
खंड 35
डाबर (बर्मन परिवार)
शुरुआत: कलकत्ता में एक डॉक्टर द्वारा बनाई और बेची गई आयुर्वेदिक दवाएँ
- स्थापना
- 1884
- संस्थापक
- डॉ. एस.के. बर्मन
- मुख्यालय
- ग़ाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश (पंजीकृत कार्यालय नई दिल्ली)
- 13,193
- समेकित आय, वित्त वर्ष 2025-26 (₹ करोड़) · 2026
- 67+
- भारत में डाबर उत्पाद बेचने वाली दुकानें (लाख) · 2026
- 100+
- जिन देशों में डाबर उत्पाद बिकते हैं · 2023
कहानी
डॉ. एस.के. बर्मन ने 1884 में कलकत्ता में आयुर्वेदिक दवाएँ बनाना शुरू किया। मरीज़ उन्हें 'डाक्टर बर्मन' कहते थे, और इन्हीं दो शब्दों से डाबर नाम बना।
उनके पुत्र ने 1919 में अनुसंधान इकाई बनाई और मशीनों से अधिक मात्रा में दवाएँ बनाईं। अगले दशकों में डाबर दवाओं से आगे बढ़कर बालों के तेल, टूथपेस्ट और शहद जैसे रोज़मर्रा के उत्पादों में आया।
1998 में परिवार ने भारतीय पारिवारिक कारोबार के लिए एक दुर्लभ फ़ैसला लिया: रोज़मर्रा का प्रबंधन पेशेवरों को सौंप दिया और बोर्ड की सीटें व शेयर अपने पास रखे। आज डाबर 100 से अधिक देशों में बिकता है।
आज किन क्षेत्रों में
आयुर्वेदिक स्वास्थ्य देखभालबालों और मुँह की देखभालघर की देखभालखाद्य और जूस
मुख्य कंपनियाँ
Dabur India · Dabur International · Hobi Kozmetik (Turkey) · Namaste Laboratories (US) · Badshah Masala
समय-रेखा
- 1884डॉ. एस.के. बर्मन कलकत्ता में आयुर्वेदिक दवाएँ बनाना शुरू करते हैं।
- 1919उनके पुत्र सी.एल. बर्मन अनुसंधान इकाई बनाते हैं और मशीनें लाते हैं।
- 1972डाबर अपना मुख्यालय दिल्ली ले जाता है।
- 1994डाबर इंडिया शेयर बाज़ार में सूचीबद्ध होती है।
- 1998बर्मन परिवार रोज़मर्रा का प्रबंधन पेशेवरों को सौंपकर बोर्ड में बना रहता है।
- 2005प्रॉमिस और बबूल टूथपेस्ट बनाने वाली बलसारा का अधिग्रहण।
- 2010तुर्की की होबी कॉज़मेटिक और अमेरिका की नमस्ते लैबोरेटरीज़ ख़रीदता है।
- 2026वित्त वर्ष 2025-26 में ₹13,193 करोड़ की समेकित आय दर्ज करता है।