§1यह बिज़नेस क्या है

डाई CAD सॉफ़्टवेयर पर डिज़ाइन होती है, फिर टूल स्टील को काटा, खराद पर घुमाया, मिलिंग, घिसाई, वायर-कट EDM पर स्पार्क कटाई और लैपिंग करके बहुत सटीक नाप पर लाया जाता है। पुर्ज़े कठोर किए जाते हैं, डाई सेट में जोड़े जाते हैं (डाई ब्लॉक, पंच प्लेट, पंच, स्ट्रिपर, पायलट, गाइड) और प्रेस पर आज़माए जाते हैं। ख़रीदार ऑटो पुर्ज़े, बिजली सामान, घरेलू उपकरण और पैनल बनाने वाले हैं जो शीट मेटल दबाते हैं।

क्षमता: साल में 200 टन शीट मेटल डाई और टूल; पहले साल 35% और पाँचवें साल 70% पर। डाई के हिसाब से बिक्री भाव ₹100–600 प्रति kg।

§2क्या यह आपके लिए है?

किसके लिए

ITI, डिप्लोमा या इंजीनियरिंग पढ़ा व्यक्ति जिसने टूल रूम में काम किया हो और शीट मेटल प्रेसिंग के ख़रीदारों को जानता हो।

किसके लिए नहीं

जिसे सटीक मशीनिंग का अनुभव न हो।

फ़ायदे

  • बिक्री में कच्चे माल का हिस्सा छोटा — रिपोर्ट में सकल मार्जिन 60% से ऊपर
  • ऑटो, बिजली सामान और घरेलू उपकरण बनाने वालों को नई डाई और डाई के पुर्ज़े लगातार चाहिए
  • ख़रीदार आयातित डाई छोड़कर भारतीय टूल रूम की ओर आ रहे हैं (रिपोर्ट में TAGMA का हवाला)
  • डाई के ऑर्डर कम हों तो मशीनें सटीक पुर्ज़े भी बना सकती हैं

नुकसान

  • लगभग ₹1.13 करोड़ की CNC, EDM और घिसाई मशीनें
  • बहुत कुशल टूल मेकर और CAD/CAM डिज़ाइनर चाहिए
  • हर डाई अलग काम है, डिज़ाइन और ट्रायल में समय लगता है
  • ख़रीदार औद्योगिक क्लस्टरों में सिमटे हैं

कौन-से हुनर चाहिए

  • CAD/CAM पर डाई डिज़ाइन
  • CNC, वायर-कट EDM और सटीक घिसाई
  • टूल स्टील का ताप-उपचार
  • ख़रीदारों के साथ डाई का भाव और ट्रायल

कठिनाई 5/5 क्यों: बहुत सटीक कुशल काम और ₹2 करोड़ से ज़्यादा निवेश।

§3बाज़ार

कौन ख़रीदता है

  • ऑटो पुर्ज़े और प्रेस किए पुर्ज़े बनाने वाले
  • बिजली सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू उपकरण बनाने वाले
  • पैनल और एनक्लोज़र बनाने वाले
  • शीट मेटल मशीनें बेचने वाले

कैसे बिकता है

  • प्रेसिंग इकाइयों से सीधे ऑर्डर
  • बड़ी कंपनियों (OEM) में वेंडर पंजीकरण

जानने लायक

  • रिपोर्ट के अनुसार मुख्य टूल रूम क्लस्टर मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, पुणे, हैदराबाद और NCR हैं।
  • प्रशिक्षण केंद्र: इंडो जर्मन टूल रूम (अहमदाबाद, राजकोट, चेन्नई) और CTTC भुवनेश्वर।

§4कच्चा माल और मशीनें

सामानसंख्यालागत
हैकसॉ मशीनें2₹2,00,000
CNC खराद2₹10,00,000
अटैचमेंट वाला सटीक CNC मिलिंग सेंटर1₹16,00,000
भारी मिलिंग मशीनें2₹13,00,000
वायर-कट EDM / स्पार्क कटाई मशीनें2₹15,00,000
भारी रेडियल ड्रिल1₹3,00,000
सटीक हाइड्रोलिक घिसाई मशीनें3₹22,50,000
बेल्ट घिसाई/पॉलिश मशीनें2₹1,60,000
लैपिंग मशीनें2₹2,80,000
ताप-उपचार सुविधा1₹7,50,000
ग्रेनाइट ब्लॉक वाली 5-एक्सिस CNC मापने की मशीन1₹5,00,000
हाइड्रोलिक प्रेस (डाई ट्रायल के लिए)1₹4,50,000
औज़ार और गेज1 लॉट₹4,50,000

स्रोत: SIDBI Stand-Up Mitra project profile — Tool Room for Sheet Metal Die Making (2018) — निजी गाइड — स्थानीय रूप से पक्का करें

  • टूल स्टील (हाई-कार्बन, हाई-अलॉय ग्रेड)हाई-कार्बन मिश्रधातु ₹85 प्रति kg से ऊँचे ग्रेड की डाई स्टील ₹450 प्रति kg तक
  • ताप-उपचार और सतह-उपचार सामग्रीकठोरीकरण, नाइट्राइडिंग, प्लेटिंग
  • स्क्रैप की छूटतैयार वज़न का 10%; स्क्रैप ₹40–100 प्रति kg बिकता है

स्रोत: SIDBI Stand-Up Mitra project profile — Tool Room for Sheet Metal Die Making (2018) — निजी गाइड — स्थानीय रूप से पक्का करें

कच्चे माल के डेटाबेस में

कोल्ड-रोल्ड (CR) स्टील कॉइल और शीट →

§5लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन

  1. उद्यम (Udyam) पंजीकरण
  2. GST
  3. ज़िला उद्योग केंद्र (DIC) में राज्य औद्योगिक पंजीकरण
  4. फ़ैक्टरी नक़्शा मंज़ूरी और फ़ायर NOC
  5. ताप-उपचार भट्ठी के लिए चिमनी या ब्लोअर (प्रदूषण नियम)
  6. निर्यात के लिए IEC कोड

यह रजिस्ट्रेशन हम करवा सकते हैं

§6योजनाएँ और सब्सिडी

PMEGP के लिए बहुत बड़ी; CGTMSE बिना गिरवी बैंक लोन की गारंटी दे सकता है और Stand-Up India SC/ST व महिला उद्यमियों को पैसा देता है।

§7पैसा

निवेश का आधार: ज़मीन ₹30 लाख + भवन ₹60 लाख + प्लांट और मशीनरी ₹113.25 लाख + फ़िक्सचर और बिजली फ़िटिंग ₹4 लाख + शुरुआती ख़र्च ₹3.50 लाख + कार्यशील पूँजी का हिस्सा ₹11.79 लाख = ₹222.54 लाख। पैसा: प्रमोटर ₹64.48 लाख, बैंक लोन ₹158.06 लाख (स्थायी संपत्ति का 70%)।

चालू पूँजी (वर्किंग कैपिटल): कुल ₹19.70 लाख (माल ₹2.87 लाख, वसूली ₹8.93 लाख, ऊपरी ख़र्च ₹5.03 लाख, घटाकर लेनदार ₹2.87 लाख); अपना हिस्सा ₹11.79 लाख, बैंक ₹7.91 लाख। कम है, क्योंकि ज़्यादातर मूल्य मशीन के समय का है, माल का नहीं।

Stand-Up Mitra प्रोफ़ाइल 2018 में अपलोड हुई; प्रोफ़ाइल पर साल नहीं छपा है। मशीनों और कच्चे माल के दाम अब ज़्यादा होंगे।

लोन फ़ाइल कैसे बनाएँ

§8निर्यात की संभावना

निर्यात परिषद / बोर्ड: Not verified yet

  • अभी तक कोई HS कोड या निर्यात संस्था सरकारी सूची से जाँची नहीं गई है।

§9जोखिम — लोग कहाँ नाकाम होते हैं

  • डिज़ाइन की ग़लती से दोबारा काम
  • बड़े ख़रीदारों से देर से भुगतान
  • कुशल टूल मेकर का चले जाना
  • टूल स्टील के दाम बढ़ना

§1030 / 60 / 90 दिन की योजना

यह आम योजना है, जो हर बिज़नेस पर लागू होती है। इस बिज़नेस की ख़ास योजना शोध के बाद जोड़ी जाएगी।

  1. दिन 1–30: शीट मेटल डाई बनाने का टूल रूम की एक चालू यूनिट देखने जाएँ, 10 खरीदारों से दाम और मात्रा पूछें, और 3 सप्लायरों से कोटेशन लें।
  2. दिन 31–60: Udyam (उद्यम) रजिस्ट्रेशन और ज़रूरी लाइसेंस (उद्यम (Udyam) पंजीकरण, GST), प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR), और योजना या लोन की फ़ाइल।
  3. दिन 61–90: जगह और मशीनें, ट्रायल उत्पादन, और पहले 10 ग्राहकों तक माल।

§11किससे जुड़ें

अभी जाँचा नहीं गया

एसोसिएशन, क्लस्टर और ट्रेनिंग संस्थान — इनकी सूची बन रही है। जुड़ें

§12देखें

इस बिज़नेस पर अभी कोई एपिसोड नहीं आया है। पॉडकास्ट पर शो जल्द आ रहे हैं।

शीट मेटल डाई बनाने का टूल रूम शुरू करना है?

DPR, लोन फ़ाइल या रजिस्ट्रेशन — WhatsApp पर पूछें।

DPR / लोन फ़ाइल बनवाएँ

स्रोत

  1. SIDBI Stand-Up Mitra project profile — Tool Room for Sheet Metal Die Making (2018)

डेटा की समीक्षा: 6 अक्टूबर 2026. कोई गलती दिखी? हमें बताएँ. सिर्फ़ जानकारी के लिए — यह कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं है।