§1यह बिज़नेस क्या है
मछुआरों से ताज़ी झींगा बर्फ़ में आती है। उसे आकार के हिसाब से छाँटा, धोया और गुलाबी व सख़्त होने तक पकाया जाता है, फिर 20–30% नमी तक सुखाकर छीला, छाँटा और 1 kg के फ़ूड-ग्रेड थैलों में भरा जाता है। सूखी झींगा सीधे खाई जाती है और झींगा चिप्स, वेफ़र और क्रैकर बनाने में भी लगती है। रिपोर्ट के अनुसार MPEDA और भारतीय सी-फ़ूड निर्यातक संघ सूखी झींगा उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देते हैं।
क्षमता: 300 दिनों में रोज़ 800 kg सूखी झींगा; पूरी क्षमता पर 10% बर्बादी के बाद साल में 2,16,000 kg, 1 kg के पैकेट में। पहले साल 30% (64,800 kg), पाँचवें साल 50% (1,08,000 kg)।
§2क्या यह आपके लिए है?
किसके लिए
तटीय या झींगा-पालन वाले इलाक़े का व्यक्ति, जिसके मछुआरों या झींगा किसानों और सी-फ़ूड व्यापारियों से संपर्क हों।
किसके लिए नहीं
जो झींगा की पक्की आपूर्ति से दूर हो, या सख़्त खाद्य-सुरक्षा नियम निभाने को तैयार न हो।
फ़ायदे
- सूखी झींगा ताज़ी झींगा से कहीं ज़्यादा दिन चलती है
- झींगा चिप्स, वेफ़र और क्रैकर बनाने वालों से भी माँग
- MPEDA के ज़रिए निर्यात में मदद
- पूरी मशीन लाइन से पकाने, छीलने और छाँटने में हाथ का काम घटता है
नुकसान
- ₹39.96 लाख की परियोजना में अकेले मशीनें ₹30.30 लाख की
- ताज़ी झींगा जल्दी ख़राब होती है — बर्फ़ में आए और उसी दिन प्रोसेस हो
- सख़्त सफ़ाई ज़रूरी; ठीक से न सूखे या कीड़े लगें तो बैच ख़राब
- झींगा की पकड़ और दाम मौसम के साथ बदलते हैं
कौन-से हुनर चाहिए
- ताज़ी झींगा परखना और ख़रीदना
- सही नमी और नमक तक पकाना और सुखाना
- खाद्य-सुरक्षा और कीट-नियंत्रण
- व्यापारियों, स्नैक बनाने वालों और निर्यातकों को बेचना
कठिनाई 4/5 क्यों: जल्दी ख़राब होने वाला कच्चा माल, महँगी मशीनें और सख़्त खाद्य-सुरक्षा नियम।
§3बाज़ार
कौन ख़रीदता है
- सी-फ़ूड व्यापारी और थोक विक्रेता
- झींगा चिप्स, वेफ़र और क्रैकर बनाने वाले
- सी-फ़ूड निर्यातक
- घर और खुदरा दुकानें
कैसे बिकता है
- थोक मछली बाज़ार
- स्नैक बनाने वालों को सीधी सप्लाई
- मर्चेंट निर्यातक
जानने लायक
- रिपोर्ट माँग को तैयार खाने और झींगा स्नैक्स से जोड़ती है।
- रिपोर्ट में पहले साल की बिक्री 30% क्षमता पर ₹133.81 लाख है, ₹210 प्रति 1 kg पैकेट।
§4कच्चा माल और मशीनें
| सामान | संख्या | लागत |
|---|---|---|
| झींगा साफ़ करने की मशीन | 1 | ₹3,50,000 |
| झींगा पकाने की मशीन | 1 | ₹3,84,000 |
| झींगा ठंडा करने की मशीन | 1 | ₹3,20,000 |
| झींगा सुखाने की मशीन (गरम हवा) | 1 | ₹3,06,000 |
| झींगा छीलने और सिर हटाने की मशीन | 1 | ₹6,35,000 |
| झींगा छँटाई मशीन | 1 | ₹7,65,000 |
| पैकिंग मशीन | 1 | ₹2,20,000 |
| माल ढोने और दूसरे उपकरण (ट्रॉली, तौल मशीन) | पूरा सेट | ₹50,000 |
स्रोत: NIFTEM-K (MoFPI) PMFME Detailed Project Report – Dried Prawns Unit (2022)
- ताज़ी झींगामछुआरे बर्फ़ में लाते हैं; पहले साल ₹120 प्रति kg मानी गई
- नमक, मसालेथोड़ी मात्रा में
- फ़ूड-ग्रेड प्लास्टिक थैले1 kg के पैकेट
स्रोत: NIFTEM-K (MoFPI) PMFME Detailed Project Report – Dried Prawns Unit (2022)
Building Business Bazaar में सप्लायर
Central Institute of Fisheries Technology (ICAR-CIFT), Cochin · Kochi →
§5लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन
- FSSAI लाइसेंस
- उद्यम (Udyam) पंजीकरण
- GST पंजीकरण
- राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सहमति (गंदा पानी)
- निर्यात करें तो MPEDA पंजीकरण और निर्यात निरीक्षण परिषद (EIC) की मंज़ूरी
- पैक माल के लिए लीगल मेट्रोलॉजी पंजीकरण
§6योजनाएँ और सब्सिडी
- PMFMECentralअस्पष्ट35% सब्सिडी, अधिकतम ₹10 लाख
- PMEGPCentralचालू15–35% सब्सिडी
- CGTMSECentralचालूबिना कोलैटरल, ₹10 करोड़ तक
- MudraCentralचालू₹20 लाख तक कर्ज़, बिना कोलैटरल
सबसे पहले PMFME लागू (DPR उसी के लिए बना; रिपोर्ट में सब्सिडी अधिकतम ₹10 लाख)। ₹39.96 लाख की परियोजना पर PMEGP और CGTMSE लागू; MUDRA ₹20 लाख तक के कर्ज़ के लिए।
§7पैसा
निवेश का आधार: प्लांट और मशीनरी ₹30.30 लाख + अन्य स्थायी संपत्ति ₹2.00 लाख + कार्यशील पूँजी ₹7.66 लाख = ₹39.96 लाख। जगह किराए की (लागत में नहीं जोड़ी)।
चालू पूँजी (वर्किंग कैपिटल): कार्यशील पूँजी ₹7.66 लाख, जिसमें बैंक से ₹6.89 लाख; 5 दिन का कच्चा और तैयार माल, ख़रीदारों को 14 दिन की उधारी, सप्लायरों से 7 दिन की उधारी।
PMFME के लिए NIFTEM-K का मॉडल DPR, 2022 में छपा (अंदर साल नहीं छपा) — मशीनों के आज के दाम जाँच लें।
§8निर्यात की संभावना
निर्यात से पहले HS कोड DGFT ITC(HS) सूची में पक्का करें
निर्यात परिषद / बोर्ड: MPEDA
- रिपोर्ट के अनुसार MPEDA और भारतीय सी-फ़ूड निर्यातक संघ सूखी झींगा उत्पादों के निर्यात में मदद करते हैं।
- मछली उत्पादों के निर्यात के लिए निर्यात निरीक्षण परिषद (EIC) की मंज़ूरी चाहिए।
- माल भेजने से पहले 8 अंकों वाली ITC(HS) लाइन DGFT या अपने कस्टम ब्रोकर से पक्की करें।
- पहली खेप से पहले DGFT से आयात-निर्यात कोड (IEC) लेना ज़रूरी है।
§9जोखिम — लोग कहाँ नाकाम होते हैं
- प्रोसेस से पहले माल ख़राब होना
- मौसम में झींगा की कमी
- नमी, नमक या कीटाणु के कारण बैच अस्वीकार
- निर्यात नियम और ख़रीदारों की जाँच
§1030 / 60 / 90 दिन की योजना
यह आम योजना है, जो हर बिज़नेस पर लागू होती है। इस बिज़नेस की ख़ास योजना शोध के बाद जोड़ी जाएगी।
- दिन 1–30: सूखी झींगा (ड्राइड प्रॉन) इकाई की एक चालू यूनिट देखने जाएँ, 10 खरीदारों से दाम और मात्रा पूछें, और 3 सप्लायरों से कोटेशन लें।
- दिन 31–60: Udyam (उद्यम) रजिस्ट्रेशन और ज़रूरी लाइसेंस (FSSAI लाइसेंस, उद्यम (Udyam) पंजीकरण), प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR), और योजना या लोन की फ़ाइल।
- दिन 61–90: जगह और मशीनें, ट्रायल उत्पादन, और पहले 10 ग्राहकों तक माल।
§11किससे जुड़ें
एसोसिएशन, क्लस्टर और ट्रेनिंग संस्थान — इनकी सूची बन रही है। जुड़ें
§12देखें
इस बिज़नेस पर अभी कोई एपिसोड नहीं आया है। पॉडकास्ट पर शो जल्द आ रहे हैं।
सूखी झींगा (ड्राइड प्रॉन) इकाई शुरू करना है?
DPR, लोन फ़ाइल या रजिस्ट्रेशन — WhatsApp पर पूछें।
¶स्रोत
डेटा की समीक्षा: 6 अक्टूबर 2026. कोई गलती दिखी? हमें बताएँ. सिर्फ़ जानकारी के लिए — यह कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं है।
