
खंड 34
वालचंद हीराचंद दोशी
भारत की पहली आधुनिक जहाज़रानी कंपनी, विमान कारख़ाना, शिपयार्ड और कार संयंत्र बनाए। (Walchand group (Scindia Steam Navigation, Hindustan Aircraft, Premier Automobiles))
- जीवन
- 1882–1953
- दौर
- आज़ादी से पहले
- 19 (1929-48)
- इंडियन नेशनल शिप-ओनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष के रूप में वर्ष · 1948
कहानी
वालचंद हीराचंद सोलापुर में बसे एक गुजराती जैन व्यापारी परिवार से थे। उन्होंने रेलवे और भवन ठेकेदार के रूप में शुरुआत की।
1919 में उन्होंने भारतीय जहाज़रानी पर अंग्रेज़ों के कब्ज़े को चुनौती देने के लिए सिंधिया स्टीम नेविगेशन कंपनी बनाई। उसका जहाज़ एस एस लॉयल्टी 5 अप्रैल 1919 को अपनी पहली यात्रा पर निकला; भारत अब 5 अप्रैल को राष्ट्रीय समुद्री दिवस के रूप में मनाता है।
वे ऐसे उद्योगों में उतरते रहे जहाँ कोई भारतीय कंपनी नहीं थी। उन्होंने 1934 में वालचंदनगर चीनी कारख़ाना, 1940 में बंगलौर में हिंदुस्तान एयरक्राफ़्ट और विशाखापत्तनम में शिपयार्ड, और 1945 में बंबई के पास प्रीमियर ऑटोमोबाइल्स की स्थापना की। हिंदुस्तान एयरक्राफ़्ट बाद में सरकार के हाथ में चला गया और शिपयार्ड हिंदुस्तान शिपयार्ड बना।
उन्होंने 19 वर्ष तक इंडियन नेशनल शिप-ओनर्स एसोसिएशन का नेतृत्व किया और 8 अप्रैल 1953 को उनका निधन हुआ।
समय-रेखा
- 19195 अप्रैल को सिंधिया स्टीम नेविगेशन के एस एस लॉयल्टी की पहली यात्रा।
- 1929इंडियन नेशनल शिप-ओनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बने।
- 1934वालचंदनगर में चीनी कारख़ाना स्थापित किया।
- 1940बंगलौर में हिंदुस्तान एयरक्राफ़्ट और विशाखापत्तनम में शिपयार्ड की स्थापना।
- 1945बंबई के पास प्रीमियर ऑटोमोबाइल्स की स्थापना।