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खंड 37

सत्यम धोखाधड़ी मामला ईमानदार खातों के बारे में क्या सिखाता है

जब किसी कंपनी का बताया गया मुनाफ़ा और नक़दी असली न हों, तो क्या होता है?

केस
नाकामी
वर्ष
2009-2017
₹5,040 करोड़
पत्र में बताया गया अस्तित्वहीन नक़द व बैंक बैलेंस · 2009
₹1,849 करोड़
SEBI द्वारा लौटाने का आदेशित अवैध लाभ · 2014
7 साल का सश्रम कारावास
CBI विशेष अदालत द्वारा सज़ा · 2015
  1. 01

    हालात

    7 जनवरी 2009 को सत्यम के चेयरमैन बी. रामलिंग राजू के नाम से लिखे एक पत्र में कहा गया कि 30 सितंबर 2008 की बैलेंस शीट में 5,040 करोड़ रुपये का बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया, अस्तित्वहीन नक़द और बैंक बैलेंस है, साथ ही कई और झूठे आँकड़े हैं। जुलाई 2010 में राजू के वकीलों ने अदालत से कहा कि यह पत्र उन्होंने नहीं लिखा था।

  2. 02

    फ़ैसला

    नियामकों और जाँच एजेंसियों ने कार्रवाई की। 15 जुलाई 2014 को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने राजू और चार अन्य को 14 साल के लिए प्रतिभूति बाज़ार से प्रतिबंधित किया और उन्हें 1,849 करोड़ रुपये के अवैध लाभ 7 जनवरी 2009 से 12 प्रतिशत सालाना ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया।

  3. 03

    नतीजा

    9 अप्रैल 2015 को हैदराबाद की CBI विशेष अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के मामले में राजू और नौ अन्य को दोषी ठहराया, सात साल के सश्रम कारावास की सज़ा दी, और राजू व उनके भाई बी. रामा राजू पर 5-5 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया। मई 2017 में प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (SAT) ने उल्लंघनों पर SEBI के निष्कर्षों से सहमति जताई, लेकिन सभी पर एक समान 14 साल के प्रतिबंध पर SEBI से फिर विचार करने को कहा।

स्रोत (4)
  1. Satyam: Raju's letter of confession · 2015
  2. Six years on, Ramalinga Raju found guilty in Satyam fraud case · 2015
  3. Satyam case: Sebi bans Raju, others for 14 yrs · 2014
  4. SAT Order in the Satyam Case · 2017

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