
खंड 34
अर्देशिर गोदरेज
वकील से ताला-निर्माता बने, 1897 में गोदरेज की स्थापना की और 1918 में वनस्पति तेल का साबुन बनाया। (Godrej & Boyce (Godrej group))
- जीवन
- 1868–1936
- दौर
- आज़ादी से पहले
- ₹3,000
- पहले (असफल) काम के लिए उधार · 1895
कहानी
अर्देशिर गोदरेज का जन्म 26 मार्च 1868 को बंबई में हुआ और उन्होंने वकालत की पढ़ाई की। 1894 में उन्होंने ऐसी बात अदालत में कहने से मना कर दिया जिसे वे सच्चे मन से साबित नहीं कर सकते थे, और वकालत छोड़ दी।
1895 में उन्होंने मेरवानजी मंचेरजी कामा से 3,000 रुपये उधार लेकर शल्य चिकित्सा के औज़ार बनाए। यह काम तब बंद हो गया जब विक्रेता ने उन पर 'मेड इन इंडिया' छापने से मना कर दिया।
7 मई 1897 को उन्होंने अपने भाई पीरोजशा के साथ बंबई के लालबाग़ में एक शेड में ताले बनाना शुरू किया। 1902 में तिजोरियाँ आईं, और 1908 में दोनों भाइयों को बिना स्प्रिंग वाले ताले का ब्रिटिश पेटेंट मिला।
1918 में उन्होंने 'चावी' नाम का साबुन बाज़ार में उतारा, जो पशु-चर्बी के बजाय वनस्पति तेल से बना था। 10 जनवरी 1936 को उनका निधन हुआ और पीरोजशा ने कंपनी को आगे बढ़ाया।
समय-रेखा
- 1895शल्य औज़ार बनाने के लिए 3,000 रुपये उधार लिए; काम असफल रहा।
- 18977 मई को बंबई के लालबाग़ में ताले बनाना शुरू किया।
- 1902गोदरेज तिजोरियाँ बाज़ार में आईं।
- 1908पीरोजशा के साथ बिना स्प्रिंग वाले ताले का ब्रिटिश पेटेंट मिला।
- 1918वनस्पति तेल से बना 'चावी' साबुन उतारा।