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खंड 44

एलएलपी करार (रूपरेखा)

सीमित दायित्व भागीदारी (एलएलपी) का निगमन होते ही उसके साझेदारों के बीच करार का मसौदा बनाने के लिए इसका उपयोग करें।

आपकी जानकारी

आपका दस्तावेज़

यह नमूना केवल सामान्य मार्गदर्शन के लिए है; यह कानूनी सलाह नहीं है। अपने राज्य में स्टाम्प शुल्क और पंजीकरण के नियम अवश्य जाँच लें। सीमित दायित्व भागीदारी करार (रूपरेखा) यह करार हस्ताक्षर का स्थान में दिनांक करार की तारीख को नीचे दिए साझेदारों और एलएलपी का नाम के बीच बनाया गया। एलएलपी का नाम एक सीमित दायित्व भागीदारी है, जिसकी एलएलपी पहचान संख्या एलएलपी पहचान संख्या (LLPIN) है, जिसका निगमन निगमन की तारीख को हुआ और जिसका पंजीकृत कार्यालय पंजीकृत कार्यालय का पता में है (जिसे आगे "एलएलपी" कहा गया है)। साझेदार: 1. साझेदार 1: पूरा नाम, निवासी साझेदार 1: पता 2. साझेदार 2: पूरा नाम, निवासी साझेदार 2: पता 1. व्यवसाय। एलएलपी एलएलपी का व्यवसाय का व्यवसाय करेगी, और ऐसा कोई अन्य वैध व्यवसाय भी, जिसका निर्णय साझेदार करें। 2. पंजीकृत कार्यालय। पंजीकृत कार्यालय पंजीकृत कार्यालय का पता में है। साझेदारों के निर्णय से और रजिस्ट्रार के पास आवश्यक प्रपत्र दाखिल करके इसे बदला जा सकता है। 3. अंशदान। साझेदार इस प्रकार अंशदान करेंगे: साझेदार 1: ₹साझेदार 1: अंशदान (₹) साझेदार 2: ₹साझेदार 2: अंशदान (₹) अतिरिक्त अंशदान केवल सभी साझेदारों के निर्णय से होगा। 4. लाभ और हानि। एलएलपी का लाभ और हानि इस प्रकार बाँटी जाएगी: साझेदार 1 साझेदार 1: लाभ में हिस्सा (%)%, साझेदार 2 साझेदार 2: लाभ में हिस्सा (%)%। 5. नामित साझेदार। नामित साझेदार (नाम) नामित साझेदार होंगे। सीमित दायित्व भागीदारी अधिनियम, 2008 के अंतर्गत एलएलपी के प्रपत्र दाखिल करने और नियमों के पालन की ज़िम्मेदारी उनकी होगी। 6. पारिश्रमिक। कार्यरत साझेदारों को साझेदारों के निर्णय के अनुसार कार्यरत साझेदारों का मासिक पारिश्रमिक (₹, या शून्य) मासिक दिया जाएगा। 7. प्रबंधन और निर्णय। रोज़ का कामकाज नामित साझेदार देखेंगे। इन कामों के लिए सभी साझेदारों की सहमति आवश्यक है: व्यवसाय के प्रकार में बदलाव; नए साझेदार को शामिल करना; सामान्य व्यापारिक उधार से अधिक ऋण लेना; कोई गारंटी देना; पूरा व्यवसाय या उसका बड़ा भाग बेचना। 8. बैंक खाता। एलएलपी का बैंक खाता चेक और भुगतान पर कौन हस्ताक्षर करेगा द्वारा चलाया जाएगा। 9. लेखा-बही और ऑडिट। एलएलपी अपने पंजीकृत कार्यालय में उचित लेखा-बही रखेगी और जहाँ कानून कहे वहाँ उसका ऑडिट कराएगी। प्रत्येक साझेदार लेखा-बही देख सकता है। 10. नए साझेदार का प्रवेश। नया साझेदार केवल सभी वर्तमान साझेदारों की सहमति से, लिखित पूरक करार द्वारा, शामिल किया जा सकता है। 11. त्यागपत्र। कोई भी साझेदार अन्य साझेदारों को त्यागपत्र की सूचना अवधि (महीने) महीने की लिखित सूचना देकर त्यागपत्र दे सकता है। अलग होने वाले साझेदार को अलग होने की तारीख तक के खातों के अनुसार उसका अंशदान और लाभ का हिस्सा, साझेदारों द्वारा तय अवधि में, दिया जाएगा। 12. निष्कासन। किसी साझेदार को केवल इस करार के गंभीर उल्लंघन या धोखाधड़ी के लिए, अन्य साझेदारों के निर्णय से और उसे अपनी बात रखने का उचित अवसर देने के बाद ही निकाला जा सकता है। 13. प्रतिस्पर्धा न करने का कर्तव्य। कोई भी साझेदार एलएलपी की सहमति के बिना उससे प्रतिस्पर्धा करने वाला व्यवसाय नहीं करेगा। यदि करता है, तो उस व्यवसाय का पूरा लाभ एलएलपी को देना होगा। 14. विवाद। साझेदारों के बीच, या किसी साझेदार और एलएलपी के बीच विवाद पहले बातचीत से सुलझाए जाएँगे; 30 दिन में न सुलझें तो साझेदारों द्वारा चुने गए एक मध्यस्थ को सौंपे जाएँगे। मध्यस्थता का स्थान विवाद के मध्यस्थता का शहर होगा। 15. समापन। एलएलपी का समापन साझेदारों के निर्णय से या कानून में दिए तरीके से किया जा सकता है। 16. अन्य विषय। जो विषय इस करार में नहीं हैं, वे सीमित दायित्व भागीदारी अधिनियम, 2008 और, जहाँ अधिनियम कहे, उसकी पहली अनुसूची के अनुसार तय होंगे। 17. दाखिल करना। यह करार निगमन के 30 दिन के भीतर एमसीए पोर्टल पर एलएलपी प्रपत्र 3 (Form 3) में रजिस्ट्रार के पास दाखिल किया जाएगा। इस करार में कोई भी बदलाव भी बदलाव के 30 दिन के भीतर प्रपत्र 3 में दाखिल किया जाएगा। हस्ताक्षर: साझेदार 1: ______________________ (साझेदार 1: पूरा नाम) साझेदार 2: ______________________ (साझेदार 2: पूरा नाम) एलएलपी का नाम की ओर से: ______________________ (नामित साझेदार) गवाह: 1. ______________________ 2. ______________________

हस्ताक्षर से पहले जानें

  • एलएलपी करार एमसीए पोर्टल पर एलएलपी प्रपत्र 3 (Form 3) में रजिस्ट्रार के पास दाखिल किया जाता है। कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के अनुसार पहला करार निगमन के 30 दिन के भीतर और कोई भी बदलाव बदलाव के 30 दिन के भीतर दाखिल करना होता है। देर से दाखिल करने पर अतिरिक्त शुल्क लगता है।
  • सीमित दायित्व भागीदारी अधिनियम, 2008 की धारा 23 के अनुसार साझेदारों के अधिकार और कर्तव्य करार से तय होते हैं। यदि करार किसी विषय पर कुछ नहीं कहता, तो अधिनियम की पहली अनुसूची लागू होती है (जैसे लाभ का बराबर बँटवारा और साझेदारों को कोई पारिश्रमिक नहीं)।
  • एलएलपी में कम से कम दो साझेदार (धारा 6) और कम से कम दो ऐसे नामित साझेदार होने चाहिए जो व्यक्ति हों, और उनमें से कम से कम एक भारत का निवासी हो (धारा 7)।
  • निगमन से पहले किया गया लिखित करार एलएलपी पर तभी लागू होता है, जब निगमन के बाद सभी साझेदार उसकी पुष्टि करें (धारा 23(3))।
  • एलएलपी करार पर स्टाम्प शुल्क राज्य लेता है। प्रपत्र 3 दाखिल करने से पहले इसे चुकाएँ और दर अपने राज्य के स्टाम्प विभाग से जाँच लें।
  • यह केवल रूपरेखा है। इसे किसी कंपनी सचिव, चार्टर्ड अकाउंटेंट या वकील से जँचवाएँ, विशेषकर त्यागपत्र पर भुगतान, निष्कासन और साझेदारों के पारिश्रमिक वाले खंड।
स्रोत (3)
  1. The Limited Liability Partnership Act, 2008 (Act No. 6 of 2009): sections 6, 7 and 23, First Schedule · 2009
  2. Form 3: Information with regard to LLP agreement and changes therein · 2023
  3. Revised filing steps and FAQs of Form 3 LLP · 2023

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