§1यह बिज़नेस क्या है

एक ही छत के नीचे दो लाइनें। रैपर लाइन में एल्युमिनियम फ़ॉइल को PVC या PVDC फ़िल्म के साथ जोड़ा जाता है, रोटोग्रेव्योर से छापा जाता है, सुखाकर, काटकर ब्लिस्टर, स्ट्रिप और सैशे पैक के रोल बनाए जाते हैं। कैप्सूल लाइन में पिनों को जिलेटिन या HPMC के घोल में डुबोया जाता है, नमी-नियंत्रित सुरंगों में सुखाया जाता है, फिर काटकर ढक्कन और बॉडी जोड़ी जाती है। ख़रीदार हैं दवा बनाने वाली इकाइयाँ, ठेके पर दवा बनाने वाले, न्यूट्रास्युटिकल, आयुर्वेदिक और पशु-दवा निर्माता। क्लीन रूम और GMP अनिवार्य हैं।

क्षमता: दवा रैपर साल में 1,200 टन; कैप्सूल खोल साल में 60 करोड़ (600 मिलियन)।

§2क्या यह आपके लिए है?

किसके लिए

पूँजी वाला दवा या पैकेजिंग पेशेवर, जो GMP जानता हो और जिसके दवा कंपनियों में ख़रीदार हों।

किसके लिए नहीं

पहली बार का उद्यमी — एक दूषित बैच से सारे ग्राहक जा सकते हैं।

फ़ायदे

  • हर गोली और कैप्सूल को पहली पैकिंग चाहिए — माँग स्थिर रहती है
  • हरिद्वार और बद्दी जैसे दवा क्लस्टर पास के सप्लायर चाहते हैं
  • शाकाहारी HPMC कैप्सूल की निर्यात बाज़ारों में माँग है
  • दो उत्पाद लाइनों से जोखिम बँटता है

नुकसान

  • ₹2.18 करोड़ का प्रोजेक्ट — PMEGP और MUDRA की सीमा से बहुत ऊपर
  • क्लीन रूम, GMP और दवा नियामक की मंज़ूरी में समय और पैसा लगता है
  • बड़े पुराने कैप्सूल निर्माताओं का दबदबा है
  • प्रोफ़ाइल की अपनी लागत और आय की तालिकाएँ आपस में मेल नहीं खातीं

कौन-से हुनर चाहिए

  • GMP और दस्तावेज़ रखना
  • क्लीन रूम और नमी पर नियंत्रण
  • लैमिनेशन और रोटोग्रेव्योर छपाई
  • दवा कंपनियों की ख़रीद और QA टीमों को बेचना

कठिनाई 5/5 क्यों: बड़ी पूँजी, क्लीन-रूम GMP, दवा नियामक की मंज़ूरी और सख़्त दवा ख़रीदार।

§3बाज़ार

कौन ख़रीदता है

  • दवा बनाने वाली इकाइयाँ
  • ठेके पर दवा बनाने वाली कंपनियाँ
  • न्यूट्रास्युटिकल कंपनियाँ
  • आयुर्वेदिक, हर्बल और पशु-दवा निर्माता
  • अस्पताल और सरकारी सप्लाई व्यवस्था

कैसे बिकता है

  • वेंडर मंज़ूरी के बाद सीधे सप्लाई अनुबंध
  • हरिद्वार और बद्दी जैसे दवा क्लस्टर

जानने लायक

  • प्रोफ़ाइल शाकाहारी HPMC कैप्सूल और उच्च-अवरोधी ब्लिस्टर फ़ॉइल को भारत में सप्लाई की कमी वाले उत्पाद बताती है।
  • प्रोफ़ाइल में पूरी क्षमता पर सालाना आय ₹51 करोड़ है।

§4कच्चा माल और मशीनें

सामानसंख्यालागत
ब्लिस्टर फ़ॉइल लैमिनेशन मशीन1—
रोटोग्रेव्योर छपाई मशीन1—
स्लिटिंग और रिवाइंडिंग मशीन1—
कैप्सूल खोल डिपिंग मशीन2—
सुखाने की सुरंगें2—
काटने और जोड़ने की मशीन2—
एयर हैंडलिंग यूनिट (क्लीन रूम नियंत्रण)1—
गुणवत्ता जाँच उपकरण (मोटाई, मज़बूती, कीटाणु)1 सेट—
कुल प्लांट और मशीनरी—₹85,00,000

स्रोत: Uttarakhand DUY project profile — Pharmaceutical Medicine Wrappers and Capsule Shell Manufacturing Unit

  • दवा-ग्रेड एल्युमिनियम फ़ॉइल, 20–25 माइक्रॉनप्रोफ़ाइल में साल में 1,300 टन, ₹220/किलो
  • PVC / PVDC फ़िल्म (250 माइक्रॉन दवा-ग्रेड PVC)साल में 900 टन, ₹180/किलो
  • दवा-ग्रेड जिलेटिन (गोवंश या मछली से)साल में 1,200 टन, ₹350/किलो
  • HPMC (शाकाहारी)साल में 300 टन, ₹800/किलो
  • छपाई की स्याही, सॉल्वेंट, मान्य रंग और शुद्ध पानीस्याही और सॉल्वेंट ₹2.50 करोड़, रंग और योजक ₹1.20 करोड़ सालाना (एकमुश्त)

स्रोत: Uttarakhand DUY project profile — Pharmaceutical Medicine Wrappers and Capsule Shell Manufacturing Unit

कच्चे माल के डेटाबेस में

जिलेटिन →एल्युमिनियम फ़ॉयल →

§5लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन

  1. उद्यम (Udyam) पंजीकरण
  2. GST पंजीकरण
  3. राज्य औषधि नियंत्रक / राज्य FDA की मंज़ूरी
  4. GMP का पालन; ISO 9001 और प्राथमिक पैकेजिंग सामग्री के लिए ISO 15378
  5. राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से स्थापना और संचालन की सहमति
  6. न्यूट्रास्युटिकल पैकेजिंग देने पर FSSAI लाइसेंस
  7. फ़ैक्ट्री लाइसेंस

यह रजिस्ट्रेशन हम करवा सकते हैं

§6योजनाएँ और सब्सिडी

₹2.18 करोड़ पर प्रोजेक्ट PMEGP और MUDRA की सीमा से ऊपर है; CGTMSE अपनी सीमा के अंदर बिना गिरवी कर्ज़ को गारंटी दे सकता है। पूँजी सब्सिडी के लिए राज्य की औद्योगिक नीति देखें।

§7पैसा

निवेश का आधार: स्थिर पूँजी ₹1.48 करोड़ (ज़मीन विकास/लीज़ ₹8 लाख, भवन ₹22 लाख, प्लांट और मशीनरी ₹85 लाख, बिजली और यूटिलिटी ₹10 लाख, प्रयोगशाला ₹12 लाख, फ़र्नीचर ₹5 लाख, शुरुआती ख़र्च ₹6 लाख) + कार्यशील पूँजी मार्जिन ₹70 लाख = ₹2.18 करोड़।

चालू पूँजी (वर्किंग कैपिटल): कार्यशील पूँजी ₹70 लाख: कच्चा माल ₹25 लाख, अधबना और तैयार माल ₹15 लाख, उधारी ₹20 लाख, नक़द ₹10 लाख। पैसा: प्रमोटर ₹65 लाख, टर्म लोन ₹1.25 करोड़, कार्यशील पूँजी कर्ज़ ₹28 लाख।

प्रोफ़ाइल पर साल नहीं छपा है — मशीनों और कच्चे माल के आज के दाम पता करें। प्रोफ़ाइल की सालाना कच्चे माल की तालिका (₹114.50 करोड़) उसकी आय (₹51 करोड़) से बड़ी है, यानी आँकड़े मेल नहीं खाते — कर्ज़ लेने से पहले नई DPR बनवाएँ।

लोन फ़ाइल कैसे बनाएँ

§8निर्यात की संभावना

निर्यात से पहले HS कोड DGFT ITC(HS) सूची में पक्का करें

9602.00काम किया हुआ बिना सख़्त जिलेटिन और उसकी वस्तुएँ (खाली जिलेटिन कैप्सूल इसी में)7607.20एल्युमिनियम फ़ॉइल, परत चढ़ी हुई

निर्यात परिषद / बोर्ड: Pharmexcil

  • HPMC कैप्सूल अलग शीर्षक में आ सकते हैं — 8 अंकों की ITC(HS) लाइन DGFT या कस्टम ब्रोकर से पक्की करें।
  • पहली खेप से पहले DGFT से आयात-निर्यात कोड (IEC) लेना ज़रूरी है।

§9जोखिम — लोग कहाँ नाकाम होते हैं

  • कीटाणु या नाप की गड़बड़ी पर बैच लौटाया जाना या वापस मँगाया जाना
  • एल्युमिनियम, जिलेटिन और HPMC के दामों में उतार-चढ़ाव
  • दवा कंपनी के ऑर्डर देने से पहले लंबी मंज़ूरी प्रक्रिया
  • उधारी में भारी कार्यशील पूँजी फँसना

§1030 / 60 / 90 दिन की योजना

यह आम योजना है, जो हर बिज़नेस पर लागू होती है। इस बिज़नेस की ख़ास योजना शोध के बाद जोड़ी जाएगी।

  1. दिन 1–30: कैप्सूल खोल और दवा की ब्लिस्टर फ़ॉइल की एक चालू यूनिट देखने जाएँ, 10 खरीदारों से दाम और मात्रा पूछें, और 3 सप्लायरों से कोटेशन लें।
  2. दिन 31–60: Udyam (उद्यम) रजिस्ट्रेशन और ज़रूरी लाइसेंस (उद्यम (Udyam) पंजीकरण, GST पंजीकरण), प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR), और योजना या लोन की फ़ाइल।
  3. दिन 61–90: जगह और मशीनें, ट्रायल उत्पादन, और पहले 10 ग्राहकों तक माल।

§11किससे जुड़ें

अभी जाँचा नहीं गया

एसोसिएशन, क्लस्टर और ट्रेनिंग संस्थान — इनकी सूची बन रही है। जुड़ें

§12देखें

इस बिज़नेस पर अभी कोई एपिसोड नहीं आया है। पॉडकास्ट पर शो जल्द आ रहे हैं।

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स्रोत

  1. Uttarakhand DUY project profile — Pharmaceutical Medicine Wrappers and Capsule Shell Manufacturing Unit

डेटा की समीक्षा: 6 अक्टूबर 2026. कोई गलती दिखी? हमें बताएँ. सिर्फ़ जानकारी के लिए — यह कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं है।