
खंड 44
साझेदारी विलेख (पार्टनरशिप डीड)
जब दो या अधिक लोग मिलकर साझेदारी फर्म के रूप में व्यवसाय शुरू करें और शर्तें लिखित में रखना चाहें, तब इसका उपयोग करें।
हस्ताक्षर से पहले जानें
- विलेख को उस मूल्य के गैर-न्यायिक स्टाम्प पेपर (या ई-स्टाम्प) पर छापें, जो आपका राज्य साझेदारी विलेख के लिए लेता है। स्टाम्प शुल्क हर राज्य में अलग है, इसलिए अपने राज्य के पंजीकरण एवं स्टाम्प विभाग से जाँच लें।
- सभी साझेदार हर पृष्ठ पर हस्ताक्षर करें। नाम और पते सहित दो गवाह रखना सामान्य प्रथा है।
- भारतीय साझेदारी अधिनियम, 1932 की धारा 4 के अनुसार साझेदारी उन व्यक्तियों के बीच का संबंध है, जो ऐसे व्यवसाय का लाभ बाँटने के लिए सहमत हुए हैं, जिसे वे सब या उनमें से कोई सबकी ओर से चलाता है।
- यदि विलेख में कुछ नहीं लिखा है, तो अधिनियम की धारा 13 लागू होती है: साझेदार लाभ और हानि बराबर बाँटते हैं और किसी साझेदार को वेतन नहीं मिलता। यदि आप कुछ अलग चाहते हैं, तो अपनी शर्तें साफ़ लिखें।
- फर्म का पंजीकरण अनिवार्य नहीं है: धारा 58 के अनुसार यह फर्म रजिस्ट्रार के पास कभी भी कराया जा सकता है। लेकिन धारा 69 के अनुसार अपंजीकृत फर्म किसी तीसरे पक्ष पर अनुबंध लागू कराने का मुकदमा नहीं कर सकती, और कोई साझेदार अनुबंध से मिले अधिकारों के लिए फर्म या अन्य साझेदारों पर मुकदमा नहीं कर सकता। इसी कारण अधिकतर फर्में पंजीकरण कराती हैं।
- खंड 7 और 8 में राशि तय करने से पहले किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट से पूछ लें कि आयकर में साझेदार के वेतन और पूँजी पर ब्याज को कैसे माना जाएगा।
- हस्ताक्षर के बाद फर्म का पैन बनवाएँ, फर्म के नाम से बैंक खाता खोलें और यदि आपके व्यवसाय को ज़रूरत हो तो जीएसटी पंजीकरण कराएँ।
- यदि कोई साझेदार ज़मीन या भवन को पूँजी के रूप में ला रहा है, कोई साझेदार केवल पूँजी लगाने वाला (निष्क्रिय) साझेदार होगा, या साझेदार रिश्तेदार हैं और पारिवारिक संपत्ति जुड़ी है, तो वकील से सलाह लें।