
खंड 34
सुनील भारती मित्तल
लुधियाना में साइकिल क्रैंकशाफ़्ट बनाने से शुरू करके एयरटेल जैसी बड़ी मोबाइल कंपनी बनाई। (Bharti Airtel)
- जीवन
- जन्म 1957
- दौर
- 1991 से 2010
- 18
- पहला कारोबार शुरू करते समय उम्र · 1976
- ₹2 करोड़
- पहले कॉर्डलेस फ़ोन लाइसेंस पर बिक्री की सीमा · 1980s
कहानी
1976 में, 18 वर्ष की उम्र में, सुनील मित्तल ने पिता से उधार लिए पैसे से लुधियाना में साइकिल के क्रैंकशाफ़्ट बनाने की छोटी इकाई शुरू की। उन्होंने बाद में कहा कि साइकिल निर्माता ही तय करते थे कि आपूर्तिकर्ताओं को क्या दाम मिलेगा।
1980 में वे बंबई गए और दो-तीन साल इस्पात, पीतल, जस्ता और प्लास्टिक का आयात किया। फिर उन्होंने पोर्टेबल जनरेटर बेचे, जब तक कि उनके आयात पर रोक नहीं लगी और वह कारोबार ख़त्म हो गया।
ताइवान के एक व्यापार मेले में उन्होंने पुश-बटन टेलीफ़ोन देखे और उन्हें भारत लाए, फिर कॉर्डलेस फ़ोन और फ़ैक्स मशीनों में गए। 1992 में जब सरकार ने दूरसंचार क्षेत्र खोला, तो उन्होंने मोबाइल लाइसेंस के लिए बोली लगाई। 1996 तक उनकी कंपनी की 'एयरटेल' सेलुलर सेवा दिल्ली में व्यावसायिक रूप से चल रही थी।
2008 के एक व्हार्टन साक्षात्कार में उन्होंने कहा (अंग्रेज़ी से अनुवाद): 'जब पूर्णता और गति में से चुनना हो, तो गति चुनें; पूर्णता बाद में आ जाएगी।'
समय-रेखा
- 1976लुधियाना में साइकिल क्रैंकशाफ़्ट बनाना शुरू किया।
- 1980बंबई जाकर आयात का कारोबार शुरू किया।
- 1992दूरसंचार खुलने पर मोबाइल लाइसेंस के लिए बोली लगाई।
- 1996एयरटेल सेलुलर सेवा दिल्ली में व्यावसायिक रूप से चालू।
- 2008भारती एयरटेल भारत की सबसे बड़ी मोबाइल ऑपरेटर और 5 अरब डॉलर के समूह की प्रमुख कंपनी।