
खंड 44
माल विक्रय का सरल करार
अधिक मूल्य के माल की एक बार की बिक्री के लिए, या जब माल बाद में या किस्तों में दिया जाना हो और केवल बीजक पर्याप्त न हो, तब इसका उपयोग करें।
हस्ताक्षर से पहले जानें
- माल विक्रय अधिनियम, 1930 उन संविदाओं पर लागू होता है, जिनमें विक्रेता किसी कीमत के बदले माल का स्वामित्व क्रेता को हस्तांतरित करता है या करने के लिए सहमत होता है। यदि आपके करार में यह नहीं लिखा कि स्वामित्व या जोखिम कब बदलेगा, तो अधिनियम के सामान्य नियम यह तय करेंगे, इसलिए खंड 6 साफ़ लिखें।
- करार को भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 की धारा 10 की शर्तें भी पूरी करनी होती हैं: सक्षम पक्षों की स्वतंत्र सहमति, वैध प्रतिफल और वैध उद्देश्य।
- विक्रय करार जीएसटी कर बीजक या आपूर्ति बिल की जगह नहीं लेता। यदि विक्रेता जीएसटी में पंजीकृत है, तो आपूर्ति के समय बीजक जारी करना फिर भी आवश्यक है।
- पुरानी मशीनरी या वाहन के लिए मूल खरीद बिल माँगें और जाँच लें कि माल पर कोई बैंक ऋण या दृष्टिबंधक (हाइपोथिकेशन) बाकी तो नहीं है।
- करारों पर स्टाम्प शुल्क हर राज्य तय करता है। हस्ताक्षर से पहले अपने राज्य की दर जाँच लें।