
खंड 36
कल्पना सरोज
Kamani Tubes · रोपरखेड़ा, अकोला, महाराष्ट्र
- ₹50,000
- सिलाई इकाई के लिए माँगा गया बैंक ऋण
- $100 मिलियन से अधिक
- अनुमानित संपत्ति · 2015
कहानी
कल्पना सरोज महाराष्ट्र के अकोला के पास एक दलित परिवार में पली-बढ़ीं। उनके पिता पुलिस कांस्टेबल थे। 12 साल की उम्र में उन्हें स्कूल से निकालकर ब्याह दिया गया और उल्हासनगर की एक झुग्गी बस्ती में भेज दिया गया। ससुराल वालों के उत्पीड़न के कारण छह महीने बाद पिता उन्हें घर ले आए।
लगभग 17 साल की उम्र में वे फिर मुंबई आईं और लोअर परेल की एक सिलाई कार्यशाला में काम पाया। इलाज के अभाव में बहन की मौत के बाद उन्होंने पिछड़ी जातियों की एक सरकारी योजना में ₹50,000 के बैंक ऋण के लिए आवेदन किया। ऋण मिलने तक वे स्टील फ़र्नीचर के धंधे में आ चुकी थीं। बाद में उन्होंने कानूनी विवाद में फँसी एक ज़मीन खरीदी, मुकदमा सुलझाया और ज़मीन-जायदाद का कारोबार खड़ा किया।
2002 में मुंबई की बीमार ताँबा ट्यूब कंपनी कमानी ट्यूब्स के कामगारों ने उनसे मदद माँगी। 2006 में उन्होंने कंपनी खरीदी, सलाहकार रखे, बैंकों से बात की, यूनियनों से समझौता किया और कारखाना कुर्ला से वाडा ले गईं। बिज़नेस स्टैंडर्ड ने 2015 में लिखा कि उन्होंने कंपनी को फिर खड़ा कर दिया और उनकी संपत्ति 10 करोड़ डॉलर से अधिक आँकी गई।
समय-रेखा
- 1989औद्योगिक पुनर्निर्माण बोर्ड ने कमानी ट्यूब्स कामगारों को सौंपी, पर घाटा जारी रहा।
- 2002कमानी के कामगार मदद के लिए उनके पास आए।
- 2006कमानी ट्यूब्स खरीदी और सुधार शुरू किया; कारखाना कुर्ला से वाडा गया।
- 2015बिज़नेस स्टैंडर्ड ने उनकी संपत्ति 10 करोड़ डॉलर से अधिक आँकी।