
खंड 36
चंदूभाई विरानी
Balaji Wafers · गुजरात का एक गाँव; राजकोट आकर बसे
- ₹5,000 करोड़ से अधिक
- सालाना बिक्री · 2022-23
कहानी
चंदूभाई विरानी का परिवार गुजरात के एक सूखाग्रस्त गाँव में खेती करता था। जब ज़मीन से गुज़ारा नहीं रहा, तो उसे बेचना पड़ा। उस पैसे से चंदूभाई और उनके भाई राजकोट आए और खाद व खेती के औज़ारों का धंधा शुरू किया। उनके साथ धोखा हुआ और सब डूब गया।
1974 से उन्होंने राजकोट के एस्ट्रॉन सिनेमा में पोस्टर लगाने और दर्शकों के लिए सैंडविच बनाने जैसे छोटे काम किए। समय के साथ उन्हें कैंटीन चलाने को मिल गई। 1981 में उन्होंने देखा कि दर्शक सप्लायर के वेफ़र्स से खुश नहीं हैं, तो उन्होंने खुद वेफ़र्स तलना शुरू किया और नाम रखा बालाजी वेफ़र्स।
1984 तक वे आसपास की दुकानों को भी माल देने लगे, और 1989 में ऋण लेकर राजकोट में अर्ध-स्वचालित कारखाना बनाया। 1995 में यह प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनी, राजकोट, वलसाड और इंदौर में बड़े कारखाने खुले और नमकीन भी जुड़े। कंपनी के अनुसार मार्च 2023 को समाप्त वर्ष में उसकी सालाना बिक्री ₹5,000 करोड़ पार कर गई।
समय-रेखा
- 1974राजकोट के एस्ट्रॉन सिनेमा में छोटे काम; बाद में कैंटीन चलाई।
- 1981अपने वेफ़र्स बनाने शुरू किए, नाम बालाजी वेफ़र्स।
- 1989ऋण लेकर राजकोट में अर्ध-स्वचालित कारखाना बनाया।
- 1995पूरी तरह स्वचालित कारखाने के साथ प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनी।
- 2008वलसाड में कारखाना खोला।
- 2023सालाना बिक्री ₹5,000 करोड़ पार (मार्च 2023 को समाप्त वर्ष)।