
खंड 34
आदित्य विक्रम बिड़ला
1969 में थाईलैंड में धागा मिल से शुरू करके भारतीय उत्पादन को विदेश ले गए। (Aditya Birla Group)
- जीवन
- 1943–1995
- दौर
- 1947 से 1991
- 12,768
- इंडो थाई सिंथेटिक्स की शुरुआत में तकुए · 1969
- ₹8,000 करोड़
- निधन के समय उनकी कंपनियों की आय (से अधिक) · 1995
कहानी
आदित्य विक्रम बिड़ला जी डी बिड़ला के पोते थे। 1969 में, भारत के बाज़ार खुलने से बहुत पहले, उन्होंने थाईलैंड में इंडो थाई सिंथेटिक्स बनाई, जो समूह का पहला विदेशी उपक्रम था। आदित्य बिड़ला समूह उन्हें वहाँ कताई इकाई के ज़रिए विदेश जाने वाला पहला भारतीय उद्योगपति बताता है।
इंडो थाई की शुरुआत 12,768 तकुओं (स्पिंडल) से हुई। यह थाईलैंड की अग्रणी सिंथेटिक धागा कताई कंपनी और सिंथेटिक धागे की सबसे बड़ी निर्यातक बनी, जिसका निर्यात में 50% हिस्सा है।
इसके बाद दक्षिण-पूर्व एशिया में और संयंत्र लगे, जैसे थाई रेयॉन (1974)। उनके निधन के समय उनकी कंपनियों की आय 8,000 करोड़ रुपये से अधिक थी, 55 संयंत्र और 75,000 कर्मचारी थे।
1 अक्टूबर 1995 को 51 वर्ष की उम्र में उनका निधन हुआ। उनके पुत्र कुमार मंगलम बिड़ला ने ज़िम्मेदारी संभाली।
समय-रेखा
- 1969थाईलैंड में इंडो थाई सिंथेटिक्स बनाई।
- 1974थाई रेयॉन का गठन।
- 1984थाई रेयॉन थाईलैंड शेयर बाज़ार में सूचीबद्ध।
- 19951 अक्टूबर को निधन; कुमार मंगलम बिड़ला ने कमान संभाली।
- 2019समूह ने थाईलैंड में 50 वर्ष पूरे किए।