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खंड 34

अज़ीम प्रेमजी

21 वर्ष की उम्र में परिवार की खाद्य तेल कंपनी संभाली और उसे वैश्विक आईटी कंपनी विप्रो बनाया। (Wipro)

जीवन
जन्म 1945
दौर
1947 से 1991
₹1.45 लाख करोड़
कुल परोपकारी दान-कोष (लगभग) · 2019
₹52,750 करोड़
2019 के दान की क़ीमत · 2019

कहानी

1966 में अज़ीम प्रेमजी स्टैनफ़ोर्ड विश्वविद्यालय में पढ़ रहे थे जब उनके पिता का निधन हुआ। वे घर लौटे और 21 वर्ष की उम्र में परिवार की कंपनी वेस्टर्न इंडिया वेजिटेबल प्रोडक्ट्स संभाली, जो महाराष्ट्र के अमलनेर में खाद्य तेल बनाती थी।

उन्होंने साबुन-प्रसाधन, बल्ब और हाइड्रॉलिक सिलिंडर जैसे उत्पादों में विस्तार किया, और 1970 के दशक के अंत में विप्रो को कंप्यूटर हार्डवेयर और सॉफ़्टवेयर में ले गए, जब भारत में आईटी अभी छोटा था। कंपनी ने विप्रो नाम अपनाया और भारत की बड़ी आईटी सेवा कंपनियों में से एक बनी।

उन्होंने अज़ीम प्रेमजी फ़ाउंडेशन बनाया, जो मुख्य रूप से सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने का काम करता है। 13 मार्च 2019 को उन्होंने विप्रो के और 34% शेयरों का आर्थिक लाभ, जिसकी क़ीमत 52,750 करोड़ रुपये थी, दान करने की घोषणा की। इससे उनका कुल दान-कोष लगभग 1.45 लाख करोड़ रुपये हो गया, जिसमें विप्रो का 67% आर्थिक स्वामित्व शामिल है।

समय-रेखा

  1. 1945बंबई में जन्म।
  2. 1966पिता के निधन के बाद 21 वर्ष की उम्र में पारिवारिक कंपनी संभाली।
  3. 2017कार्नेगी मेडल ऑफ़ फ़िलैंथ्रॉपी मिला।
  4. 2001अज़ीम प्रेमजी फ़ाउंडेशन की स्थापना।
  5. 2019विप्रो के और 34% आर्थिक लाभ को परोपकार के लिए समर्पित किया।
स्रोत (3)
  1. Azim Premji: Pledging to Give in India · 2017
  2. Azim Premji Commits Wipro Shares Worth Rs 52,750 Cr For Philanthropy · 2019
  3. Wipro chairman Azim Premji commits another 34% of his shares for philanthropy · 2019

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