§1यह बिज़नेस क्या है

आप लेथ, मिलिंग मशीन, शेपर, ड्रिल, ग्राइंडर और वेल्डिंग-ब्रेज़िंग सेट लगाते हैं। कारख़ाने आपको शाफ़्ट, वाल्व स्टेम, पंप और मोटर के पुर्ज़े, कास्टिंग और फ़ोर्जिंग मशीनिंग के लिए भेजते हैं, या घिसे पुर्ज़े ठीक करने के लिए। ज़्यादातर माल ग्राहक देता है, इसलिए आप मुख्य रूप से मशीन का समय और हुनर बेचते हैं। रिपोर्ट में बहुत बड़े लॉट पर ₹100 प्रति पीस से लेकर कई काम वाले छोटे लॉट पर ₹5,000 प्रति पीस तक का दाम माना गया है।

क्षमता: साल में 25,000 पुर्ज़ों तक का जॉब वर्क।

§2क्या यह आपके लिए है?

किसके लिए

फ़िटिंग, टर्निंग या मशीनिंग में ITI या डिप्लोमा वाला व्यक्ति, जिसने मशीन शॉप में काम किया हो और स्थानीय कारख़ानों को जानता हो।

किसके लिए नहीं

जिसके पास मशीनिंग का हुनर नहीं और जो सारा हुनर किराए पर लेना चाहता है — नाप-जोख की गड़बड़ी से ग्राहक जल्दी छूटते हैं।

फ़ायदे

  • ज़्यादातर माल ग्राहक देता है, इसलिए स्टॉक में कम पैसा फँसता है
  • हर औद्योगिक इलाक़े में पुरानी मशीनों के मरम्मत और बदलने वाले पुर्ज़ों की ज़रूरत
  • एक ही मशीनों से कई तरह के पुर्ज़े बनते हैं
  • धातु का स्क्रैप ₹20–80 प्रति kg बिकता है

नुकसान

  • आमदनी इस पर टिकी है कि हर महीने कितने ऑर्डर मिलते हैं
  • बहुत कुशल मशीनिस्ट चाहिए, जिन्हें टिकाए रखना कठिन
  • रिपोर्ट में पहला साल छोटे घाटे का है
  • बड़े कारख़ानों से भुगतान देर से आ सकता है

कौन-से हुनर चाहिए

  • ड्रॉइंग की सहनशीलता (टॉलरेंस) के अनुसार लेथ, मिलिंग और ग्राइंडिंग
  • इंजीनियरिंग ड्रॉइंग पढ़ना
  • वेल्डिंग, ब्रेज़िंग और घिसे पुर्ज़े दोबारा बनाना
  • जॉब का दाम तय करना और कारख़ानों से ऑर्डर लेना

कठिनाई 3/5 क्यों: लगाना आसान, पर असली मशीनिंग हुनर और कारख़ानों से लगातार ऑर्डर चाहिए।

§3बाज़ार

कौन ख़रीदता है

  • पंप, मोटर और वाल्व बनाने वाले
  • कपड़ा, काग़ज़, दवा, रसायन, खाद्य और डेयरी संयंत्र
  • वाहन और स्थिर इंजन चलाने वाले

कैसे बिकता है

  • कारख़ानों से सीधे जॉब ऑर्डर
  • OEM और सहायक इकाइयों का उप-ठेका काम

जानने लायक

  • रिपोर्ट कहती है कि साख, भरोसा और कारख़ानों के ख़रीदारों से निजी संपर्क ही काम की मात्रा तय करते हैं।
  • जिन इलाक़ों में ऐसी वर्कशॉप नहीं हैं — पूर्वोत्तर, मध्य प्रदेश और राजस्थान के कुछ भाग — वहाँ गुंजाइश बताई गई है।

§4कच्चा माल और मशीनें

सामानसंख्यालागत
हैकसॉ मशीन1₹30,000
लेथ मशीन1₹1,00,000
अटैचमेंट सहित मिलिंग मशीन1₹2,50,000
शेपिंग मशीन1₹40,000
पिलर ड्रिल मशीन1₹1,00,000
ग्राइंडिंग और थ्रेडिंग अटैचमेंट1₹60,000
वेल्डिंग और ब्रेज़िंग सेट1₹80,000
बेंच ग्राइंडर1₹25,000
औज़ार और गेज1 lot₹30,000
अन्य औज़ार1 lot₹25,000
बिजली फ़िटिंग1 lot₹50,000

स्रोत: SIDBI Stand-Up Mitra project profile — Engineering Workshop (2018) — निजी गाइड — स्थानीय रूप से पक्का करें

  • कास्टिंग, फ़ोर्जिंग, स्टील की छड़ें, सेक्शन और प्लेटेंजॉब वर्क में ज़्यादातर ग्राहक देता है
  • कटिंग टूल और खपत का सामानबाज़ार भाव पर ख़रीद

स्रोत: SIDBI Stand-Up Mitra project profile — Engineering Workshop (2018) — निजी गाइड — स्थानीय रूप से पक्का करें

§5लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन

  1. उद्यम (Udyam) पंजीकरण (ज़िला उद्योग केंद्र)
  2. GST
  3. फ़ैक्टरी अधिनियम लागू हो तो फ़ैक्टरी लाइसेंस और नक़्शा मंज़ूरी
  4. कर्मचारी सीमा पार होने पर ESI और PF
  5. राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से पूछें कि सहमति चाहिए या नहीं

यह रजिस्ट्रेशन हम करवा सकते हैं

§6योजनाएँ और सब्सिडी

₹11.48 लाख की परियोजना PMEGP (निर्माण में ₹50 लाख तक) और MUDRA में आती है; CGTMSE बिना गारंटी के कर्ज़ को कवर कर सकता है।

§7पैसा

निवेश का आधार: प्लांट और मशीनरी ₹7.40 लाख (मशीनें ₹6.85 लाख + औज़ार और गेज ₹0.55 लाख), फ़िक्सचर और बिजली फ़िटिंग ₹0.85 लाख, शुरुआती ख़र्च ₹0.50 लाख, कार्यशील पूँजी मार्जिन ₹2.73 लाख = ₹11.48 लाख। ज़मीन या भवन नहीं — जगह किराए पर।

चालू पूँजी (वर्किंग कैपिटल): कुल कार्यशील पूँजी ₹4.63 लाख; मार्जिन ₹2.73 लाख, बैंक से ₹1.91 लाख।

दाम 2018 के हैं — मशीनों और निर्माण की लागत अब ज़्यादा होगी।

लोन फ़ाइल कैसे बनाएँ

§8निर्यात की संभावना

निर्यात परिषद / बोर्ड: Not verified yet

  • अभी तक कोई HS कोड या निर्यात संस्था सरकारी सूची से जाँची नहीं गई है।

§9जोखिम — लोग कहाँ नाकाम होते हैं

  • पहले साल में पर्याप्त ऑर्डर न मिलना
  • नाप से बाहर पुर्ज़ों का लौटना
  • कुशल ऑपरेटरों का छोड़ जाना
  • ग्राहकों से देर से भुगतान

§1030 / 60 / 90 दिन की योजना

यह आम योजना है, जो हर बिज़नेस पर लागू होती है। इस बिज़नेस की ख़ास योजना शोध के बाद जोड़ी जाएगी।

  1. दिन 1–30: इंजीनियरिंग वर्कशॉप (जॉब वर्क और मरम्मत) की एक चालू यूनिट देखने जाएँ, 10 खरीदारों से दाम और मात्रा पूछें, और 3 सप्लायरों से कोटेशन लें।
  2. दिन 31–60: Udyam (उद्यम) रजिस्ट्रेशन और ज़रूरी लाइसेंस (उद्यम (Udyam) पंजीकरण (ज़िला उद्योग केंद्र), GST), प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR), और योजना या लोन की फ़ाइल।
  3. दिन 61–90: जगह और मशीनें, ट्रायल उत्पादन, और पहले 10 ग्राहकों तक माल।

§11किससे जुड़ें

अभी जाँचा नहीं गया

एसोसिएशन, क्लस्टर और ट्रेनिंग संस्थान — इनकी सूची बन रही है। जुड़ें

§12देखें

इस बिज़नेस पर अभी कोई एपिसोड नहीं आया है। पॉडकास्ट पर शो जल्द आ रहे हैं।

इंजीनियरिंग वर्कशॉप (जॉब वर्क और मरम्मत) शुरू करना है?

DPR, लोन फ़ाइल या रजिस्ट्रेशन — WhatsApp पर पूछें।

DPR / लोन फ़ाइल बनवाएँ

स्रोत

  1. SIDBI Stand-Up Mitra project profile — Engineering Workshop (2018)

डेटा की समीक्षा: 6 अक्टूबर 2026. कोई गलती दिखी? हमें बताएँ. सिर्फ़ जानकारी के लिए — यह कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं है।