§1किसके लिए

  • SPV के रूप में संगठित पारंपरिक कारीगरों के क्लस्टर (हस्तशिल्प, वस्त्र, कृषि-प्रसंस्करण, बाँस, शहद, नारियल रेशा (coir), खादी आदि)

काम की है अगर

300–1,000 कारीगरों को संगठित करने वाले NGO/FPO/राज्य एजेंसियाँ।

समय न लगाएँ अगर

अकेले उद्यमी।

§2पात्रता

पारंपरिक उद्योगों के मौजूदा कारीगर।

  1. किसी Implementing Agency (राज्य/केंद्र सरकार का संगठन या NGO) द्वारा कारीगरों को Special Purpose Vehicle (SPV) में संगठित किया गया हो।
  2. Implementing Agency को ज़मीन और ठोस (hard) कार्यों की लागत का 10% (NER, J&K, पहाड़ी क्षेत्रों में 5%) देना होगा।

§3लाभ

  • 500 कारीगरों तक के लिए भारत सरकार की सहायता ₹2.5 करोड़ तक; 500 से अधिक के लिए ₹5 करोड़।
  • नई मशीनों वाली साझा उत्पादन सुविधा; कच्चे माल की सहायता; ₹25 लाख तक के सॉफ़्ट कार्य (कौशल, अध्ययन यात्राएँ, ख़रीदार-विक्रेता बैठकें, ई-कॉमर्स, डिज़ाइन)।

§4नियम — सहायता का तरीका

  1. भारत सरकार ठोस (hard) कार्यों की लागत का 90% तक (NER, J&K, पहाड़ी क्षेत्रों में 95%), पूरी सॉफ़्ट कार्य लागत, Technical Agency फ़ीस और Implementing Agency फ़ीस देती है।

§5दस्तावेज़

प्रकाशित नहीं

गाइडलाइन में दस्तावेज़ों की सूची नहीं दी गई है। आवेदन से पहले पोर्टल या बैंक से पूछ लें — हम अंदाज़े से सूची नहीं बनाते।

§6आवेदन कैसे करें

  1. 1

    किसी Implementing Agency के ज़रिए https://sfurti.msme.gov.in पर।

§7फ़ायदे और नुकसान

फ़ायदे

  • साझा मशीनों के लिए भारत सरकार का बहुत बड़ा हिस्सा (90–95%) (MSME पुस्तिका)।
  • सॉफ़्ट कार्य (प्रशिक्षण, डिज़ाइन, ख़रीदार बैठकें) ₹25 लाख तक पूरी तरह सरकारी पैसे से (MSME पुस्तिका)।

नुकसान

  • अकेला कारीगर आवेदन नहीं कर सकता — IA और SPV चाहिए।
  • कम ख़र्च: 2024-25 में असल ख़र्च ₹0.08 करोड़ (MSME AR तालिका) — धीमी मंज़ूरियों का संकेत।

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हमारा हितमदद हमारी पेड सेवा है। योजना में आवेदन आप ख़ुद भी कर सकते हैं।

स्रोत

  1. Ministry of MSME: Schemes for MSMEs booklet v2.0 (14 Feb 2025)
  2. Ministry of MSME: Annual Report 2025-26

18 अक्टूबर 2026 को जाँचा गया। केवल जानकारी के लिए — विभाग या बैंक से पक्का करें। कोई गलती दिखी? बताएँ.