
खंड 37
किंगफ़िशर एयरलाइंस ज़मीन पर क्यों आ गई
जब कोई कारोबार कभी पूरे साल का मुनाफ़ा न कमाए और लगातार उधार लेता रहे, तो क्या होता है?
- केस
- नाकामी
- वर्ष
- 2005-2019
- ₹16,023.46 करोड़
- संचित घाटा · 31 March 2013
- ऋणात्मक ₹12,919.81 करोड़
- कुल संपत्ति (नेट वर्थ) · 31 March 2013
- ₹7,000 करोड़ से अधिक
- बैंक समूह का क़र्ज़ (SBI के नेतृत्व में 17 बैंक) · 2012
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हालात
किंगफ़िशर एयरलाइंस ने 2005 में प्रीमियम फ़ुल-सर्विस एयरलाइन के रूप में उड़ानें शुरू कीं। मई 2013 में बिज़नेस टुडे में छपे उसके नतीजों के अनुसार कामकाज शुरू होने के बाद उसने कभी पूरे साल का मुनाफ़ा दर्ज नहीं किया।
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फ़ैसला
एयरलाइन ने अपने घाटे बैंक क़र्ज़ से पूरे किए। बिज़नेस स्टैंडर्ड के अनुसार 2012 तक भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व वाले 17 बैंकों के समूह का इस पर 7,000 करोड़ रुपये से अधिक का क़र्ज़ था। अक्टूबर 2012 तक एयरलाइन अपनी उड़ानें बंद कर चुकी थी।
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नतीजा
20 अक्टूबर 2012 को नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने किंगफ़िशर का उड़ान लाइसेंस निलंबित कर दिया, क्योंकि एयरलाइन कारण-बताओ नोटिस का जवाब और पुनरुद्धार योजना नहीं दे सकी। 31 मार्च 2013 को इसका संचित घाटा 16,023.46 करोड़ रुपये और कुल संपत्ति (नेट वर्थ) ऋणात्मक 12,919.81 करोड़ रुपये थी। 5 जनवरी 2019 को मुंबई की एक विशेष अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय के आवेदन पर प्रवर्तक विजय माल्या को भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 के तहत भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया; इस क़ानून के तहत ऐसा घोषित होने वाले वे पहले व्यक्ति थे।