§1यह बिज़नेस क्या है

पीतल का कबाड़ छाँटा, पिघलाया और छोटी अपनी ढलाई-शाला में रेत के साँचे में ढाला जाता है, फिर लेथ और ख़ास मशीनों पर बनाया, खींचा, नाप से काटा, चूड़ी काटी, जाँचा, जोड़ा और पैक किया जाता है। उत्पादों में पीतल के विंग, हेक्स, चेक और भारी नट, फ़ास्टनर, और कंप्रेशन, फ़्लेयर, न्यूमैटिक और यूनियन फ़िटिंग हैं जो ट्रांसफ़ॉर्मर और दूसरे बिजली उपकरणों में लगती हैं। ख़रीदार हैं ट्रांसफ़ॉर्मर बनाने और मरम्मत करने वाले और बिजली का सामान बनाने वाले।

क्षमता: नगों में नहीं छपा; पूरी क्षमता पर ₹200.00 लाख सालाना बिक्री, शुरुआत 60% (₹120.00 लाख) से।

§2क्या यह आपके लिए है?

किसके लिए

ट्रांसफ़ॉर्मर के पुर्ज़ों की जानकारी रखने वाला इंजीनियर (प्रोफ़ाइल के अनुसार यह ज़रूरी है), जिसकी ट्रांसफ़ॉर्मर बनाने वालों से जान-पहचान हो।

किसके लिए नहीं

इंजीनियरिंग या ढलाई का अनुभव न रखने वाला, या जिसके पास घाटे के पहले दो साल झेलने लायक पूँजी न हो।

फ़ायदे

  • ट्रांसफ़ॉर्मर और बिजली उपकरणों में पीतल के बहुत से छोटे पुर्ज़े लगते हैं
  • पीतल का कबाड़ इस्तेमाल होता है, जिसका व्यापार हर जगह होता है
  • इसी ढलाई-शाला और मशीन शॉप से नल और गैस की फ़िटिंग भी बन सकती है
  • ट्रांसफ़ॉर्मर बनाने और मरम्मत करने वालों से बार-बार ऑर्डर

नुकसान

  • प्रोफ़ाइल में पहले दो साल घाटा
  • कच्चा माल बिक्री का लगभग 84% ले लेता है
  • ढलाई के धुएँ और गर्मी के लिए प्रदूषण नियंत्रण चाहिए
  • पीतल के दामों में उतार-चढ़ाव मुनाफ़े पर असर डालता है

कौन-से हुनर चाहिए

  • पीतल पिघलाना और रेत के साँचे में ढालना
  • लेथ, चूड़ी काटना और ख़ास मशीनों पर काम
  • नाप और चूड़ी की जाँच
  • ट्रांसफ़ॉर्मर बनाने और मरम्मत करने वालों को बेचना

कठिनाई 4/5 क्यों: ढलाई के साथ मशीनिंग, प्रदूषण नियम और प्रोफ़ाइल में घाटे के दो साल।

§3बाज़ार

कौन ख़रीदता है

  • ट्रांसफ़ॉर्मर बनाने वाले
  • ट्रांसफ़ॉर्मर मरम्मत की वर्कशॉप
  • बिजली उपकरण बनाने वाले

कैसे बिकता है

  • निर्माताओं को सीधी सप्लाई
  • बिजली हार्डवेयर के डीलर

जानने लायक

  • प्रोफ़ाइल में पीतल के नट, फ़ास्टनर और कंप्रेशन, फ़्लेयर, न्यूमैटिक, यूनियन और गैस-किट फ़िटिंग उत्पादों में गिनी गई हैं।

§4कच्चा माल और मशीनें

सामानसंख्यालागत
ढलाई-शाला (पीतल पिघलाना और रेत के साँचे में ढालना)1₹13.00 lakh
मशीनिंग विभाग (सेंटर लेथ, ख़ास मशीनें, चूड़ी काटना, ड्रिल)1₹8.00 lakh
मिलिंग और अन्य विभाग1₹3.00 lakh
पैकिंग और फ़िनिशिंग विभागएकमुश्त₹2.00 lakh
प्रयोगशाला विभाग1₹3.00 lakh
लगाना, बिजली फ़िटिंग, कर और ढुलाईएकमुश्त₹4.00 lakh

स्रोत: SIDBI Stand-Up Mitra project profile — Transformers Parts and Accessories (2018) — निजी गाइड — स्थानीय रूप से पक्का करें

  • पीतल का कबाड़मुख्य कच्चा माल; यहीं छाँटा और पिघलाया जाता है
  • स्टील, एल्युमिनियम और ताँबाकुछ पुर्ज़ों के लिए
  • पीतल की छड़ेंड्रॉइंग मशीन पर खींची जाती हैं

स्रोत: SIDBI Stand-Up Mitra project profile — Transformers Parts and Accessories (2018) — निजी गाइड — स्थानीय रूप से पक्का करें

कच्चे माल के डेटाबेस में

पीतल स्क्रैप →

§5लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन

  1. उद्यम (Udyam) पंजीकरण
  2. GST पंजीकरण
  3. राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सहमति (अलौह धातु ढलाई)
  4. फ़ैक्ट्री लाइसेंस
  5. अगर पीतल का मैल या कबाड़ उन नियमों में आता हो तो ख़तरनाक और अन्य अपशिष्ट नियमों के तहत अनुमति
  6. भट्ठी वाली जगह के लिए अग्नि सुरक्षा मंज़ूरी

यह रजिस्ट्रेशन हम करवा सकते हैं

§6योजनाएँ और सब्सिडी

बिना गारंटी कर्ज़ के लिए CGTMSE; SC/ST और महिला उद्यमियों के लिए स्टैंड-अप इंडिया (₹10 लाख–₹1 करोड़)। ₹112.63 लाख की लागत PMEGP की ₹50 लाख सीमा से ज़्यादा है।

§7पैसा

निवेश का आधार: ज़मीन ₹15.00 लाख + इमारत ₹25.00 लाख + प्लांट और मशीनरी ₹33.00 लाख + फ़र्नीचर और बिजली फ़िटिंग ₹3.00 लाख + शुरुआती और संचालन से पहले के ख़र्च ₹3.30 लाख + कार्यशील पूँजी ₹33.33 लाख = ₹112.63 लाख।

चालू पूँजी (वर्किंग कैपिटल): कार्यशील पूँजी ₹33.33 लाख (स्टॉक ₹16.67 लाख, उधारी ₹8.33 लाख, ऊपरी ख़र्च ₹8.33 लाख); मार्जिन ₹14.58 लाख, बैंक ₹18.75 लाख। पैसा: मालिक ₹28.16 लाख, बैंक ₹84.48 लाख।

SIDBI स्टैंड-अप मित्र की प्रोफ़ाइल, 2018 में डाली गई (उस पर साल नहीं छपा) — आज दाम ज़्यादा होंगे; मौजूदा लागत पता करें।

लोन फ़ाइल कैसे बनाएँ

§8निर्यात की संभावना

निर्यात से पहले HS कोड DGFT ITC(HS) सूची में पक्का करें

7415ताँबे (पीतल समेत) की कीलें, पिन, स्टेपल, पेंच, बोल्ट, नट और ऐसी चीज़ें

निर्यात परिषद / बोर्ड: EEPC India

  • माल भेजने से पहले 8 अंकों की ITC(HS) लाइन DGFT या अपने कस्टम ब्रोकर से पक्की कर लें।
  • पहली खेप भेजने से पहले DGFT से आयात-निर्यात कोड (IEC) लेना ज़रूरी है।

§9जोखिम — लोग कहाँ नाकाम होते हैं

  • ताँबे और जस्ते के दामों में उतार-चढ़ाव
  • ढलाई में ख़राबी और माल लौटना
  • बिजली कंपनियों से देर से भुगतान
  • ढलाई-शाला पर प्रदूषण नियंत्रण की कार्रवाई

§1030 / 60 / 90 दिन की योजना

यह आम योजना है, जो हर बिज़नेस पर लागू होती है। इस बिज़नेस की ख़ास योजना शोध के बाद जोड़ी जाएगी।

  1. दिन 1–30: ट्रांसफ़ॉर्मर के पुर्ज़े और पीतल का सामान की एक चालू यूनिट देखने जाएँ, 10 खरीदारों से दाम और मात्रा पूछें, और 3 सप्लायरों से कोटेशन लें।
  2. दिन 31–60: Udyam (उद्यम) रजिस्ट्रेशन और ज़रूरी लाइसेंस (उद्यम (Udyam) पंजीकरण, GST पंजीकरण), प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR), और योजना या लोन की फ़ाइल।
  3. दिन 61–90: जगह और मशीनें, ट्रायल उत्पादन, और पहले 10 ग्राहकों तक माल।

§11किससे जुड़ें

अभी जाँचा नहीं गया

एसोसिएशन, क्लस्टर और ट्रेनिंग संस्थान — इनकी सूची बन रही है। जुड़ें

§12देखें

इस बिज़नेस पर अभी कोई एपिसोड नहीं आया है। पॉडकास्ट पर शो जल्द आ रहे हैं।

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स्रोत

  1. SIDBI Stand-Up Mitra project profile — Transformers Parts and Accessories (2018)

डेटा की समीक्षा: 6 अक्टूबर 2026. कोई गलती दिखी? हमें बताएँ. सिर्फ़ जानकारी के लिए — यह कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं है।