
खंड 37
उजाला ने एक ही उत्पाद से कंपनी कैसे खड़ी की
क्या छोटी कंपनी सिर्फ़ एक उत्पाद से राष्ट्रीय स्तर पर पूरी श्रेणी जीत सकती है?
- केस
- सफलता
- वर्ष
- 1983-2011
- 6 लोग, घर-घर जाकर
- पहली बिक्री टीम · 1984
- 73.6%
- मूल्य के हिसाब से उजाला की हिस्सेदारी · 2011
- 60.1%
- मात्रा के हिसाब से उजाला की हिस्सेदारी · 2011
- 01
हालात
1983 में एम. पी. रामचंद्रन ने केरल में एकल स्वामित्व वाले कारोबार के रूप में ज्योति लेबोरेटरीज़ शुरू की और कपड़ों को सफ़ेद करने वाला तरल 'उजाला' उतारा। कंपनी के पास कोई राष्ट्रीय वितरण तंत्र नहीं था।
- 02
फ़ैसला
कंपनी ने एक ही उत्पाद पर ध्यान दिया और उसे सीधे बेचा। उसकी 2008-09 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार 1984 में उजाला को केरल के त्रिशूर और मलप्पुरम ज़िलों में छह विक्रेताओं की टीम घर-घर बेचती थी। 'चार बूँदों वाला' संदेश इसका नारा बना। उजाला के मज़बूत होने के बाद ही कंपनी ने उजाला स्टिफ़ एंड शाइन जैसे विस्तार जोड़े (केरल में 2005 में और देश भर में 2008 में)।
- 03
नतीजा
कंपनी के अनुसार दिसंबर 2011 में समाप्त वर्ष तक उजाला अपनी श्रेणी में पहले स्थान पर था, जिसकी अखिल भारतीय बाज़ार हिस्सेदारी मूल्य के हिसाब से 73.6 प्रतिशत और मात्रा के हिसाब से 60.1 प्रतिशत थी।