
खंड 37
हल्दीराम बीकानेर की एक दुकान से कैसे बढ़ा
एक स्थानीय नमकीन दुकान आम चीज़ को ऐसा ब्रांड कैसे बनाए जिसे लोग नाम लेकर माँगें?
- केस
- सफलता
- वर्ष
- 1937-2025
- 1937
- पहली दुकान खुलने का वर्ष · 1937
- लगभग $10 बिलियन के अनुमानित मूल्यांकन पर 20%
- टेमासेक के नेतृत्व वाले समूह की हिस्सेदारी · 2025
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हालात
बीकानेर में भुजिया आम नमकीन थी, जिसे कई दुकानें बनाती थीं। 1937 में 'हल्दीराम' नाम से मशहूर गंगा बिशन अग्रवाल ने राजस्थान के बीकानेर में अपनी छोटी दुकान खोली।
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फ़ैसला
स्टोरीबोर्ड18 के अनुसार उन्होंने अपनी भुजिया अलग बनाई: बेसन की जगह मोठ दाल से, ज़्यादा पतली, ज़्यादा कुरकुरी और हल्की तीखी। अगली पीढ़ियों में परिवार यह कारोबार नागपुर, कोलकाता और दिल्ली ले गया और भुजिया से आगे बढ़कर मिठाई, पैकेटबंद नमकीन और रेस्तराँ तक पहुँचा।
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नतीजा
आगे चलकर संस्थापक के पोतों में कारोबार बँटा और नागपुर, दिल्ली और कोलकाता में अलग-अलग कंपनियाँ बनीं। फ़ोर्ब्स के अनुसार 2023 में नागपुर और दिल्ली के कारोबार मिलकर 'हल्दीराम स्नैक्स फ़ूड' बने, और 2025 में सिंगापुर की टेमासेक के नेतृत्व वाले समूह ने लगभग 10 अरब डॉलर के अनुमानित मूल्यांकन पर 20 प्रतिशत हिस्सा ख़रीदा।