
खंड 37
माइक्रोमैक्स नंबर 1 बनकर फिर बाज़ार कैसे गँवा बैठा
जब बाज़ार का अगुआ अगली तकनीक अपनाने में देर करे, तो क्या होता है?
- केस
- नाकामी
- वर्ष
- 2014-2018
- 16.6% (Samsung 14.4%)
- कुल मोबाइल बाज़ार हिस्सेदारी (काउंटरपॉइंट) · Apr-Jun 2014
- 19.1% से घटकर 5.3%
- स्मार्टफ़ोन हिस्सेदारी, 2014 बनाम मार्च 2017 · 2017
- लगभग 43%
- चीनी ब्रांडों की स्मार्टफ़ोन हिस्सेदारी (काउंटरपॉइंट) · 2017
- 01
हालात
माइक्रोमैक्स बड़े ऑफ़लाइन रिटेल नेटवर्क के ज़रिये सस्ते फ़ोन बेचकर बढ़ा। अप्रैल-जून 2014 में काउंटरपॉइंट के आँकड़ों के अनुसार यह 16.6 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ भारत का सबसे बड़ा मोबाइल फ़ोन विक्रेता था, जबकि सैमसंग की हिस्सेदारी 14.4 प्रतिशत थी।
- 02
फ़ैसला
जब 4G उम्मीद से जल्दी आया, तब चीनी प्रतिद्वंद्वियों के पास 4G फ़ोन तैयार थे, जबकि माइक्रोमैक्स के पास अभी 3G और 2G का माल बिकने को पड़ा था। माइक्रोमैक्स के नेतृत्व ने आउटलुक बिज़नेस से माना कि कंपनी 'caught on the wrong foot' (ग़लत पैर पर पकड़ी गई) थी।
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नतीजा
आउटलुक बिज़नेस के अनुसार माइक्रोमैक्स की स्मार्टफ़ोन हिस्सेदारी 2014 के 19.1 प्रतिशत से घटकर मार्च 2017 में 5.3 प्रतिशत रह गई, जबकि काउंटरपॉइंट के अनुसार चीनी ब्रांडों की हिस्सेदारी स्मार्टफ़ोन बाज़ार में लगभग 43 प्रतिशत हो गई। 2018 की तीसरी तिमाही तक शाओमी 27 प्रतिशत के साथ भारत के स्मार्टफ़ोन बाज़ार में सबसे आगे था।