
खंड 37
सात महिलाओं ने 80 रुपये से लिज्जत कैसे खड़ा किया
लगभग बिना पूँजी वाली गृहिणियाँ राष्ट्रीय खाद्य ब्रांड कैसे बनाएँ?
- केस
- सफलता
- वर्ष
- 1959-2013
- ₹80
- शुरुआती पूँजी (उधार) · 1959
- $200 मिलियन से अधिक
- सालाना बिक्री · 2013
- 43,000 से अधिक
- लिज्जत से जुड़ी महिलाएँ · 2013
- 01
हालात
15 मार्च 1959 को दक्षिण बंबई के गिरगाँव की एक पुरानी रिहायशी इमारत की सात महिलाएँ इमारत की छत पर इकट्ठा हुईं। उन्होंने 80 रुपये उधार लेकर काम शुरू किया और पहली बार पापड़ के चार पैकेट बनाए।
- 02
फ़ैसला
उन्होंने इसे काम करने वाली महिलाओं के स्वामित्व वाली संस्था के रूप में बढ़ाया। अल जज़ीरा की 2013 की रिपोर्ट के अनुसार हर शाखा विकेंद्रित ढंग से चलती है और उसकी प्रमुख सर्वसम्मति से चुनी जाती है। केंद्रीय कार्यालय सभी शाखाओं को आटा देता है और उनका माल ख़रीदता है। मुनाफ़े का लगभग 2 प्रतिशत संस्था के ख़र्च में जाता है और बाक़ी साल में तीन बार सदस्यों में बँटता है। रोज़ नमूनों की जाँच होती है, और मानक से कमज़ोर खेप घाटा सहकर भी नष्ट कर दी जाती है।
- 03
नतीजा
अल जज़ीरा के अनुसार 2013 तक लिज्जत भारत का सबसे ज़्यादा बिकने वाला पापड़ ब्रांड बन चुका था, जिसकी बिक्री 20 करोड़ डॉलर से अधिक थी और देश भर में 43,000 से अधिक महिलाएँ इससे जुड़ी थीं।