§1यह बिज़नेस क्या है

5 हेक्टेयर का खेत छह औषधीय पौधे उगाता है — मकोय (Solanum nigrum), कालमेघ (Andrographis), भृंगराज (Eclipta), बोच या वच (Acorus calamus), एकांगी (Kaempferia galanga) और आमदा या आम्बा हल्दी (Curcuma amada)। पत्ती वाली जड़ी-बूटियाँ 3–5 महीने में और कंद (राइज़ोम) 8–12 महीने में तैयार होते हैं। एक छोटा शेड फ़सल को सुखाकर, पीसकर, छाँटकर और पैक करके दवा, न्यूट्रास्युटिकल और आयुर्वेदिक कंपनियों व निर्यात ख़रीदारों को भेजता है।

क्षमता: पहले साल 5 हेक्टेयर, पाँचवें साल 7 हेक्टेयर। लागत में प्रति हेक्टेयर उपज: मकोय 2,500 kg, कालमेघ 1,800 kg, भृंगराज 1,800 kg, वच 2,200 kg और एकांगी 2,500 kg सूखी; आमदा 22,000 kg ताज़ा कंद।

§2क्या यह आपके लिए है?

किसके लिए

किसान या कृषि स्नातक जिसके पास ज़मीन हो और जो हर्बल कंपनियों से आपूर्ति अनुबंध कर सके।

किसके लिए नहीं

जो बिना ख़रीदार के खुली मंडी में बेचने की सोचता है — औषधीय जड़ी-बूटियों का बाज़ार सीमित है।

फ़ायदे

  • छोटी अवधि की फ़सलें — पत्ती वाली जड़ी-बूटियाँ 3–5 महीने में तैयार
  • रिपोर्ट में प्रति kg ऊँचा सकल मार्जिन (61–85%)
  • आयुर्वेदिक और दवा कंपनियों में नियमित ख़रीदार
  • खेत पर सुखाने और पीसने से दाम बढ़ता है

नुकसान

  • ज़मीन ख़रीदना सबसे बड़ा अकेला ख़र्च है
  • सूखी जड़ी-बूटियों के दाम बहुत ऊपर-नीचे होते हैं
  • ख़रीदार ख़राब गुणवत्ता का माल लौटा देते हैं
  • बुवाई से पहले अनुबंध वाले ख़रीदार चाहिए

कौन-से हुनर चाहिए

  • औषधीय फ़सलें जैविक तरीक़े से उगाना
  • कटाई के बाद सुखाना और छँटाई
  • अनुबंध खेती और ख़रीदार से मोलभाव
  • प्रमाणपत्रों के लिए रिकॉर्ड रखना

कठिनाई 3/5 क्यों: खेती आसान है, पर ज़मीन ख़रीदना और पक्के ख़रीदार ढूँढना आसान नहीं।

§3बाज़ार

कौन ख़रीदता है

  • दवा कंपनियाँ
  • आयुर्वेदिक निर्माता
  • न्यूट्रास्युटिकल कंपनियाँ
  • निर्यात ख़रीदार

कैसे बिकता है

  • आपूर्ति अनुबंध और अनुबंध खेती
  • पैक जड़ी-बूटियों की सीधे ग्राहकों को बिक्री
  • निर्यात बाज़ार का विकास

जानने लायक

  • सूखे माल के माने गए दाम प्रति kg: मकोय ₹100, कालमेघ ₹175, भृंगराज ₹150, वच ₹225, एकांगी ₹200; आमदा ताज़ा ₹50 प्रति kg।
  • ऊँचे दाम वाले ख़रीदारों के लिए रिपोर्ट GACP और GMP पद्धति और ऑर्गेनिक प्रमाणन की सलाह देती है।

§4कच्चा माल और मशीनें

सामानसंख्यालागत
ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली1₹3,50,000
ट्रैक्टर, टिलर और स्प्रेयर1 सेट₹6,00,000
सोलर और मशीनी ड्रायर1 सेट₹2,50,000
प्रसंस्करण उपकरण (ग्राइंडर, सेपरेटर)1 सेट₹3,00,000
पैकिंग उपकरण (तौल, सील, लेबल)1 सेट₹1,50,000

स्रोत: Uttarakhand DUY project profile — Herbal and Medicinal Plant Cultivation

  • बीज और पौध सामग्रीफ़सल के हिसाब से ₹15,000–30,000 प्रति हेक्टेयर
  • जैविक खाद₹12,000–20,000 प्रति हेक्टेयर
  • जैविक कीटनाशक₹8,000–12,000 प्रति हेक्टेयर
  • पैकिंग सामग्री₹6,000–12,000 प्रति हेक्टेयर

स्रोत: Uttarakhand DUY project profile — Herbal and Medicinal Plant Cultivation

§5लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन

  1. खेत की ज़मीन के मालिकाना या लीज़ के काग़ज़
  2. ऊँचे दाम वाले ख़रीदारों के लिए NPOP के तहत ऑर्गेनिक प्रमाणन (वैकल्पिक)
  3. GACP (अच्छी खेती और संग्रह की पद्धति) प्रमाणन, जो दवा कंपनियाँ अक्सर माँगती हैं
  4. पैक की हुई जड़ी-बूटियाँ बेचने पर उद्यम (Udyam) और GST

यह रजिस्ट्रेशन हम करवा सकते हैं

§6योजनाएँ और सब्सिडी

सुखाने, भंडारण और प्रसंस्करण शेड के लिए AIF लागू होता है। फ़सल की खेती सामान्य कृषि कर्ज़ से होती है; रिपोर्ट कर्ज़ के एक हिस्से के लिए 5% सब्सिडी वाला NABARD से जुड़ा कर्ज़ भी बताती है।

§7पैसा

निवेश का आधार: ज़मीन 5 हेक्टेयर ₹15 लाख + ज़मीन का विकास ₹2 लाख + मिट्टी की तैयारी ₹1 लाख + भवन ₹17 लाख (प्रसंस्करण शेड 200 वर्ग मीटर ₹8 लाख, भंडार 100 वर्ग मीटर ₹5 लाख, कर्मचारी आवास 80 वर्ग मीटर ₹4 लाख) + मशीनें ₹16.5 लाख + शुरुआती ख़र्च ₹1.5 लाख + कार्यशील पूँजी ₹4.5 लाख = ₹57.50 लाख। पैसा: अपना ₹27.5 लाख, टर्म लोन ₹25 लाख (10%, 5 साल), कार्यशील पूँजी कर्ज़ ₹5 लाख (12%)।

चालू पूँजी (वर्किंग कैपिटल): परियोजना लागत में पहले 3 महीने के लिए ₹4.5 लाख; रिपोर्ट की कार्यशील पूँजी तालिका बाद में ₹7.98 लाख निकालती है (आधा अपना पैसा, आधा बैंक ओवरड्राफ़्ट)।

प्रोफ़ाइल पर साल नहीं छपा है — मशीनों के मौजूदा दाम जाँच लें।

लोन फ़ाइल कैसे बनाएँ

§8निर्यात की संभावना

निर्यात से पहले HS कोड DGFT ITC(HS) सूची में पक्का करें

1211दवा, इत्र या कीटनाशक में काम आने वाले पौधे और उनके हिस्से, ताज़े या सूखे

निर्यात परिषद / बोर्ड: Not verified yet

  • माल भेजने से पहले DGFT ITC-HS सूची में सही 8-अंकीय कोड देखें।

§9जोखिम — लोग कहाँ नाकाम होते हैं

  • दामों में उतार-चढ़ाव (रिपोर्ट में ऊँचा जोखिम)
  • कीट, रोग और ख़राब मौसम
  • ख़रीदारों द्वारा गुणवत्ता के कारण माल लौटाना
  • कटाई के समय मज़दूरों की कमी

§1030 / 60 / 90 दिन की योजना

यह आम योजना है, जो हर बिज़नेस पर लागू होती है। इस बिज़नेस की ख़ास योजना शोध के बाद जोड़ी जाएगी।

  1. दिन 1–30: औषधीय पौधों की खेती (कालमेघ, भृंगराज आदि) की एक चालू यूनिट देखने जाएँ, 10 खरीदारों से दाम और मात्रा पूछें, और 3 सप्लायरों से कोटेशन लें।
  2. दिन 31–60: Udyam (उद्यम) रजिस्ट्रेशन और ज़रूरी लाइसेंस (खेत की ज़मीन के मालिकाना या लीज़ के काग़ज़, ऊँचे दाम वाले ख़रीदारों के लिए NPOP के तहत ऑर्गेनिक प्रमाणन (वैकल्पिक)), प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR), और योजना या लोन की फ़ाइल।
  3. दिन 61–90: जगह और मशीनें, ट्रायल उत्पादन, और पहले 10 ग्राहकों तक माल।

§11किससे जुड़ें

अभी जाँचा नहीं गया

एसोसिएशन, क्लस्टर और ट्रेनिंग संस्थान — इनकी सूची बन रही है। जुड़ें

§12देखें

इस बिज़नेस पर अभी कोई एपिसोड नहीं आया है। पॉडकास्ट पर शो जल्द आ रहे हैं।

औषधीय पौधों की खेती (कालमेघ, भृंगराज आदि) शुरू करना है?

DPR, लोन फ़ाइल या रजिस्ट्रेशन — WhatsApp पर पूछें।

DPR / लोन फ़ाइल बनवाएँ

स्रोत

  1. Uttarakhand DUY project profile — Herbal and Medicinal Plant Cultivation

डेटा की समीक्षा: 6 अक्टूबर 2026. कोई गलती दिखी? हमें बताएँ. सिर्फ़ जानकारी के लिए — यह कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं है।