§1यह बिज़नेस क्या है

कैसीन दूध का मुख्य प्रोटीन है। मलाई रहित दूध को पाश्चराइज़ करके रेनेट या लैक्टिक या सल्फ़्यूरिक अम्ल से फाड़ा जाता है; दही जैसे थक्के को कई बार धोकर ट्रे ड्रायर में सुखाया, पीसा और छाना जाता है। प्रोफ़ाइल में साल में 300 टन की योजना चार किस्मों में है: रेनेट कैसीन, लैक्टिक अम्ल कैसीन, सल्फ़्यूरिक अम्ल कैसीन और वसा रहित कैसीन। रेनेट कैसीन खाद्य उद्योग में जाता है; अम्ल कैसीन पेंट, कागज़-कोटिंग, गोंद, चमड़ा, कपड़ा और दवा बनाने वालों को।

क्षमता: रोज़ 1 टन; साल में 300 टन (रेनेट 150, लैक्टिक अम्ल 90, सल्फ़्यूरिक अम्ल 45, वसा रहित 15)।

§2क्या यह आपके लिए है?

किसके लिए

डेयरी चलाने वाला या दूध-उत्पाद कंपनी, जिसके पास मलाई रहित दूध की पक्की सप्लाई हो।

किसके लिए नहीं

डेयरी अनुबंध या गंदा पानी साफ़ करने के प्लांट के पैसे के बिना पहली बार का उद्यमी।

फ़ायदे

  • भारत दुनिया में सबसे ज़्यादा दूध बनाता है — कच्चा माल पास में
  • खाद्य और उद्योग दोनों ख़रीदारों के लिए कई किस्में
  • सूखा कैसीन लंबे समय टिकता है और दूर भेजा जा सकता है
  • कैसीन की निर्यात माँग भी है

नुकसान

  • साल में 8,400 टन मलाई रहित दूध चाहिए — डेयरियों से पक्का अनुबंध ज़रूरी
  • प्रोफ़ाइल कैसीन बनाने को बहुत प्रदूषण वाला काम कहती है (मट्ठे का गंदा पानी)
  • बड़ा निवेश और कार्यशील पूँजी
  • दूध के दाम का उतार-चढ़ाव मार्जिन खा जाता है

कौन-से हुनर चाहिए

  • डेयरी प्रसंस्करण और साफ़-सफ़ाई
  • हर कैसीन किस्म की गुणवत्ता जाँच
  • गंदे पानी का उपचार
  • खाद्य और रसायन उद्योगों को बिक्री

कठिनाई 5/5 क्यों: बड़ा प्लांट, दूध के अनुबंध, भारी कार्यशील पूँजी और गंदे पानी पर सख़्त नियंत्रण।

§3बाज़ार

कौन ख़रीदता है

  • खाद्य उद्योग (रेनेट कैसीन)
  • पेंट, कागज़-कोटिंग, गोंद और कागज़ी कोन बनाने वाले
  • रबर-रसायन, चमड़ा, कपड़ा-सहायक रसायन और दवा बनाने वाले

कैसे बिकता है

  • उद्योगों से सीधे सप्लाई अनुबंध
  • रसायन और खाद्य-सामग्री व्यापारी
  • निर्यात

जानने लायक

  • प्रोफ़ाइल औसत बिक्री दाम ₹357 प्रति किलो मानती है।
  • प्रोफ़ाइल एक अनुमान बताती है कि 2026 तक कैसीन का वैश्विक बाज़ार 1 अरब अमेरिकी डॉलर से ऊपर जाएगा।

§4कच्चा माल और मशीनें

सामानसंख्यालागत
मलाई रहित दूध की भंडारण टंकियाँ2—
मलाई रहित दूध का पाश्चराइज़र1—
कैसीन बनाने के वैट (बड़े पात्र)2—
pH नियंत्रण1—
धुलाई टंकियाँ2—
डिकैंटर2—
कैसीन जमा करने की टंकी1—
ट्रे ड्रायर4—
पल्वराइज़र (पीसने की मशीन)1—
वाइब्रो सिफ़्टर (छलनी)1—
भाप बॉयलर, गंदा पानी साफ़ करने का प्लांट, DG सेट और ट्रांसफ़ॉर्मर, RO प्लांट, प्रयोगशाला और माल ढोने के उपकरणहर एक 1 लॉट—
सारे प्लांट और मशीनरी मिलाकर—₹103.98 lakh

स्रोत: SIDBI Stand-Up Mitra project profile — Casein from Milk (2018) — निजी गाइड — स्थानीय रूप से पक्का करें

  • मलाई रहित दूधसाल में 8,400 टन; प्रोफ़ाइल की लाभ तालिका में ₹1 प्रति लीटर गिना गया
  • रेनेटसाल में 3 टन
  • लैक्टिक अम्ल और सल्फ़्यूरिक अम्लसाल में 1.8 और 0.9 टन
  • अन्य मिलाने वाली सामग्रीसाल में 1.3 टन

स्रोत: SIDBI Stand-Up Mitra project profile — Casein from Milk (2018) — निजी गाइड — स्थानीय रूप से पक्का करें

कच्चे माल के डेटाबेस में

दूध (कच्चा) →

§5लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन

  1. FSSAI लाइसेंस
  2. उद्यम (Udyam) पंजीकरण
  3. GST पंजीकरण
  4. गंदा पानी साफ़ करने के प्लांट के साथ राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की स्थापना और संचालन सहमति
  5. फ़ैक्ट्री लाइसेंस
  6. निर्यात के लिए IEC

यह रजिस्ट्रेशन हम करवा सकते हैं

§6योजनाएँ और सब्सिडी

प्रोफ़ाइल ख़ुद खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय की ₹50.00 लाख सब्सिडी गिनती है। SC/ST या महिला उद्यमी के लिए स्टैंड-अप इंडिया (₹1 करोड़ तक कर्ज़); बिना गिरवी कर्ज़ के लिए CGTMSE।

§7पैसा

निवेश का आधार: ज़मीन ₹10.00 लाख (1,000 वर्ग मीटर) + भवन ₹63.00 लाख (700 वर्ग मीटर) + प्लांट और मशीनरी ₹103.98 लाख = ₹176.98 लाख। पैसा: अपना हिस्सा ₹44.25 लाख, टर्म लोन ₹82.74 लाख और खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय (MoFPI) की ₹50.00 लाख सब्सिडी। कार्यशील पूँजी अलग से गिनी गई है (₹164.14 लाख, जिसमें ₹76.50 लाख अपना और ₹87.64 लाख बैंक)।

चालू पूँजी (वर्किंग कैपिटल): बहुत भारी: ₹164.14 लाख, मुख्य रूप से दूध का स्टॉक, तैयार माल और 15 दिन की उधार वसूली; अपना हिस्सा ₹76.50 लाख, बैंक ₹87.64 लाख।

दाम 2018 के हैं — मशीनों और चलाने का ख़र्च अब ज़्यादा होगा।

लोन फ़ाइल कैसे बनाएँ

§8निर्यात की संभावना

निर्यात से पहले HS कोड DGFT ITC(HS) सूची में पक्का करें

3501.10कैसीन

निर्यात परिषद / बोर्ड: CHEMEXCIL (Basic Chemicals, Cosmetics & Dyes Export Promotion Council)

  • माल भेजने से पहले 8 अंकों वाली ITC(HS) लाइन DGFT या अपने कस्टम ब्रोकर से पक्की करें।
  • पहली खेप से पहले DGFT से आयात-निर्यात कोड (IEC) लेना ज़रूरी है।

§9जोखिम — लोग कहाँ नाकाम होते हैं

  • दूध की सप्लाई या दाम का झटका
  • गंदे पानी पर प्रदूषण बोर्ड की कार्रवाई
  • बड़ी कार्यशील पूँजी फँसी रहना
  • उद्योग ख़रीदारों से गुणवत्ता पर माल वापसी

§1030 / 60 / 90 दिन की योजना

यह आम योजना है, जो हर बिज़नेस पर लागू होती है। इस बिज़नेस की ख़ास योजना शोध के बाद जोड़ी जाएगी।

  1. दिन 1–30: मलाई रहित दूध से कैसीन की एक चालू यूनिट देखने जाएँ, 10 खरीदारों से दाम और मात्रा पूछें, और 3 सप्लायरों से कोटेशन लें।
  2. दिन 31–60: Udyam (उद्यम) रजिस्ट्रेशन और ज़रूरी लाइसेंस (FSSAI लाइसेंस, उद्यम (Udyam) पंजीकरण), प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR), और योजना या लोन की फ़ाइल।
  3. दिन 61–90: जगह और मशीनें, ट्रायल उत्पादन, और पहले 10 ग्राहकों तक माल।

§11किससे जुड़ें

अभी जाँचा नहीं गया

एसोसिएशन, क्लस्टर और ट्रेनिंग संस्थान — इनकी सूची बन रही है। जुड़ें

§12देखें

इस बिज़नेस पर अभी कोई एपिसोड नहीं आया है। पॉडकास्ट पर शो जल्द आ रहे हैं।

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DPR, लोन फ़ाइल या रजिस्ट्रेशन — WhatsApp पर पूछें।

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स्रोत

  1. SIDBI Stand-Up Mitra project profile — Casein from Milk (2018)

डेटा की समीक्षा: 6 अक्टूबर 2026. कोई गलती दिखी? हमें बताएँ. सिर्फ़ जानकारी के लिए — यह कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं है।