
खंड 34
कुमार मंगलम बिड़ला
28 वर्ष की उम्र में समूह अध्यक्ष बने और 17 वर्षों में 26 अधिग्रहणों से वैश्विक समूह बनाया। (Aditya Birla Group)
- जीवन
- जन्म 1967
- दौर
- 1991 से 2010
- $6 बिलियन
- क़र्ज़ समेत नोवेलिस सौदे का मूल्य (लगभग) · 2007
- 26
- 17 वर्षों में अधिग्रहण · 2014
- $40 बिलियन
- समूह का आकार (लगभग) · 2014
कहानी
पिता आदित्य विक्रम बिड़ला के अचानक निधन के बाद कुमार मंगलम बिड़ला 1995 में, 28 वर्ष की उम्र में, समूह के अध्यक्ष बने। तब कंपनियों की आय 8,000 करोड़ रुपये से अधिक थी, 55 संयंत्र और 75,000 कर्मचारी थे।
1996 में उन्होंने सभी कंपनियों को एक नाम — आदित्य बिड़ला समूह — के तहत लाया। 2002 में उन्होंने समूह की तेल शोधन हिस्सेदारी ओएनजीसी को बेची, और 2004 में ग्रासिम ने लार्सन एंड टुब्रो से सीमेंट कंपनी अल्ट्राटेक का नियंत्रण लिया।
फ़रवरी 2007 में हिंडाल्को ने अटलांटा की नोवेलिस को क़र्ज़ समेत लगभग 6 अरब डॉलर में ख़रीदने का समझौता किया, जिससे हिंडाल्को एल्युमिनियम रोलिंग की दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी बनी। लगभग 2014 तक समूह 17 वर्षों में 26 अधिग्रहण कर चुका था और 36 देशों में काम करने वाला 40 अरब डॉलर का समूह था।
समय-रेखा
- 199528 वर्ष की उम्र में समूह अध्यक्ष बने।
- 1996सभी कंपनियों को आदित्य बिड़ला समूह के नाम तले लाए।
- 2002तेल शोधन हिस्सेदारी ओएनजीसी को बेची।
- 2004ग्रासिम ने एल एंड टी से अल्ट्राटेक का नियंत्रण लिया।
- 2007हिंडाल्को ने क़र्ज़ समेत लगभग 6 अरब डॉलर में नोवेलिस ख़रीदने का समझौता किया।