§1यह बिज़नेस क्या है
काँच की नली काटी जाती है, उसका मुँह फैलाकर स्टेम बनाया जाता है; लेड-इन तार और मॉलिब्डेनम का सहारा लगाया जाता है, टंगस्टन फ़िलामेंट फ़िट किया जाता है, और स्टेम को काँच के खोल में सील करके वैक्यूम बेंच पर हवा निकाली जाती है और कैप लगाई जाती है। लेड-इन तार सोल्डर करके हर लैंप IS 1606:1979 के अनुसार जाँचा जाता है। ख़रीदार वाहन स्पेयर-पार्ट्स विक्रेता और वर्कशॉप हैं; ये बल्ब ज़्यादातर बदलने के लिए बिकते हैं।
क्षमता: हर महीने 75,000 लैंप (साल में 9 लाख), ₹3 प्रति नग के हिसाब से ₹2.25 लाख महीना।
§2क्या यह आपके लिए है?
किसके लिए
ऑटो-पार्ट्स बाज़ार के पास का लैंप या काँच तकनीशियन जो विक्रेताओं को बेच सके।
किसके लिए नहीं
जिसे लैंप बनाने का अनुभव नहीं; वाहनों के LED पर जाने से यह उत्पाद घट रहा है।
फ़ायदे
- हर वाहन में बल्ब लगते हैं और बार-बार बदलते हैं
- मशीनें सस्ती और देश में बनी
- जगह और बिजली कम
- पुर्ज़े (फ़िलामेंट, कैप, काँच के खोल) तैयार मिलते हैं
नुकसान
- वाहनों में LED लैंप तेज़ी से फ़िलामेंट बल्ब की जगह ले रहे हैं
- प्रति लैंप बहुत कम दाम (प्रोफ़ाइल में ₹3)
- बाज़ार पर बड़े ब्रांडों का क़ब्ज़ा
- ज़्यादा मज़दूर: 37 लोग
कौन-से हुनर चाहिए
- काँच का काम (फ़्लेयरिंग, स्टेम बनाना, सीलिंग)
- वैक्यूम से हवा निकालना
- IS 1606 के अनुसार जाँच
- ऑटो-पार्ट्स विक्रेताओं को बिक्री
कठिनाई 3/5 क्यों: काँच का कुशल काम और LED के आने से सिकुड़ता बाज़ार।
§3बाज़ार
कौन ख़रीदता है
- ऑटो स्पेयर-पार्ट्स विक्रेता
- वाहन वर्कशॉप और मिस्त्री
- बल्ब बदलने वाले वाहन मालिक
कैसे बिकता है
- ऑटो-पार्ट्स थोक विक्रेता
- स्पेयर-पार्ट्स की खुदरा दुकानें
जानने लायक
- प्रोफ़ाइल बड़े ब्रांडों को मुख्य विक्रेता बताती है और कहती है कि छोटी इकाइयाँ उनसे मुक़ाबला कर सकती हैं।
- वाहन निर्माता LED रोशनी पर जा रहे हैं, जिससे फ़िलामेंट बल्ब की माँग घट रही है।
§4कच्चा माल और मशीनें
| सामान | संख्या | लागत |
|---|---|---|
| एग्ज़ॉस्ट बेंच, 24 हेड, शोधन टावर सेट, गैस वाल्व और वैक्यूम सहित | 4 | ₹1,14,000 |
| वैक्यूम यूनिट | 4 | ₹1,12,000 |
| स्पॉट वेल्डिंग मशीन | 4 | ₹80,000 |
| स्टेम बनाने की मशीन, 12 हेड | 1 | ₹38,500 |
| सीलिंग मशीन, 12 हेड | 1 | ₹38,000 |
| फ़्लेयर बनाने की मशीन, 10 हेड | 1 | ₹35,000 |
| कैपिंग मशीन, 36 हेड | 1 | ₹18,000 |
| 5 kVA मल्टी-टैप ट्रांसफ़ॉर्मर सहित एजिंग रैक | 1 | ₹14,000 |
| फ़ोटोमेट्रिक इंटीग्रेटर, 24" व्यास | 1 | ₹10,000 |
| काँच नली कटर, प्री-फ़ोकस मशीन, एयर ब्लोअर, सोल्डरिंग सेट, कंपन और ऐंठन जाँचक, तार कटर और मोड़क, कैप पर नाम खोदने की मशीन | 1 lot | ₹27,600 |
स्रोत: DC-MSME project profile — Auto Miniature Lamp (2003)
- तैयार कॉइल फ़िलामेंट (6 V, 12 V; 12, 24, 36 W)हर महीने 75,000, ₹7,500
- लैंप कैप, अलग-अलगहर महीने 75,000, ₹455 प्रति 1,000 = ₹34,125
- काँच के खोलहर महीने 75,000, ₹400 प्रति 1,000 = ₹30,000
- लेड-इन तारहर महीने 1,50,000, ₹22 प्रति 1,000 = ₹3,300
- सोल्डर तार, कैपिंग सीमेंट, रसायन और पैकिंग₹17,125 महीना
स्रोत: DC-MSME project profile — Auto Miniature Lamp (2003)
§5लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन
- उद्यम (Udyam) पंजीकरण
- GST
- स्थानीय निकाय से ट्रेड लाइसेंस
- राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सहमति (काँच के बर्नर)
§6योजनाएँ और सब्सिडी
- PMEGPCentralचालू15–35% सब्सिडी
- MudraCentralचालू₹20 लाख तक कर्ज़, बिना कोलैटरल
- CGTMSECentralचालूबिना कोलैटरल, ₹10 करोड़ तक
₹10.73 लाख की परियोजना PMEGP, MUDRA (तरुण) और CGTMSE में आती है।
§7पैसा
निवेश का आधार: DC-MSME प्रोफ़ाइल: मशीनें और जाँच उपकरण ₹4.87 लाख (4 एग्ज़ॉस्ट बेंच ₹1.14 लाख, 4 वैक्यूम यूनिट ₹1.12 लाख, 4 स्पॉट वेल्डर ₹80,000, स्टेम मशीन ₹38,500, सीलिंग ₹38,000, फ़्लेयर मशीन ₹35,000 आदि) + बिजली फ़िटिंग ₹73,050 + औज़ार और फ़र्नीचर ₹7,000 = स्थायी पूँजी ₹5.67 लाख; 3 महीने की कार्यशील पूँजी ₹5.06 लाख; कुल ₹10.73 लाख। भवन किराए का।
चालू पूँजी (वर्किंग कैपिटल): 3 महीने की कार्यशील पूँजी ₹5.06 लाख; महीने का ख़र्च ₹1.69 लाख, जिसमें वेतन ₹64,745 और कच्चा माल ₹92,050।
दाम 2002–03 के हैं — मशीन, कच्चे माल और मज़दूरी का ख़र्च अब काफ़ी ज़्यादा होगा।
§8निर्यात की संभावना
निर्यात से पहले HS कोड DGFT ITC(HS) सूची में पक्का करें
निर्यात परिषद / बोर्ड: EEPC India
- माल भेजने से पहले DGFT या अपने कस्टम ब्रोकर से 8 अंकों की ITC(HS) लाइन पक्की कर लें।
- पहली खेप भेजने से पहले DGFT से आयात-निर्यात कोड (IEC) लेना ज़रूरी है।
§9जोखिम — लोग कहाँ नाकाम होते हैं
- वाहनों का LED रोशनी पर जाना
- सीलिंग या वैक्यूम ख़राब हो तो ज़्यादा माल ख़राब
- ब्रांडों और आयात से दाम का दबाव
- गैस और काँच की सप्लाई में रुकावट
§1030 / 60 / 90 दिन की योजना
यह आम योजना है, जो हर बिज़नेस पर लागू होती है। इस बिज़नेस की ख़ास योजना शोध के बाद जोड़ी जाएगी।
- दिन 1–30: ऑटो मिनिएचर लैंप (वाहन बल्ब) निर्माण की एक चालू यूनिट देखने जाएँ, 10 खरीदारों से दाम और मात्रा पूछें, और 3 सप्लायरों से कोटेशन लें।
- दिन 31–60: Udyam (उद्यम) रजिस्ट्रेशन और ज़रूरी लाइसेंस (उद्यम (Udyam) पंजीकरण, GST), प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR), और योजना या लोन की फ़ाइल।
- दिन 61–90: जगह और मशीनें, ट्रायल उत्पादन, और पहले 10 ग्राहकों तक माल।
§11किससे जुड़ें
एसोसिएशन, क्लस्टर और ट्रेनिंग संस्थान — इनकी सूची बन रही है। जुड़ें
§12देखें
इस बिज़नेस पर अभी कोई एपिसोड नहीं आया है। पॉडकास्ट पर शो जल्द आ रहे हैं।
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DPR, लोन फ़ाइल या रजिस्ट्रेशन — WhatsApp पर पूछें।
¶स्रोत
डेटा की समीक्षा: 6 अक्टूबर 2026. कोई गलती दिखी? हमें बताएँ. सिर्फ़ जानकारी के लिए — यह कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं है।
