदारों के खिलाफ़ देर से भुगतान का मामला MSME Samadhaan पर दर्ज कर सकते हैं (स्रोत: MSME Samadhaan)।
  • सरकार ने केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (CPSE) के लिए सभी MSME बिलों का भुगतान TReDS से करना अनिवार्य किया है (स्रोत: PIB, 10 जुलाई 2026)।
  • अस्पताल, होटल या कैंटीन को दिए जाने वाले खाद्य सामान के लिए FSSAI पंजीकरण या लाइसेंस चाहिए (स्रोत: FSSAI FoSCoS)।

फ़ायदे

  • एक ही खरीदार से बड़े और बार-बार ऑर्डर।
  • पहले से पता माँग से उत्पादन की योजना बनती है।
  • एक अच्छी संस्था का हवाला दूसरी संस्थाओं तक रास्ता खोलता है।

सावधानी

  • लंबे भुगतान चक्र से छोटी इकाइयों पर दबाव पड़ता है।
  • कड़ी गुणवत्ता जाँच; एक लॉट रद्द होने पर अनुबंध खत्म हो सकता है।
  • हर नवीनीकरण पर कीमत घटाने का दबाव।
स्रोत (4)
  1. MSME Samadhaan: delayed payment monitoring portal
  2. PIB, 10 Jul 2026: Government mandates TReDS for settlement of all MSME invoices by CPSEs
  3. FSSAI: FoSCoS licensing and registration portal
  4. Udyam Registration portal (Ministry of MSME)
व्यापार03

प्रदर्शनियाँ, व्यापार मेले और क्रेता-विक्रेता बैठकें

आप किसी व्यापार मेले या क्षेत्रीय प्रदर्शनी में स्टॉल लेकर कुछ ही दिनों में डिस्ट्रीब्यूटर, संस्थागत खरीदारों और ग्राहकों से मिलते हैं। हमारे Events पेज पर भारत के मुख्य मेलों की सूची है।

किसके लिए ठीक हैतैयार सामान वाले निर्माता जो डिस्ट्रीब्यूटर या थोक खरीदार चाहते हैं, और सप्लायर व प्रतिस्पर्धियों को देखने वाले उद्यमी।शुरुआत, खर्च और नियमबंद करें

शुरुआत कैसे करें

  1. BuildingBusiness.in के Events पेज से अपने क्षेत्र के एक-दो मेले चुनें।
  2. स्टॉल के पैसे देने से पहले एक बार दर्शक के रूप में जाएँ।
  3. अपने राज्य के MSME विभाग, ज़िला उद्योग केंद्र (DIC) या उद्योग संघ से पूछें कि क्या उनके पवेलियन में रियायती स्टॉल मिल सकता है।
  4. नमूने, छपी मूल्य सूची, विज़िटिंग कार्ड और हर पूछताछ लिखने के लिए एक सरल फ़ॉर्म तैयार रखें।
  5. हर पूछताछ पर एक हफ़्ते के भीतर संपर्क करें।

खर्च

  • स्टॉल का किराया हर आयोजक तय करता है; मौजूदा शुल्क मेले की आधिकारिक साइट पर देखें।
  • MSME मंत्रालय की अंतरराष्ट्रीय सहयोग योजना (बाज़ार विकास सहायता) पात्र संस्थाओं के ज़रिए स्वीकृत आयोजनों में MSME की भागीदारी में मदद करती है; 2026-27 के लिए इसकी स्थिति स्पष्ट नहीं है — भरोसा करने से पहले मंत्रालय से पुष्टि करें (स्रोत: myScheme, ICS-MDA)।

नियम

  • मेले में खाद्य सामान बेचने के लिए FSSAI पंजीकरण चाहिए (स्रोत: FSSAI FoSCoS)।
  • दूसरे राज्य के मेले में माल ले जाने के लिए GST के सही दस्तावेज़ चाहिए।

फ़ायदे

  • कुछ ही दिनों में आमने-सामने कई खरीदारों से मुलाकात।
  • प्रतिस्पर्धियों का सामान और कीमतें देखने का मौका।
  • IITF जैसे बड़े मेलों में राज्य पवेलियन स्थानीय सामान दिखाते हैं।

सावधानी

  • स्टॉल, यात्रा और ठहरने का खर्च पहले देना पड़ता है, ऑर्डर की कोई गारंटी नहीं।
  • बड़े सार्वजनिक मेलों में भीड़ होती है; गंभीर खरीदार केवल व्यापार दिवसों पर आ सकते हैं।
  • जल्दी संपर्क न करने से लीड बेकार हो जाती हैं।
स्रोत (4)
  1. Embassy of India, Bern: Calendar of trade fairs in India 2026 and 2027
  2. India International Trade Fair (ITPO)
  3. myScheme: International Cooperation Scheme — Market Development Assistance
  4. FSSAI: FoSCoS licensing and registration portal
व्यापार04

फ़्रैंचाइज़ी मॉडल

दो तरीके: आप दूसरों को शुल्क और बिक्री में हिस्से के बदले अपने नाम से आउटलेट खोलने देकर अपना ब्रांड बढ़ा सकते हैं, या किसी मौजूदा ब्रांड की फ़्रैंचाइज़ी ले सकते हैं। फ़्रैंचाइज़ी समझौता ब्रांड का उपयोग, आपूर्ति, शुल्क और इलाका तय करता है।

किसके लिए ठीक हैजिनका आउटलेट मॉडल सफल हो चुका है और जिनके पास लिखित प्रक्रियाएँ हैं (खाद्य, खुदरा, शिक्षा, सेवाएँ); या ऐसे निवेशक जो शून्य से शुरू करने के बजाय आज़माया हुआ मॉडल चाहते हैं।शुरुआत, खर्च और नियमबंद करें

शुरुआत कैसे करें

  1. फ़्रैंचाइज़र के रूप में: पहले कम से कम एक आउटलेट मुनाफ़े में चलाएँ और हर प्रक्रिया लिखें (रेसिपी, आपूर्ति, प्रशिक्षण, कीमत)।
  2. दूसरों को देने से पहले अपने ब्रांड नाम का IP India पर ट्रेड मार्क पंजीकरण कराएँ।
  3. वकील से फ़्रैंचाइज़ी समझौता बनवाएँ: शुल्क, रॉयल्टी, आपूर्ति की शर्तें, इलाका, अवधि, अलग होने और विवाद निपटारे के नियम।
  4. फ़्रैंचाइज़ी लेने वाले के रूप में: देखें कि ब्रांड का ट्रेड मार्क पंजीकृत है (IP India पर खोजें) और पैसा देने से पहले मौजूदा फ़्रैंचाइज़ी मालिकों से बात करें।
  5. हर आउटलेट के लाइसेंस अपने नाम से लें (खाद्य के लिए FSSAI, दुकान पंजीकरण, GST)।

खर्च

  • फ़्रैंचाइज़ी शुल्क, रॉयल्टी और साज-सज्जा का खर्च हर ब्रांड अपने समझौते में तय करता है; कोई सरकारी दर नहीं है।
  • ट्रेड मार्क आवेदन शुल्क IP India प्रकाशित करता है — मौजूदा शुल्क ipindia.gov.in पर देखें (स्रोत: IP India)।

नियम

  • संबंध लिखित समझौते से चलता है; हस्ताक्षर से पहले शुल्क, आपूर्ति और अलग होने की हर शर्त पढ़ें।
  • हर आउटलेट को अपने लाइसेंस चाहिए, जैसे खाद्य परिसर के लिए FSSAI (स्रोत: FSSAI FoSCoS)।
  • पंजीकृत ट्रेड मार्क उस ब्रांड नाम की रक्षा करता है जिसे आप लाइसेंस पर दे रहे हैं (स्रोत: IP India)।

फ़ायदे

  • फ़्रैंचाइज़र दूसरों की पूँजी से बढ़ता है।
  • फ़्रैंचाइज़ी लेने वाला जाने-माने ब्रांड और आज़माई प्रक्रियाओं से शुरू करता है।
  • केंद्रीय खरीद से सभी आउटलेट का कच्चा माल सस्ता हो सकता है।

सावधानी

  • एक खराब चलने वाला आउटलेट पूरे ब्रांड को नुकसान पहुँचाता है।
  • बिक्री कमज़ोर होने पर भी फ़्रैंचाइज़ी लेने वाले को शुल्क और रॉयल्टी देनी पड़ती है।
  • समझौता अस्पष्ट हो तो इलाके, आपूर्ति कीमत और अलग होने पर विवाद आम हैं।
स्रोत (3)
  1. IP India: trade mark search and filing
  2. FSSAI: FoSCoS licensing and registration portal
  3. Udyam Registration portal (Ministry of MSME)

सरकार

सरकारी ख़रीदारों को बेचें

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सरकार01

सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM)

GeM वह ऑनलाइन बाज़ार है जिससे केंद्र और राज्य सरकार के विभाग, सार्वजनिक उपक्रम (PSU) और दूसरी सरकारी संस्थाएँ सामान और सेवाएँ खरीदती हैं। विक्रेता पंजीकरण करके सामान या सेवाएँ सूचीबद्ध करते हैं और सीधी खरीद, सबसे कम कीमत (L1) या बोली के ज़रिए ऑर्डर पाते हैं।

किसके लिए ठीक हैमानक सामान या सेवाएँ देने वाले निर्माता, सेवा प्रदाता और स्टार्टअप (फ़र्नीचर, स्टेशनरी, IT सामान, सफ़ाई, सुरक्षा, खानपान) जो सरकारी विनिर्देशों के अनुसार आपूर्ति कर सकें।शुरुआत, खर्च और नियमबंद करें

शुरुआत कैसे करें

  1. तैयार रखें: मुख्य उपयोगकर्ता का आधार या PAN और उससे जुड़ा मोबाइल, चालू ईमेल, व्यवसाय का PAN, CIN (केवल कंपनियों के लिए), बैंक खाता और IFSC, पंजीकृत पता, और अगर व्यवसाय 24 महीने से पुराना है तो पिछले 3 साल के आयकर रिटर्न (बोली में भाग लेने के लिए)।
  2. वैकल्पिक पर उपयोगी: Udyam नंबर (MSE लाभ के लिए), DPIIT नंबर (स्टार्टअप), GST नंबर।
  3. gem.gov.in पर विक्रेता के रूप में पंजीकरण करें और विक्रेता प्रोफ़ाइल पूरी करें।
  4. अगर आपकी सामान श्रेणी में ज़रूरी है, तो विक्रेता मूल्यांकन (vendor assessment) पूरा करें।
  5. सही श्रेणी में अपने दाम के साथ सामान या सेवाएँ सूचीबद्ध करें और अपनी श्रेणी की बोलियों पर नज़र रखें।

खर्च

  • विक्रेता पंजीकरण: कोई शुल्क नहीं — GeM के अनुसार पंजीकरण पर कोई शुल्क नहीं लगता (स्रोत: GeM विक्रेता FAQ)।
  • कॉशन मनी (पहले कारोबार के हिसाब से ली जाने वाली वापसी योग्य जमा राशि): GeM के अनुसार यह प्रावधान 2025 में बंद कर दिया गया (स्रोत: GeM विक्रेता FAQ)।
  • वार्षिक माइलस्टोन शुल्क: किसी वित्त वर्ष में विक्रेता के सामान का मूल्य ₹20 लाख पार करने पर एक बार ₹10,000 और GST (स्रोत: GeM विक्रेता FAQ)।
  • ₹10 लाख से ज़्यादा के अनुबंधों पर लेन-देन शुल्क लगता है; दरें GeM की राजस्व नीति में हैं — मौजूदा शुल्क वहीं देखें (स्रोत: GeM विक्रेता FAQ)।
  • किसी वित्त वर्ष में कुल राशि ₹30,000 से ज़्यादा होने पर लेन-देन शुल्क और वार्षिक माइलस्टोन शुल्क पर 2% TDS कटता है (स्रोत: GeM विक्रेता FAQ)।
  • विक्रेता मूल्यांकन शुल्क: दरें GeM की वेंडर वैलिडेशन नीति में हैं — मौजूदा शुल्क GeM पर देखें (स्रोत: GeM विक्रेता FAQ)।

नियम

  • MSE के लिए सार्वजनिक खरीद नीति के तहत केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और CPSE को अपनी सालाना खरीद का कम से कम 25% MSE से लेना होता है, जिसमें 4% SC/ST स्वामित्व वाले और 3% महिला स्वामित्व वाले MSE से (स्रोत: PIB, 8 अगस्त 2024; MSME Sambandh)।
  • GeM FAQ: जहाँ नीति लागू हो, बोली की 100% मात्रा L1 MSE विक्रेता को दी जाती है (स्रोत: GeM विक्रेता FAQ)।
  • GeM पर ₹5 लाख से ज़्यादा अनुमानित मूल्य की बोली पर EMD (बयाना राशि) लगती है; अनुभव और कारोबार की शर्तों से MSE छूट तभी मिलती है जब खरीदार बोली बनाते समय इसे चुने (स्रोत: GeM विक्रेता FAQ)।
  • DPIIT मान्यता प्राप्त स्टार्टअप को पिछले कारोबार, पिछले अनुभव और EMD में छूट मिल सकती है (स्रोत: स्टार्टअप इंडिया प्लेबुक)।

फ़ायदे

  • दफ़्तरों के चक्कर लगाए बिना पूरे भारत के सरकारी खरीदारों तक सीधी पहुँच।
  • पंजीकरण निःशुल्क।
  • बोलियों में MSE और स्टार्टअप को छूट।

सावधानी

  • आम सामान पर कीमत की कड़ी होड़।
  • बड़े अनुबंधों पर और साल में ₹20 लाख की बिक्री के बाद शुल्क।
  • बोली में तकनीकी विनिर्देशों और दस्तावेज़ों का पूरा पालन ज़रूरी।
स्रोत (5)
  1. GeM: Seller FAQs
  2. GeM: Seller registration guide
  3. PIB, 8 Aug 2024: Procurement of goods and services from MSMEs (Lok Sabha reply)
  4. MSME Sambandh: About Public Procurement Policy
  5. Startup India: Playbook of Government Schemes and Initiatives for Startups (June 2026)
सरकार02

सरकारी और PSU टेंडर (MSE के लिए सार्वजनिक खरीद नीति)

GeM के अलावा मंत्रालय और केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम केंद्रीय सार्वजनिक खरीद पोर्टल (CPPP) और अपनी ई-खरीद साइटों पर टेंडर से भी खरीदते हैं। सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए सार्वजनिक खरीद नीति आदेश, 2012 इन खरीदों में MSE को आरक्षित हिस्सा और कीमत में प्राथमिकता देता है।

किसके लिए ठीक हैUdyam में पंजीकृत सूक्ष्म और लघु निर्माता तथा सेवा प्रदाता। व्यापारी, डिस्ट्रीब्यूटर, एकमात्र एजेंट और वर्क्स कॉन्ट्रैक्ट इस नीति में शामिल नहीं हैं।शुरुआत, खर्च और नियमबंद करें

शुरुआत कैसे करें

  1. Udyam पंजीकरण करें और अगर लागू हो तो वहाँ SC/ST या महिला स्वामित्व दर्ज करें।
  2. ई-टेंडर के लिए क्लास 3 डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र (DSC) लें।
  3. केंद्रीय सार्वजनिक खरीद पोर्टल (eprocure.gov.in) और जिन PSU को आपूर्ति करना चाहते हैं उनके विक्रेता पोर्टल पर बोलीदाता के रूप में पंजीकरण करें।
  4. देखें कि क्या आपका सामान MSE से विशेष खरीद के लिए आरक्षित 358 वस्तुओं में शामिल है।
  5. CPSE के साथ MSME मंत्रालय के विक्रेता विकास कार्यक्रमों (VDP) में भाग लें।

खर्च

  • नीति के तहत MSE को टेंडर दस्तावेज़ मुफ़्त मिलते हैं और बयाना राशि (EMD) से छूट मिलती है (स्रोत: DC-MSME PPP FAQ, प्रश्न 11)।
  • सिक्योरिटी डिपॉज़िट या परफ़ॉर्मेंस बैंक गारंटी से कोई छूट नहीं है (स्रोत: DC-MSME PPP FAQ, प्रश्न 20)।
  • डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र: कीमत उस प्रमाणन संस्था पर निर्भर है जिससे आप लेते हैं; कोई सरकारी दर नहीं।

नियम

  • केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और CPSE को अपनी कुल सालाना खरीद का कम से कम 25% MSE से करना होता है (स्रोत: MSME Sambandh; PIB, 8 अगस्त 2024)।
  • इस 25% में से 4% SC/ST उद्यमियों के स्वामित्व वाले MSE और 3% महिला उद्यमियों के स्वामित्व वाले MSE के लिए है (स्रोत: MSME Sambandh; PIB, 8 अगस्त 2024)।
  • खरीद में प्राथमिकता: अगर सबसे कम बोली (L1) किसी गैर-MSE की है, तो L1 + 15% के भीतर बोली लगाने वाला MSE अपनी कीमत L1 तक घटाकर आपूर्ति का हिस्सा ले सकता है; ऐसा MSE कुल टेंडर मूल्य का 25% तक आपूर्ति कर सकता है (स्रोत: DC-MSME PPP FAQ, प्रश्न 8)।
  • अगर टेंडर का सामान बाँटा नहीं जा सकता, तो L1 + 15% के भीतर वाले MSE को पूरी आपूर्ति दी जा सकती है (स्रोत: DC-MSME PPP FAQ, प्रश्न 21)।
  • 358 वस्तुएँ केवल MSE से खरीद के लिए आरक्षित हैं (स्रोत: DC-MSME PPP FAQ, प्रश्न 17)।
  • केवल MSE द्वारा बनाया गया सामान और दी गई सेवाएँ पात्र हैं; व्यापारी, डिस्ट्रीब्यूटर, एकमात्र एजेंट और वर्क्स कॉन्ट्रैक्ट बाहर हैं (स्रोत: DC-MSME PPP FAQ, प्रश्न 18 और 49)।
  • MSE को पिछले कारोबार और पिछले अनुभव की शर्तों में छूट दी जा सकती है (स्रोत: DC-MSME PPP FAQ, प्रश्न 11)।

फ़ायदे

  • केंद्र सरकार की खरीद का कानूनी रूप से तय हिस्सा MSE के लिए रखा गया है।
  • मुफ़्त टेंडर दस्तावेज़ और EMD छूट से बोली का खर्च घटता है।
  • MSE से खरीद ₹39,037.13 करोड़ (2019-20) से बढ़कर ₹80,015.56 करोड़ (2023-24) हुई (स्रोत: PIB, 8 अगस्त 2024)।

सावधानी

  • सिक्योरिटी डिपॉज़िट या परफ़ॉर्मेंस बैंक गारंटी में कोई राहत नहीं।
  • 2023-24 में कुल ₹1,95,410.13 करोड़ की खरीद में से महिला स्वामित्व वाले MSE को ₹2,967.98 करोड़ मिले, जो 3% लक्ष्य से काफ़ी कम है (स्रोत: PIB, 8 अगस्त 2024)।
  • पहली बार बोली लगाने वालों के लिए टेंडर के कागज़ और तकनीकी शर्तें कठिन होती हैं।
स्रोत (5)
  1. DC-MSME: FAQs on Public Procurement Policy for MSEs (25 Mar 2022)
  2. MSME Sambandh: About Public Procurement Policy
  3. PIB, 8 Aug 2024: Procurement of goods and services from MSMEs (Lok Sabha reply)
  4. Central Public Procurement Portal (CPPP)
  5. Udyam Registration portal (Ministry of MSME)
सरकार03

e-NAM और APMC मंडियाँ

APMC मंडियाँ कृषि उपज के लिए राज्य द्वारा नियंत्रित थोक बाज़ार हैं। e-NAM (राष्ट्रीय कृषि बाज़ार) एक ऑनलाइन व्यापार प्लेटफ़ॉर्म है जो असली मंडियों को जोड़ता है, ताकि उपज पारदर्शी ऑनलाइन बोली से बिके और भुगतान सीधे किसान के बैंक खाते में आए।

किसके लिए ठीक हैअनाज, दालें, तिलहन, सब्ज़ियाँ, फल और दूसरी अधिसूचित उपज बेचने वाले किसान और FPO; मंडियों से खरीदने वाले व्यापारी।शुरुआत, खर्च और नियमबंद करें

शुरुआत कैसे करें

  1. देखें कि आपकी नज़दीकी मंडी e-NAM पर है या नहीं (राज्यवार सूची enam.gov.in पर)।
  2. किसान और FPO पहचान और बैंक विवरण के साथ enam.gov.in पर या मंडी के e-NAM काउंटर पर पंजीकरण करें।
  3. उपज मंडी लाएँ; ऑनलाइन बोली से पहले उसका तौल होता है और जहाँ सुविधा हो वहाँ गुणवत्ता जाँच।
  4. सबसे ऊँची बोली स्वीकार या अस्वीकार करें; भुगतान आपके बैंक खाते में आता है।
  5. व्यापारियों को खरीदने के लिए राज्य APMC / मंडी बोर्ड से लाइसेंस चाहिए।

खर्च

  • मंडी शुल्क, आढ़तिया (कमीशन एजेंट) शुल्क और दूसरे बाज़ार शुल्क हर राज्य का APMC कानून तय करता है और राज्य के हिसाब से अलग हैं — अपने राज्य के मंडी बोर्ड से पूछें।
  • केंद्र सरकार राज्यों को e-NAM ढाँचे (जैसे गुणवत्ता जाँच लैब, इलेक्ट्रॉनिक तौल) के लिए प्रति मंडी ₹75.00 लाख तक देती है; यह राज्यों के लिए अनुदान है, विक्रेताओं के लिए नहीं (स्रोत: PIB, 17 मार्च 2026)।

नियम

  • कृषि विपणन हर राज्य के APMC कानून से नियंत्रित है; अधिसूचित उपज, शुल्क और लाइसेंस राज्य के हिसाब से अलग हैं।
  • फ़रवरी 2026 तक 23 राज्यों और 4 केंद्रशासित प्रदेशों की 1,656 मंडियाँ e-NAM पर थीं, और 1.80 करोड़ किसान, 2.72 लाख व्यापारी और 4,724 FPO पंजीकृत थे (स्रोत: PIB, 17 मार्च 2026)।

फ़ायदे

  • ऑनलाइन बोली से एक स्थानीय व्यापारी के बजाय कई खरीदार मिलते हैं।
  • भुगतान सीधे किसान के बैंक खाते में जाता है।
  • जहाँ सुविधा है, गुणवत्ता जाँच से आपकी उपज का दर्ज ग्रेड मिलता है।

सावधानी

  • पहुँच असमान है: कुछ राज्यों में बहुत कम e-NAM मंडियाँ हैं (जैसे कर्नाटक में 5 और केरल में 6) (स्रोत: PIB, 17 मार्च 2026)।
  • उपज मंडी तक खुद ले जानी पड़ती है।
  • मंडी शुल्क राज्य के हिसाब से अलग हैं और खर्च बढ़ाते हैं।
स्रोत (2)
  1. PIB, 17 Mar 2026: e-NAM integrates 1,656 mandis (Lok Sabha reply)
  2. e-NAM: National Agriculture Market portal

ऑनलाइन

इंटरनेट पर बेचें

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ONDC (डिजिटल कॉमर्स के लिए खुला नेटवर्क)

ONDC सरकार समर्थित एक खुला नेटवर्क है, कोई एक ऐप नहीं। आप किसी सेलर ऐप (सेलर नेटवर्क पार्टिसिपेंट) के ज़रिए अपना सामान सूचीबद्ध करते हैं, और नेटवर्क से जुड़े किसी भी बायर ऐप से ग्राहक आपको ढूँढ सकते हैं।

किसके लिए ठीक हैछोटी दुकानें, रेस्टोरेंट, निर्माता और MSME जो किसी एक मार्केटप्लेस पर निर्भर हुए बिना ऑनलाइन ग्राहक चाहते हैं।शुरुआत, खर्च और नियमबंद करें

शुरुआत कैसे करें

  1. ऐसा सेलर ऐप चुनें जो आपकी श्रेणी और शहर में काम करता हो (सेलर-साइड प्रतिभागियों की सूची ondc.org पर है)।
  2. सेलर ऐप को अपना KYC, GST विवरण (जहाँ लागू हो), बैंक विवरण दें और उसकी शर्तें व भुगतान अवधि तय करें।
  3. अपना कैटलॉग बनाएँ: सामान का नाम, ब्रांड, फ़ोटो, MRP, बिक्री मूल्य और स्टॉक।
  4. सेलर ऐप से पूछें कि क्या आप MSME-TEAM पहल के तहत सहायता के पात्र हैं।
  5. मदद के लिए ONDC Sahayak व्हाट्सऐप बॉट या ONDC Academy का उपयोग करें।

खर्च

  • हर सेलर ऐप अपना शुल्क खुद तय करता है; जुड़ने से पहले सेलर ऐप से मौजूदा शुल्क पूछें।
  • MSME-TEAM पहल सेलर नेटवर्क पार्टिसिपेंट के ज़रिए सूक्ष्म और लघु उद्यमों को कैटलॉग बनाने, खाता संभालने, लॉजिस्टिक्स और पैकेजिंग के लिए आर्थिक सहायता देती है; यह 2024 से 2027 तक है और 5 लाख MSE (आधे महिला स्वामित्व वाले) का लक्ष्य है (स्रोत: PIB ONDC पृष्ठभूमि नोट, 4 जनवरी 2025)।

नियम

  • विक्रेता सेलर ऐप के ज़रिए जुड़ते हैं; ONDC का 'फ़ीट ऑन स्ट्रीट' कार्यक्रम विक्रेताओं को सेलर ऐप पर जुड़ने में मदद करता है (स्रोत: PIB ONDC पृष्ठभूमि नोट, 4 जनवरी 2025)।
  • आप जो बेचते हैं उस पर GST, FSSAI और विधिक माप विज्ञान के सामान्य नियम किसी भी दूसरे माध्यम की तरह लागू होते हैं।

फ़ायदे

  • एक लिस्टिंग कई बायर ऐप पर दिख सकती है।
  • किसी एक मार्केटप्लेस से बँधने के बजाय सेलर ऐप बदला जा सकता है।
  • MSME-TEAM के तहत जुड़ने में सरकारी सहायता।

सावधानी

  • श्रेणी और शहर के हिसाब से ग्राहकों की संख्या बहुत बदलती है।
  • सेवा की गुणवत्ता आपके चुने सेलर ऐप पर निर्भर है।
  • शुल्क और भुगतान अवधि सभी सेलर ऐप पर एक जैसी नहीं है।
स्रोत (2)
  1. PIB backgrounder, 4 Jan 2025: Revolutionizing Digital Commerce — The ONDC Initiative
  2. ONDC: official site
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Amazon.in विक्रेता

आप Amazon.in पर सामान सूचीबद्ध करते हैं और उसे खुद भेजते हैं, Amazon की Easy Ship पिकअप से, या Amazon के गोदामों से (Fulfilment by Amazon)। Amazon ग्राहक से भुगतान लेकर शुल्क काटने के बाद आपको पैसा देता है।

किसके लिए ठीक हैपैक्ड उपभोक्ता सामान के ब्रांड और निर्माता जिनके पास फ़ोटो, बारकोड और पूरे भारत में भेजने लायक स्टॉक हो।शुरुआत, खर्च और नियमबंद करें

शुरुआत कैसे करें

  1. sell.amazon.in पर जाकर 'Start Selling' पर क्लिक करें; साइन इन करें या खाता बनाएँ और OTP से मोबाइल सत्यापित करें।
  2. अपना GST नंबर डालकर सत्यापित करें (सत्यापन में 72 घंटे तक लग सकते हैं)। GST के बिना आप केवल GST-मुक्त सामान अपने PAN से बेच सकते हैं।
  3. स्टोर का नाम चुनें और पिकअप पता दें, जो उसी राज्य में हो जहाँ GST पंजीकरण है।
  4. शिपिंग का तरीका चुनें (Easy Ship, Self Ship या Fulfilment by Amazon) और बैंक खाता जोड़ें।
  5. सामान सूचीबद्ध करें और स्टोर शुरू करें।

खर्च

  • रेफ़रल शुल्क: बिक्री मूल्य का प्रतिशत, जो सामान की श्रेणी पर निर्भर है; 0% से शुरू (स्रोत: Amazon.in Fees and Pricing)।
  • क्लोज़िंग शुल्क: सामान की कीमत पर आधारित, ₹2 से शुरू, कीमत के दायरे और फ़ुलफ़िलमेंट के तरीके के हिसाब से बदलता है (स्रोत: Amazon.in Fees and Pricing)।
  • वज़न हैंडलिंग (शिपिंग) शुल्क: हर भेजे गए सामान पर ₹37 से शुरू, आकार और दूरी के हिसाब से बदलता है (स्रोत: Amazon.in Fees and Pricing)।
  • कुछ फ़ुलफ़िलमेंट तरीकों और वैकल्पिक कार्यक्रमों पर दूसरे शुल्क भी लगते हैं; श्रेणी-वार दरें बदलती रहती हैं — कीमत तय करने से पहले Amazon विक्रेता पेज पर मौजूदा शुल्क देखें।

नियम

  • GST नंबर अनिवार्य है, सिवाय GST-मुक्त सामान के, जिसे PAN विवरण से बेचा जा सकता है (स्रोत: Amazon.in विक्रेता पंजीकरण गाइड)।
  • पिकअप पता उसी राज्य में होना चाहिए जहाँ आपका GST पंजीकृत है (स्रोत: Amazon.in विक्रेता पंजीकरण गाइड)।
  • Easy Ship में, अगर आप ग्राहक को मुफ़्त डिलीवरी देते हैं तब भी Amazon शिपिंग शुल्क लेता है (स्रोत: Amazon.in विक्रेता पंजीकरण गाइड)।

फ़ायदे

  • पहले दिन से पूरे देश में पहुँच और ग्राहकों का भरोसा।
  • श्रेणी-वार शुल्क प्रकाशित है, इसलिए पहले से कीमत तय की जा सकती है।
  • खुद भेजने से लेकर पूरे गोदाम तक लॉजिस्टिक्स के विकल्प।

सावधानी

  • कई शुल्क (रेफ़रल, क्लोज़िंग, शिपिंग, अन्य) मिलकर मार्जिन घटाते हैं।
  • एक ही सामान पर कई विक्रेताओं से कीमत की होड़ और वापसी।
  • ज़्यादातर सामान के लिए GST पंजीकरण ज़रूरी।
स्रोत (2)
  1. Amazon.in Sell: Fees and Pricing
  2. Amazon.in Sell: Seller registration guide
ऑनलाइन03

Flipkart विक्रेता

आप Flipkart के Seller Hub से अपना सामान सूचीबद्ध करते हैं। Flipkart ऑर्डर उठाकर पहुँचाता है और अपना शुल्क काटकर आपको भुगतान करता है।

किसके लिए ठीक हैफ़ैशन, घरेलू सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सेसरी और दूसरे उपभोक्ता सामान के निर्माता जिनके पास भेजने लायक स्टॉक तैयार हो।शुरुआत, खर्च और नियमबंद करें

शुरुआत कैसे करें

  1. seller.flipkart.com पर जाकर मोबाइल नंबर और ईमेल से विक्रेता पंजीकरण शुरू करें।
  2. अपना GSTIN (या मुक्त श्रेणियों के लिए Flipkart जो विकल्प देता है), PAN, बैंक खाता विवरण और पिकअप पता तैयार रखें।
  3. प्रोफ़ाइल पूरी करें, सामान सूचीबद्ध करें और खाते के सत्यापन का इंतज़ार करें।
  4. कीमत तय करने से पहले Seller Hub में Flipkart का मौजूदा शुल्क और कमीशन पेज पढ़ें।

खर्च

  • Flipkart अपना कमीशन, फ़िक्स्ड फ़ीस, कलेक्शन फ़ीस और शिपिंग फ़ीस Seller Hub में बताता है; हम यह पेज सत्यापित रूप में नहीं पढ़ सके — मौजूदा शुल्क विक्रेता पेज पर देखें।

नियम

  • पंजीकरण की शर्तें, दस्तावेज़ों की सूची और शुल्क Flipkart तय करता है और बदल सकते हैं; जुड़ने से पहले Seller Hub की उपयोग शर्तें पढ़ें।
  • ऑनलाइन बेचे जाने वाले सामान पर भी GST, विधिक माप विज्ञान लेबलिंग और (खाद्य के लिए) FSSAI नियम वैसे ही लागू हैं जैसे ऑफ़लाइन।

फ़ायदे

  • पूरे भारत में बड़ी ग्राहक संख्या।
  • पिकअप और डिलीवरी Flipkart संभालता है।
  • लिस्टिंग और ऑर्डर ट्रैकिंग के लिए Seller Hub के टूल।

सावधानी

  • शुल्क श्रेणी और विक्रेता स्तर के हिसाब से बदलते हैं; हर सामान का मार्जिन अलग से जाँचना पड़ता है।
  • वापसी, खासकर फ़ैशन में, खर्च बढ़ाती है।
  • सेल के दिनों में कड़ी होड़।
स्रोत (2)
  1. Flipkart Seller Hub
  2. Flipkart Seller Hub: Fees and commission
ऑनलाइन04

Meesho सप्लायर

Meesho कम कीमत वाला मार्केटप्लेस है, जहाँ छोटे निर्माता और थोक व्यापारी 'सप्लायर' के रूप में सामान सूचीबद्ध करते हैं। Meesho डिलीवरी संभालता है और ऑर्डर पूरा होने पर सप्लायर को भुगतान करता है।

किसके लिए ठीक हैकम दाम के फ़ैशन, घरेलू और रसोई के सामान के निर्माता जो कम मार्जिन पर ज़्यादा मात्रा में बेच सकें।शुरुआत, खर्च और नियमबंद करें

शुरुआत कैसे करें

  1. supplier.meesho.com पर जाकर मोबाइल नंबर और ईमेल से पंजीकरण करें।
  2. अपना GSTIN डालें, या — अगर GST नहीं है — GST पोर्टल से लिया गया एनरोलमेंट ID / UIN, जैसा Meesho की सप्लायर साइट बताती है।
  3. बैंक खाता और पिकअप पता जोड़ें।
  4. Meesho के मौजूदा मूल्य और शिपिंग पेज पढ़कर कैटलॉग अपलोड करें और कीमत तय करें।

खर्च

  • Meesho की सप्लायर साइट का शीर्षक है 'Meesho पर 0% कमीशन पर ऑनलाइन बेचें'। शिपिंग, जुर्माना और दूसरे शुल्क Meesho तय करता है और बदल सकते हैं — मौजूदा शुल्क सप्लायर के मूल्य और शिपिंग पेज पर देखें (स्रोत: Meesho सप्लायर पेज)।

नियम

  • बिना GSTIN वाले विक्रेताओं को GST पोर्टल से एनरोलमेंट ID / UIN लेना होता है; ऐसे विक्रेता केवल अपने पंजीकृत राज्य के भीतर बेच सकते हैं (स्रोत: Meesho सप्लायर 'बिना GST बेचें' पेज)।
  • लिस्टिंग से पहले वापसी और जुर्माने पर Meesho की सप्लायर शर्तें पढ़ें।

फ़ायदे

  • नियमित GST पंजीकरण के बिना भी (अपने राज्य के भीतर) ऑनलाइन बिक्री का रास्ता।
  • पहली बार ऑनलाइन बेचने वालों के लिए कम शुरुआती खर्च।
  • छोटे शहरों में कम कीमत चाहने वाले बड़ी संख्या में ग्राहक।

सावधानी

  • बहुत कम बिक्री मूल्य से मार्जिन कम बचता है।
  • फ़ैशन श्रेणियों में वापसी ज़्यादा हो सकती है।
  • नियमित GST के बिना अपने राज्य के बाहर नहीं बेच सकते।
स्रोत (2)
  1. Meesho Supplier: pricing page
  2. Meesho Supplier: Sell without GST
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B2B पोर्टल: IndiaMART और TradeIndia

व्यवसाय-से-व्यवसाय निर्देशिकाएँ, जहाँ खरीदार अपनी ज़रूरत डालते हैं और सप्लायर खोजते हैं। आप अपना सामान सूचीबद्ध करते हैं, फ़ोन या संदेश से पूछताछ (लीड) पाते हैं और सौदा खुद पक्का करते हैं — पोर्टल भुगतान या डिलीवरी नहीं संभालता।

किसके लिए ठीक हैमशीनरी, कच्चा माल, औद्योगिक सामान, पैकेजिंग और थोक सामान के निर्माता जो दूसरे व्यवसायों को बेचते हैं।शुरुआत, खर्च और नियमबंद करें

शुरुआत कैसे करें

  1. IndiaMART (seller.indiamart.com) और TradeIndia पर निःशुल्क लिस्टिंग बनाएँ।
  2. साफ़ फ़ोटो, विनिर्देश, न्यूनतम ऑर्डर मात्रा और कीमत का दायरा डालें।
  3. हर पूछताछ का उसी दिन जवाब दें; कोटेशन से पहले खरीदार का GST नंबर और पूरा पता लें।
  4. नए खरीदारों से अग्रिम भुगतान या पक्का खरीद आदेश लें।
  5. मुफ़्त लिस्टिंग से कैसी पूछताछ आती है यह देखने के बाद ही पेड प्लान पर विचार करें।

खर्च

  • IndiaMART विक्रेताओं के लिए निःशुल्क पंजीकरण बताता है (स्रोत: IndiaMART विक्रेता पेज)।
  • IndiaMART और TradeIndia दोनों पेड सदस्यता या लीड प्लान बेचते हैं; इनकी कीमत हम सत्यापित रूप में नहीं देख सके — मौजूदा शुल्क विक्रेता पेज पर देखें।

नियम

  • पोर्टल केवल आपको जोड़ता है; बिक्री अनुबंध, बिल, GST और डिलीवरी आपके और खरीदार के बीच है।
  • उधार पर माल भेजने से पहले नए खरीदार का GSTIN GST पोर्टल पर जाँचें।

फ़ायदे

  • मुफ़्त शुरुआत और पूरे देश के व्यावसायिक खरीदारों तक पहुँच।
  • थोक और औद्योगिक सामान के लिए अच्छा, जो उपभोक्ता मार्केटप्लेस के लायक नहीं होता।
  • कीमत और शर्तों पर पूरा नियंत्रण आपका।

सावधानी

  • कई पूछताछ केवल कीमत पूछने वाली या गंभीर नहीं होतीं।
  • भुगतान की कोई सुरक्षा नहीं; धोखाधड़ी का जोखिम आपका।
  • बेहतर रैंकिंग के लिए पेड प्लान चाहिए, जिनके फ़ायदे की गारंटी नहीं।
स्रोत (2)
  1. IndiaMART: Sell on IndiaMART (Free Registration)
  2. TradeIndia: home and membership plans

निर्यात

विदेश में बेचें

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निर्यात: पहले कदम

भारत के बाहर के खरीदारों को बेचना — किसी आयातक के ज़रिए, क्रॉस-बॉर्डर ई-कॉमर्स से, या डाक/कूरियर से। हमारा निर्यात-आयात खंड योजनाओं, निर्यात संवर्धन परिषदों और बोर्डों की पूरी जानकारी देता है।

किसके लिए ठीक हैएक जैसी गुणवत्ता और क्षमता वाले निर्माता, खासकर हस्तशिल्प, कपड़ा, मसाले, प्रसंस्कृत खाद्य और इंजीनियरिंग सामान में।शुरुआत, खर्च और नियमबंद करें

शुरुआत कैसे करें

  1. dgft.gov.in पर ऑनलाइन आयातक-निर्यातक कोड (IEC) लें — एक PAN, एक IEC।
  2. अपने सामान की निर्यात संवर्धन परिषद या कमोडिटी बोर्ड से जुड़कर पंजीकरण-सह-सदस्यता प्रमाणपत्र (RCMC) लें, जो कई निर्यात लाभों के लिए ज़रूरी है।
  3. छोटी शुरुआत करें: नमूने या छोटे पार्सल कूरियर से या इंडिया पोस्ट के डाक घर निर्यात केंद्र से भेजें।
  4. या Amazon Global Selling जैसे क्रॉस-बॉर्डर मार्केटप्लेस पर पहचान प्रमाण, पता प्रमाण और अंतरराष्ट्रीय लेन-देन वाले कार्ड से पंजीकरण करें।
  5. पहली खेप से पहले BuildingBusiness.in का निर्यात-आयात खंड पढ़ें।

खर्च

  • IEC आवेदन शुल्क: DGFT प्रक्रिया पुस्तिका के परिशिष्ट-2K के अनुसार — मौजूदा शुल्क dgft.gov.in पर देखें (स्रोत: DGFT HBP 2023, अध्याय 2, पैरा 2.06)।
  • RCMC सदस्यता शुल्क हर निर्यात संवर्धन परिषद या बोर्ड तय करता है — मौजूदा शुल्क उसकी साइट पर देखें।
  • विदेश व्यापार नीति 2023 के तहत कूरियर से प्रति खेप ₹10 लाख तक निर्यात की अनुमति है (स्रोत: DGFT FTP 2023 प्रस्तुति)।

नियम

  • आयात और निर्यात के लिए IEC अनिवार्य है, सिवाय प्रक्रिया पुस्तिका में छूट वाली श्रेणियों के (स्रोत: DGFT HBP 2023, अध्याय 2)।
  • विदेश व्यापार नीति के लाभों के लिए dgft.gov.in पर IEC और डिजिटल हस्ताक्षर से ऑनलाइन आवेदन होता है।

फ़ायदे

  • बहुत बड़े बाज़ार और अक्सर बेहतर दाम।
  • निर्यात योजनाएँ, ऋण बीमा और संवर्धन परिषदें नए निर्यातकों की मदद करती हैं।
  • डाक और कूरियर से छोटे ऑर्डर में आज़माया जा सकता है।

सावधानी

  • भुगतान और मुद्रा का जोखिम; खरीदार दूर होते हैं।
  • विदेशी मानक, लेबलिंग और प्रमाणन खर्च बढ़ाते हैं।
  • DGFT, सीमा शुल्क और बैंकों में कागज़ी कार्रवाई।
स्रोत (5)
  1. DGFT: Handbook of Procedures 2023, Chapter 2 (version 07/2026)
  2. DGFT presentation: Foreign Trade Policy 2023 (31 Mar 2023)
  3. DGFT: official portal
  4. India Post: Dak Ghar Niryat Kendra
  5. Amazon Global Selling (India): how to start exporting