
खंड 34
किरण मजूमदार-शॉ
1978 में अपने गैराज से बायोकॉन शुरू की और भारत की सबसे बड़ी इंसुलिन निर्माता बनाई। (Biocon)
- जीवन
- जन्म 1953
- दौर
- 1947 से 1991
- 32 गुना
- आईपीओ में अभिदान (लगभग) · 2004
- ₹10,000 करोड़ से अधिक
- आईपीओ की कुल माँग · 2004
- 2
- शुरुआत में कर्मचारी · 1978
कहानी
किरण मजूमदार-शॉ ने ऑस्ट्रेलिया से मास्टर ब्रूअर (मद्य निर्माण विशेषज्ञ) की पढ़ाई की। 1978 में आयरलैंड की बायोकॉन बायोकेमिकल्स के संस्थापक लेस्ली ऑकिनक्लॉस ने सुझाव दिया कि वे भारत में एक नया उपक्रम चलाएँ।
बायोकॉन इंडिया बंगलौर में उनके गैराज से दो कर्मचारियों के साथ शुरू हुई। पहला काम था खाद्य और कपड़ा निर्माताओं के लिए औद्योगिक एंज़ाइम — ऐसा उत्पाद जिसे बेचते हुए क्षमता बनाई जा सके।
एंज़ाइम से कंपनी दवाओं की ओर बढ़ी। बायोकॉन भारत की सबसे बड़ी इंसुलिन उत्पादक बनी, और उसकी रीकॉम्बिनेंट ह्यूमन इंसुलिन 40 से अधिक देशों में बिकती है।
2004 में बायोकॉन शेयर बाज़ार में आने वाली भारत की पहली बायोटेक कंपनी बनी। उसका इश्यू लगभग 32 गुना भरा और कुल माँग 10,000 करोड़ रुपये से अधिक रही। उन्हें 1989 में पद्म श्री और 2005 में पद्म भूषण मिला।
समय-रेखा
- 1978दो कर्मचारियों के साथ गैराज से बायोकॉन इंडिया शुरू की।
- 1989पद्म श्री मिला।
- 2004बायोकॉन का सार्वजनिक इश्यू लगभग 32 गुना भरा।
- 2005पद्म भूषण मिला।
- 2020ईवाई वर्ल्ड एंटरप्रेन्योर ऑफ़ द ईयर चुनी गईं।