
खंड 36
भवरलाल जैन
Jain Irrigation Systems · जलगाँव, महाराष्ट्र
- ₹7,000
- शुरुआती पूँजी (तीन पीढ़ियों की बचत) · 1963
- $1 बिलियन से अधिक
- कंपनी की आय · 2016
- 116
- जिन देशों को आपूर्ति · 2016
कहानी
भवरलाल जैन का जन्म 1937 में महाराष्ट्र के एक ग्रामीण गाँव में किसानों और छोटे व्यापारियों के परिवार में हुआ। उन्होंने बंबई में वाणिज्य और कानून की पढ़ाई की और सिविल सेवा की तैयारी की। उनकी माँ, जो कभी स्कूल नहीं गईं, चाहती थीं कि वे ऐसा काम करें जिससे किसानों, पशुओं और पक्षियों का भला हो।
1963 में उन्होंने तीन पीढ़ियों की बचत के ₹7,000 से जलगाँव में ठेले पर केरोसिन बेचकर शुरुआत की। लगभग पंद्रह साल तक वे डीलर रहे और ट्रैक्टर, पीवीसी पाइप, स्प्रिंकलर, बीज और खेती का दूसरा सामान बेचा।
1985 में उन्होंने कैलिफ़ोर्निया के फ़्रेज़्नो में एक कृषि प्रदर्शनी में टपक सिंचाई प्रणाली देखी और छोटे किसानों के लिए भारत में बनाने का निश्चय किया। इज़राइल से तकनीक न मिलने पर उन्होंने एक ऑस्ट्रेलियाई कंपनी से लाइसेंस लिया। जैन इरिगेशन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सूक्ष्म-सिंचाई कंपनी बनी। फ़रवरी 2016 में उनके निधन के समय फ़ोर्ब्स के अनुसार कंपनी की आय 1 अरब डॉलर से अधिक थी, 30 कारखाने थे और वह 116 देशों को बेचती थी।
समय-रेखा
- 1963₹7,000 से जलगाँव में ठेले पर केरोसिन बेचना शुरू किया।
- 1985कैलिफ़ोर्निया के फ़्रेज़्नो की कृषि प्रदर्शनी में टपक सिंचाई देखी।
- 201060 करोड़ डॉलर से अधिक संपत्ति के साथ भारत के सबसे अमीरों में शामिल।
- 2016फ़रवरी में निधन; कंपनी की आय 1 अरब डॉलर से अधिक।