§1यह बिज़नेस क्या है

जौ को साफ़ करके छाँटा जाता है, भिगोया जाता है, नियंत्रित तरीक़े से अंकुरित किया जाता है और भट्ठी में सुखाया जाता है, फिर पीसकर, रखकर और मिलाकर तैयार किया जाता है। माल्ट एक्सट्रैक्ट माल्ट को पीसने, मैश करने, अलग करने और उबालने से मीठे शीरे या पाउडर के रूप में बनता है। ख़रीदार हैं ब्रुअरी, व्हिस्की डिस्टिलरी, माल्ट वाले दूध पेय बनाने वाले, बेकरी, बिस्कुट, मिठाई और चॉकलेट पाउडर बनाने वाले, शिशु आहार और टॉनिक बनाने वाले। यह बड़ी परियोजना है: आयातित भिगोने, अंकुरण और सुखाने के संयंत्रों के साथ साल में 30,000 टन।

क्षमता: साल में 30,000 टन।

§2क्या यह आपके लिए है?

किसके लिए

जमी हुई खाद्य या पेय कंपनी या निवेशक समूह, जिसके ब्रुअरी और खाद्य उद्योग के ख़रीदार पहले से तय हों।

किसके लिए नहीं

पहली बार या छोटा उद्यमी — यह बड़ी औद्योगिक परियोजना है।

फ़ायदे

  • ब्रुअरी, डिस्टिलरी और माल्ट वाले खाद्य बनाने वालों से स्थिर माँग
  • राजस्थान और उत्तर प्रदेश में जौ अच्छी मात्रा में उगता है और आज ज़्यादातर पशु आहार में जाता है
  • माल्ट एक्सट्रैक्ट कई खाद्य पदार्थों और टॉनिक में लगता है
  • गुणवत्ता मंज़ूर होने पर बड़े, लंबे समय के ख़रीदार

नुकसान

  • बहुत बड़ा निवेश — ₹38.66 करोड़
  • रिपोर्ट में पहले दो साल घाटा
  • आयातित संयंत्र और कुशल माल्टस्टर चाहिए
  • रिपोर्ट कहती है कि समस्या जौ की मात्रा नहीं, गुणवत्ता है

कौन-से हुनर चाहिए

  • माल्टिंग तकनीक और गुणवत्ता नियंत्रण
  • जौ की ख़रीद और ग्रेडिंग
  • बड़े संयंत्र का प्रबंधन
  • ब्रुअरी और खाद्य निर्माताओं से लंबे आपूर्ति अनुबंध

कठिनाई 5/5 क्यों: करोड़ों का निवेश, आयातित संयंत्र और शुरुआती सालों में घाटा।

§3बाज़ार

कौन ख़रीदता है

  • ब्रुअरी
  • व्हिस्की डिस्टिलरी
  • माल्ट वाले दूध पेय, बेकरी, बिस्कुट, मिठाई और चॉकलेट पाउडर निर्माता
  • शिशु आहार, टॉनिक और स्वास्थ्य खाद्य निर्माता

कैसे बिकता है

  • लंबे आपूर्ति अनुबंध
  • खाद्य और पेय संयंत्रों को सीधी बिक्री

जानने लायक

  • रिपोर्ट कहती है कि दुनिया भर में माल्ट एक्सट्रैक्ट शराब बनाने से ज़्यादा खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल होता है।
  • ब्रुइंग ग्रेड एक्सट्रैक्ट में सबसे अच्छा ब्रुइंग माल्ट लगता है; खाद्य ग्रेड में अक्सर खाद्य या डिस्टिलिंग माल्ट।

§4कच्चा माल और मशीनें

सामानसंख्यालागत
भिगोने का संयंत्र (आयातित)1₹315 lakh
अंकुरण संयंत्र (आयातित)1₹880 lakh
सुखाने की भट्ठी संयंत्र (आयातित)1₹325 lakh
ढुलाई और उठाने की व्यवस्था (आयातित)1₹235 lakh
आयातित संयंत्र की पैकिंग और भाड़ा1 lot₹145 lakh
शुल्क और LC शुल्क1 lot₹20 lakh
क्लियरिंग और ढुलाई1 lot₹20 lakh
जौ की प्रारंभिक सफ़ाई और ग्रेडिंग (देसी)1₹125 lakh
बिजली का काम1 lot₹175 lakh
ढाँचा1 lot₹80 lakh
संयंत्र खड़ा करना1 lot₹60 lakh

स्रोत: SIDBI Stand-Up Mitra project profile — Malt Extract from Barley (2018) — निजी गाइड — स्थानीय रूप से पक्का करें

  • जौराजस्थान और उत्तर प्रदेश से; रिपोर्ट के अनुसार 5–10% जौ मानव भोजन में, 4–5% बीज के लिए रखा जाता है और बाक़ी पशु आहार में जाता है
  • भिगोने और सुखाने के लिए पानी और ईंधनबिजली ₹7 प्रति kWh मानी गई

स्रोत: SIDBI Stand-Up Mitra project profile — Malt Extract from Barley (2018) — निजी गाइड — स्थानीय रूप से पक्का करें

§5लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन

  1. FSSAI लाइसेंस (इस आकार पर केंद्रीय लाइसेंस)
  2. उद्यम (Udyam) पंजीकरण
  3. GST
  4. राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से स्थापना और संचालन की सहमति
  5. फ़ैक्टरी लाइसेंस
  6. अग्निशमन NOC
  7. भाप बॉयलर लगें तो बॉयलर पंजीकरण
  8. आयातित संयंत्र और निर्यात के लिए IEC कोड

यह रजिस्ट्रेशन हम करवा सकते हैं

§6योजनाएँ और सब्सिडी

अभी जाँचा नहीं गया

शोध जारी है। हम अंदाज़े से आँकड़े नहीं लिखते — स्रोत मिलते ही यह हिस्सा भरा जाएगा।

₹38.66 करोड़ और ₹27.86 करोड़ के बैंक कर्ज़ के साथ यह PMEGP, MUDRA, Stand-Up India और CGTMSE की सीमाओं से बाहर है; इसके लिए सामान्य बैंक या संस्थागत परियोजना वित्त चाहिए।

§7पैसा

निवेश का आधार: ज़मीन ₹100 लाख, भवन ₹1,200 लाख, प्लांट और मशीनरी ₹2,000 लाख जैसा रिपोर्ट में जोड़ा गया है (उसकी मदवार सूची — आयातित भिगोने, अंकुरण, सुखाने और ढुलाई संयंत्र, भाड़ा और शुल्क सहित, साथ में देसी सफ़ाई, बिजली, ढाँचा और खड़ा करना — का जोड़ ₹2,380 लाख आता है), फ़र्नीचर ₹12 लाख, शुरुआती ख़र्च ₹200 लाख, कार्यशील पूँजी मार्जिन ₹354 लाख = ₹3,866 लाख (₹38.66 करोड़)।

चालू पूँजी (वर्किंग कैपिटल): कार्यशील पूँजी ₹810 लाख; मार्जिन ₹354.38 लाख, बैंक ₹455.63 लाख।

दाम 2018 के हैं — मशीनों और निर्माण की लागत अब ज़्यादा होगी।

लोन फ़ाइल कैसे बनाएँ

§8निर्यात की संभावना

निर्यात परिषद / बोर्ड: Not verified yet

  • अभी तक कोई HS कोड या निर्यात संस्था सरकारी सूची से जाँची नहीं गई है।

§9जोखिम — लोग कहाँ नाकाम होते हैं

  • जौ की ख़राब गुणवत्ता
  • शुरुआती घाटे के दौरान भारी कर्ज़ चुकौती
  • कुछ बड़े ख़रीदारों पर निर्भरता
  • उत्पाद शुल्क और शराब नीति में बदलाव से ब्रुअरी की माँग पर असर

§1030 / 60 / 90 दिन की योजना

यह आम योजना है, जो हर बिज़नेस पर लागू होती है। इस बिज़नेस की ख़ास योजना शोध के बाद जोड़ी जाएगी।

  1. दिन 1–30: जौ माल्टिंग और माल्ट एक्सट्रैक्ट संयंत्र की एक चालू यूनिट देखने जाएँ, 10 खरीदारों से दाम और मात्रा पूछें, और 3 सप्लायरों से कोटेशन लें।
  2. दिन 31–60: Udyam (उद्यम) रजिस्ट्रेशन और ज़रूरी लाइसेंस (FSSAI लाइसेंस (इस आकार पर केंद्रीय लाइसेंस), उद्यम (Udyam) पंजीकरण), प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR), और योजना या लोन की फ़ाइल।
  3. दिन 61–90: जगह और मशीनें, ट्रायल उत्पादन, और पहले 10 ग्राहकों तक माल।

§11किससे जुड़ें

अभी जाँचा नहीं गया

एसोसिएशन, क्लस्टर और ट्रेनिंग संस्थान — इनकी सूची बन रही है। जुड़ें

§12देखें

इस बिज़नेस पर अभी कोई एपिसोड नहीं आया है। पॉडकास्ट पर शो जल्द आ रहे हैं।

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स्रोत

  1. SIDBI Stand-Up Mitra project profile — Malt Extract from Barley (2018)

डेटा की समीक्षा: 6 अक्टूबर 2026. कोई गलती दिखी? हमें बताएँ. सिर्फ़ जानकारी के लिए — यह कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं है।