§1यह बिज़नेस क्या है
खेती के कचरे को छोटे टुकड़ों में काटकर धूप में सुखाया जाता है ताकि नमी घटे, फिर ब्रिकेटिंग प्रेस में डाला जाता है जो उसे दबाकर और गर्म करके लगातार लंबा गुटका बनाता है, जिसे नाप से काटा जाता है — आम तौर पर लगभग 1 इंच मोटा और 6 इंच लंबा। ब्रिकेट खुले कचरे से ज़्यादा गर्मी देते हैं। खुदरा के लिए 25 किलो की बोरियों में भरे जाते हैं या थोक ख़रीदारों को खुले बेचे जाते हैं। ख़रीदार हैं बॉयलर में कोयला या लकड़ी जलाने वाली फ़ैक्ट्रियाँ, होटल-रेस्टोरेंट और घर।
क्षमता: लगभग 3,600 टन खेती के कचरे से साल में 3,000 टन ब्रिकेट।
§2क्या यह आपके लिए है?
किसके लिए
खेती वाले इलाक़े का वह व्यक्ति जो सस्ते में कचरा जमा कर सके और आसपास की कोयला या लकड़ी जलाने वाली फ़ैक्ट्रियों को जानता हो।
किसके लिए नहीं
जो फ़सल के कचरे से दूर हो या जिसके पास पहले से ख़रीदार न हों।
फ़ायदे
- अक्सर जला दिए जाने वाले फ़सल के कचरे से बिकने वाला ईंधन
- कई बॉयलर चलाने वालों के लिए कोयले से सस्ता
- सादी प्रक्रिया: काटना, सुखाना, दबाना, काटना
- प्रोफ़ाइल में अच्छा मार्जिन और कम ब्रेक-ईवन
नुकसान
- कच्चे माल का दाम और उपलब्धता मौसम के साथ बदलती है
- गीला कचरा पहले सुखाना पड़ता है — बरसात में उत्पादन धीमा
- ख़रीदारों को कोयला या लकड़ी छोड़ने के लिए मनाना पड़ता है
- प्रेस जल्दी घिसते हैं और बार-बार मरम्मत माँगते हैं
कौन-से हुनर चाहिए
- खेती का कचरा सस्ते में जमा करना और रखना
- प्रेस का रख-रखाव और मरम्मत
- फ़ैक्ट्रियों और होटलों को बिक्री
- नमी और गुणवत्ता पर नियंत्रण
कठिनाई 3/5 क्यों: तकनीक सादी है, पर कच्चा माल जमा करना और पक्के थोक ख़रीदार ढूँढना ही सफलता तय करता है।
§3बाज़ार
कौन ख़रीदता है
- कोयला या लकड़ी जलाने वाले बॉयलर वाली फ़ैक्ट्रियाँ
- होटल और रेस्टोरेंट
- गाँव और शहर के घर
कैसे बिकता है
- पास के उद्योगों को सीधी सप्लाई
- 25 किलो की बोरियों में खुदरा
जानने लायक
- प्रोफ़ाइल कहती है कि ख़रीदारों के पास होने से लागत घटती है, और शुरू में उद्यमी को ख़ुद जागरूकता फैलानी होगी।
- प्रोफ़ाइल में ब्रिकेट ₹4,000 प्रति टन बिकते हैं।
§4कच्चा माल और मशीनें
| सामान | संख्या | लागत |
|---|---|---|
| ब्रिकेटिंग प्रेस, कटिंग मशीन, कन्वेयर, तौल काँटा और माल ढोने की ट्रॉलियाँ | 1 सेट | ₹35.00 lakh (all plant & machinery) |
स्रोत: SIDBI Stand-Up Mitra project profile — Briquetted Fuel (2018) — निजी गाइड — स्थानीय रूप से पक्का करें
- खेती का कचरा — गन्ने की खोई, कपास के डंठल, लकड़ी का बुरादा, मूँगफली के छिलके, मक्के के भुट्टेसाल में लगभग 3,600 टन; प्रोफ़ाइल ₹1,500 प्रति टन मानती है, जगह और मौसम से बदलता है
- 25 किलो की बोरियाँखुदरा बिक्री के लिए; थोक ख़रीदार खुला माल लेते हैं
स्रोत: SIDBI Stand-Up Mitra project profile — Briquetted Fuel (2018) — निजी गाइड — स्थानीय रूप से पक्का करें
Building Business Bazaar में सप्लायर
Central Institute of Mining & Fuel Research (CSIR-CIMFR), Dhanbad · Dhanbad →MINERALS LAB SERVICES Private Limited · Vasco →GO GREEN MECHANISMS PRIVATE LIMITED (TESTING LABORATORY) · Ahmedabad →OMRESEARCH & TESTING LABORATORY PRIVATE LIMITED · Ranchi →MSV ANALYTICAL LABORATORIES · Bellary →CENTRAL POWER RESEARCH INSTITUTE · Bengaluru →POLUCHEM LABORATORIES PVT. LTD. · Ernakulam →CU INSPECTIONS & CERTIFICATIONS INDIA PRIVATE LIMITED (LABORATORY) · Visakhapatnam →MAHABAL ENVIRO ENGINEERS PVT. LTD. · Nagpur →JAIN RESEARCH & DEVELOPMENT, JAIN IRRIGATION SYSTEM LIMITED · Jalgaon →PULP AND PAPER RESEARCH INSTITUTE (PAPRI) · Rayagada →CHANDIGARH POLLUTION TESTING LABORATORY · Mohali →
§5लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन
- उद्यम (Udyam) पंजीकरण
- GST पंजीकरण
- जहाँ लागू हो, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सहमति
- अग्नि सुरक्षा मंज़ूरी
- लागू हो तो PF, ESI और श्रम पंजीकरण
§6योजनाएँ और सब्सिडी
₹68.49 लाख पर परियोजना PMEGP की सीमा से ऊपर है; SC/ST या महिला उद्यमी के लिए स्टैंड-अप इंडिया और बिना गिरवी कर्ज़ के लिए CGTMSE।
§7पैसा
निवेश का आधार: ज़मीन ₹10.00 लाख + भवन ₹15.00 लाख + प्लांट और मशीनरी ₹35.00 लाख + फ़र्नीचर और बिजली फ़िटिंग ₹2.50 लाख + अन्य संपत्ति ₹0.50 लाख + कार्यशील पूँजी मार्जिन ₹5.49 लाख = ₹68.49 लाख। अपना हिस्सा ₹20.55 लाख, बैंक ₹47.94 लाख।
चालू पूँजी (वर्किंग कैपिटल): कार्यशील पूँजी ₹13.43 लाख (माल ₹4.50 लाख, उधार वसूली ₹10.00 लाख, ऊपरी ख़र्च ₹1.18 लाख, घटाकर सप्लायर उधार ₹2.25 लाख); मार्जिन ₹5.49 लाख, बैंक ₹7.94 लाख।
दाम 2018 के हैं — मशीनों और चलाने का ख़र्च अब ज़्यादा होगा।
§8निर्यात की संभावना
निर्यात से पहले HS कोड DGFT ITC(HS) सूची में पक्का करें
निर्यात परिषद / बोर्ड: FIEO (Federation of Indian Export Organisations)
- यह शीर्षक बुरादे या लकड़ी के कचरे से बने ब्रिकेट पर लागू है; दूसरी फ़सलों के अवशेष से बने ब्रिकेट किसी और शीर्षक में आ सकते हैं — DGFT से पक्का करें।
- पहली खेप से पहले DGFT से आयात-निर्यात कोड (IEC) लेना ज़रूरी है।
§9जोखिम — लोग कहाँ नाकाम होते हैं
- खेती के कचरे का दाम बढ़ना या कमी
- मशीन ख़राब होना
- कोयला सस्ता होने से ब्रिकेट की माँग घटना
- कच्चे माल के ढेर में आग
§1030 / 60 / 90 दिन की योजना
यह आम योजना है, जो हर बिज़नेस पर लागू होती है। इस बिज़नेस की ख़ास योजना शोध के बाद जोड़ी जाएगी।
- दिन 1–30: खेती के कचरे से ईंधन ब्रिकेट की एक चालू यूनिट देखने जाएँ, 10 खरीदारों से दाम और मात्रा पूछें, और 3 सप्लायरों से कोटेशन लें।
- दिन 31–60: Udyam (उद्यम) रजिस्ट्रेशन और ज़रूरी लाइसेंस (उद्यम (Udyam) पंजीकरण, GST पंजीकरण), प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR), और योजना या लोन की फ़ाइल।
- दिन 61–90: जगह और मशीनें, ट्रायल उत्पादन, और पहले 10 ग्राहकों तक माल।
§11किससे जुड़ें
एसोसिएशन, क्लस्टर और ट्रेनिंग संस्थान — इनकी सूची बन रही है। जुड़ें
§12देखें
इस बिज़नेस पर अभी कोई एपिसोड नहीं आया है। पॉडकास्ट पर शो जल्द आ रहे हैं।
खेती के कचरे से ईंधन ब्रिकेट शुरू करना है?
DPR, लोन फ़ाइल या रजिस्ट्रेशन — WhatsApp पर पूछें।
¶स्रोत
डेटा की समीक्षा: 6 अक्टूबर 2026. कोई गलती दिखी? हमें बताएँ. सिर्फ़ जानकारी के लिए — यह कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं है।
