§1यह बिज़नेस क्या है

EN-45 स्प्रिंग स्टील छड़ नाप से काटी जाती है, 950–1,000°C तक गर्म की जाती है और तीन सेट डाई वाले पावर प्रेस पर क्लिप के आकार में ढाली जाती है। क्लिप तेल में ठंडी की जाती हैं, नाप और कठोरता जाँची जाती है, मज़बूती के लिए लगभग 350°C पर टेम्पर की जाती हैं और RDSO ड्रॉइंग (T-1892) के अनुसार झुकाव (डिफ़्लेक्शन) सहित जाँची जाती हैं। कंपन से क्लिप ढीली होकर निकल जाती हैं, इसलिए रेलवे इन्हें ख़रीदती रहती है। रेलवे की माँग कम हो तो वही फ़ोर्ज ऑटो और मशीनरी के दूसरे फ़ोर्ज पुर्ज़े बना सकता है।

क्षमता: साल में 600 MT क्लिप, मूल्य ₹2.58 करोड़, साथ में 120 MT कबाड़।

§2क्या यह आपके लिए है?

किसके लिए

फ़ोर्जिंग इकाई का मालिक या इंजीनियर जो रेलवे वेंडर मंज़ूरी ले सके और टेंडर भर सके।

किसके लिए नहीं

जो सरकारी टेंडर और निरीक्षण के झंझट में नहीं पड़ना चाहता।

फ़ायदे

  • क्लिप रेलवे के लिए खपने वाला सामान है, इसलिए माँग दोहराती है
  • प्रोफ़ाइल मध्य-पूर्व की रेलवे को भी बाज़ार बताती है
  • फ़ोर्ज ऑटो और मशीनरी के फ़ोर्ज पुर्ज़ों पर जा सकता है
  • किराए की जगह से स्थायी ख़र्च कम

नुकसान

  • बिक्री रेलवे टेंडर और वेंडर मंज़ूरी पर टिकी
  • जाँच उपकरण महँगे (₹4.50 लाख की यूनिवर्सल टेस्टिंग मशीन)
  • हथौड़े का शोर और भट्ठी का धुआँ नियंत्रित करना पड़ता है
  • सख़्त RDSO मानक — फ़ेल खेप रिजेक्ट होती है

कौन-से हुनर चाहिए

  • गर्म फ़ोर्जिंग और डाई लगाना
  • स्प्रिंग स्टील की क्वेंचिंग और टेम्परिंग
  • RDSO और IS 3195 के अनुसार जाँच
  • रेलवे टेंडर भरना

कठिनाई 4/5 क्यों: गर्म फ़ोर्जिंग, सख़्त रेलवे जाँच और टेंडर से बिक्री।

§3बाज़ार

कौन ख़रीदता है

  • भारतीय रेल (ज़ोनल रेलवे और ट्रैक ठेकेदार)
  • मध्य-पूर्व देशों की रेलवे
  • ऑटोमोबाइल और मशीनरी निर्माता (दूसरे फ़ोर्ज पुर्ज़े)

कैसे बिकता है

  • RDSO वेंडर मंज़ूरी के बाद रेलवे टेंडर
  • ट्रैक बिछाने वाले ठेकेदारों के ज़रिए सप्लाई

जानने लायक

  • प्रोफ़ाइल के अनुसार कंपन से क्लिप ढीली होकर निकल जाती हैं, इसलिए यह खपने वाला सामान है।
  • रेलवे की माँग कम होने पर ख़ाली क्षमता से दूसरे फ़ोर्ज सामान बनाने का सुझाव है।

§4कच्चा माल और मशीनें

सामानसंख्यालागत
शियरिंग मशीन, 1 इंच क्षमता1₹85,000
पावर प्रेस1₹2,00,000
ब्लैंकिंग मशीन, 100 MT1₹1,50,000
तेल वाली हीट ट्रीटमेंट भट्ठियाँ, 650 किलो प्रति घंटा2₹3,25,000
तेल वाली टेम्परिंग भट्ठी1—
पेडेस्टल ग्राइंडर, 12 इंच पहिया2₹70,000
यूनिवर्सल टेस्टिंग मशीन1₹4,50,000
डिफ़्लेक्शन जाँच मशीन1₹50,000
रॉकवेल-सह-ब्रिनेल कठोरता जाँच मशीन1₹35,000
डीज़ल जनरेटर सेट, 30 kVA1₹1,25,000
डाई, औज़ार और फ़िक्सचर1 lot₹1,75,000

स्रोत: DC-MSME project profile — Rail Elastic Clip (2002)

  • EN-45 स्प्रिंग स्टील गोल छड़, 20–22 mmप्रोफ़ाइल में महीने में 60 MT, ₹30,000 प्रति MT
  • भट्ठियों के लिए हल्का डीज़ल तेलप्रोफ़ाइल में महीने में 10,000 लीटर
  • क्वेंचिंग तेल

स्रोत: DC-MSME project profile — Rail Elastic Clip (2002)

§5लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन

  1. उद्यम (Udyam) पंजीकरण
  2. GST
  3. ट्रैक सामग्री के लिए RDSO / भारतीय रेल से वेंडर मंज़ूरी
  4. राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सहमति (भट्ठी और शोर)
  5. कारख़ाना अधिनियम के तहत फ़ैक्टरी लाइसेंस
  6. टेंडर के लिए GeM / भारतीय रेल ई-ख़रीद पोर्टल पर पंजीकरण

यह रजिस्ट्रेशन हम करवा सकते हैं

§6योजनाएँ और सब्सिडी

प्रोफ़ाइल की परियोजना लागत (₹87.14 लाख) विनिर्माण के लिए PMEGP की सीमा से ऊपर है; CGTMSE बिना गिरवी कर्ज़ देता है, और SC/ST या महिला उद्यमियों के लिए Stand-Up India उपयुक्त है।

§7पैसा

निवेश का आधार: DC-MSME प्रोफ़ाइल (शाखा SISI वाराणसी, सितंबर 2002): स्थायी पूँजी ₹23.82 लाख (उत्पादन मशीनें ₹11.60 लाख, जाँच उपकरण ₹5.85 लाख, 30 kVA DG सेट ₹1.25 लाख, बिजली फ़िटिंग ₹1.87 लाख, डाई और फ़िक्सचर ₹1.75 लाख, दफ़्तर ₹0.50 लाख, शुरुआती ख़र्च ₹1.00 लाख) + 3 महीने की कार्यशील पूँजी ₹63.32 लाख = ₹87.14 लाख। जगह ₹10,000 महीने किराए पर।

चालू पूँजी (वर्किंग कैपिटल): 3 महीने की कार्यशील पूँजी ₹63.32 लाख; मुख्य ख़र्च स्प्रिंग स्टील — महीने में 60 MT, 20–22 mm EN-45 गोल छड़, ₹30,000 प्रति MT।

दाम 2002 के हैं — आज मशीन, कच्चे माल और मज़दूरी की लागत काफ़ी ज़्यादा होगी।

लोन फ़ाइल कैसे बनाएँ

§8निर्यात की संभावना

निर्यात से पहले HS कोड DGFT ITC(HS) सूची में पक्का करें

7302.90लोहे या स्टील की रेल पटरी निर्माण सामग्री — अन्य

निर्यात परिषद / बोर्ड: EEPC India

  • प्रोफ़ाइल में HS कोड नहीं छपा; 8 अंकों वाली ITC(HS) लाइन DGFT या कस्टम ब्रोकर से पक्की करें।
  • विदेशी रेलवे ख़रीदने से पहले आमतौर पर अपनी मंज़ूरी माँगती हैं।

§9जोखिम — लोग कहाँ नाकाम होते हैं

  • ख़रीदार कम — मुख्यतः भारतीय रेल
  • सरकारी ऑर्डर पर भुगतान में देरी
  • बोली और सप्लाई के बीच स्टील के दाम बदलना
  • रेलवे निरीक्षण में माल रिजेक्ट होना

§1030 / 60 / 90 दिन की योजना

यह आम योजना है, जो हर बिज़नेस पर लागू होती है। इस बिज़नेस की ख़ास योजना शोध के बाद जोड़ी जाएगी।

  1. दिन 1–30: इलास्टिक रेल क्लिप (फ़ोर्ज की गई स्प्रिंग स्टील) की एक चालू यूनिट देखने जाएँ, 10 खरीदारों से दाम और मात्रा पूछें, और 3 सप्लायरों से कोटेशन लें।
  2. दिन 31–60: Udyam (उद्यम) रजिस्ट्रेशन और ज़रूरी लाइसेंस (उद्यम (Udyam) पंजीकरण, GST), प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR), और योजना या लोन की फ़ाइल।
  3. दिन 61–90: जगह और मशीनें, ट्रायल उत्पादन, और पहले 10 ग्राहकों तक माल।

§11किससे जुड़ें

अभी जाँचा नहीं गया

एसोसिएशन, क्लस्टर और ट्रेनिंग संस्थान — इनकी सूची बन रही है। जुड़ें

§12देखें

इस बिज़नेस पर अभी कोई एपिसोड नहीं आया है। पॉडकास्ट पर शो जल्द आ रहे हैं।

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स्रोत

  1. DC-MSME project profile — Rail Elastic Clip (2002)

डेटा की समीक्षा: 6 अक्टूबर 2026. कोई गलती दिखी? हमें बताएँ. सिर्फ़ जानकारी के लिए — यह कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं है।