§1यह बिज़नेस क्या है

स्टील स्क्रैप और फ़ेरो-मिश्रधातु 750 kg की मीडियम-फ़्रीक्वेंसी इंडक्शन भट्ठी में पिघलाए जाते हैं, पिघले धातु की जाँच होती है, फिर पैटर्न और कोर से बने रेत के साँचों में डाला जाता है। ढलाई तय गति से ठंडी की जाती है, फालतू हिस्से काटे जाते हैं, घिसाई, शॉट-ब्लास्टिंग, ताप-उपचार और ख़रीदार की ड्रॉइंग के हिसाब से मशीनिंग होती है। स्टेनलेस, ताप-रोधी और टूल-स्टील ग्रेड भी बन सकते हैं।

क्षमता: टन में क्षमता नहीं छपी; एक 750 kg इंडक्शन भट्ठी पर आधारित। पहले साल 35% और पाँचवें साल 75% पर चलती है।

§2क्या यह आपके लिए है?

किसके लिए

ढलाई का अनुभव रखने वाला मैकेनिकल या मेटलर्जी इंजीनियर, जिसके इंजीनियरिंग ख़रीदारों से संपर्क हों।

किसके लिए नहीं

जिसे ढलाई का ज्ञान न हो या भारी औद्योगिक शेड के लिए पूँजी न हो।

फ़ायदे

  • रेलवे, सीमेंट, बिजली और खाद कारख़ानों को नियमित रूप से स्टील कास्टिंग चाहिए
  • मिश्रधातु और स्टेनलेस ग्रेड के अच्छे दाम मिलते हैं
  • अपनी जाँच लैब से ख़रीदार का भरोसा बनता है
  • मुख्य कच्चा माल स्टील स्क्रैप है, जो हर जगह बिकता है

नुकसान

  • पहले साल घाटा
  • ₹2.10 करोड़ की परियोजना, भारी बिजली भार
  • धातु विज्ञान जानने वाला और कुशल साँचा बनाने वाले चाहिए
  • माल रिजेक्ट होना महँगा — एक ग़लत पिघलाव पूरी भट्ठी का माल बर्बाद करता है

कौन-से हुनर चाहिए

  • पिघली धातु का रसायन और मिश्रधातु मिलाना
  • पैटर्न, साँचा और कोर बनाना
  • ताप-उपचार और जाँच
  • ड्रॉइंग पर इंजीनियरिंग ख़रीदारों को बेचना

कठिनाई 5/5 क्यों: भारी ढलाई, धातु विज्ञान का ज्ञान, ₹2 करोड़ से ज़्यादा लागत और पहले साल घाटा।

§3बाज़ार

कौन ख़रीदता है

  • रेलवे और उसके सप्लायर
  • सीमेंट, बिजली और खाद कारख़ाने
  • पंप, वाल्व और गियर बनाने वाले
  • रसायन, दवा और डेयरी उपकरण बनाने वाले

कैसे बिकता है

  • ड्रॉइंग पर सीधे ऑर्डर
  • बड़े ख़रीदारों और सरकारी उपक्रमों में वेंडर पंजीकरण

जानने लायक

  • रिपोर्ट के अनुसार ख़रीदार कम मशीनिंग छूट, तय रासायनिक बनावट और समय पर सप्लाई चाहते हैं।
  • उद्योग और निर्यात बढ़ने से टूल-स्टील पुर्ज़ों की माँग बढ़ रही है।

§4कच्चा माल और मशीनें

सामानसंख्यालागत
मीडियम-फ़्रीक्वेंसी इंडक्शन पिघलाने की भट्ठी, 750 kg1₹35,00,000
कूलिंग टॉवर, पानी नरम करने का प्लांट, हीट एक्सचेंजर1₹8,50,000
साँचा बनाने की मशीनें3₹7,50,000
रेत मिक्सर, छलनी आदि1₹1,50,000
कोर बनाने की मशीनें2₹50,000
रेत दोबारा काम लायक़ बनाने का सिस्टम1₹2,00,000
कोर पकाने का ओवन1₹70,000
गरम करने वाली करछुल (लैडल)2₹60,000
EOT क्रेन1₹3,50,000
शॉट ब्लास्टिंग मशीन1₹2,00,000
खराद, ड्रिलिंग और मिलिंग मशीनें2 + 1 + 1₹5,00,000
धातु जाँच माइक्रोस्कोप और नमूना पॉलिश मशीन1 + 1₹2,80,000
भौतिक और रासायनिक जाँच लैबहर एक 1 लॉट₹5,00,000

स्रोत: SIDBI Stand-Up Mitra project profile — Steel Castings (2017) — निजी गाइड — स्थानीय रूप से पक्का करें

  • तरह-तरह का स्टील स्क्रैप या सिल्लीपिघलाने का मूल माल
  • फ़ेरो-मिश्रधातु और सूक्ष्म मिश्रधातुग्रेड के हिसाब से मैंगनीज़, सिलिकॉन, क्रोमियम, निकल, वैनेडियम, मॉलिब्डेनम
  • साँचे की रेत, फ़्लक्स, अग्निरोधी पाउडर और पैटर्न सामग्रीसाँचे और कोर के लिए उपभोग्य सामग्री

स्रोत: SIDBI Stand-Up Mitra project profile — Steel Castings (2017) — निजी गाइड — स्थानीय रूप से पक्का करें

§5लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन

  1. उद्यम (Udyam) पंजीकरण
  2. GST
  3. राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सहमति (ढलाई में धूल और धुएँ का नियंत्रण ज़रूरी)
  4. फ़ैक्टरी लाइसेंस और फ़ायर NOC
  5. हाई-टेंशन बिजली कनेक्शन
  6. निर्यात के लिए IEC कोड

यह रजिस्ट्रेशन हम करवा सकते हैं

§6योजनाएँ और सब्सिडी

PMEGP के लिए बहुत बड़ी; CGTMSE बैंक लोन की गारंटी दे सकता है और Stand-Up India SC/ST व महिला उद्यमियों को पैसा देता है।

§7पैसा

निवेश का आधार: ज़मीन ₹30 लाख + भवन ₹45 लाख + प्लांट और मशीनरी ₹72.33 लाख + फ़िक्सचर और बिजली फ़िटिंग ₹12.20 लाख + शुरुआती ख़र्च ₹4 लाख + कार्यशील पूँजी का हिस्सा ₹46.80 लाख = ₹210.33 लाख। पैसा: प्रमोटर ₹87.68 लाख, बैंक लोन ₹122.65 लाख (स्थायी संपत्ति का 70%)।

चालू पूँजी (वर्किंग कैपिटल): कुल ₹95.63 लाख (माल ₹29.63 लाख, वसूली ₹26.56 लाख, ऊपरी ख़र्च ₹9.82 लाख, घटाकर लेनदार ₹29.63 लाख); अपना हिस्सा ₹46.80 लाख, बैंक ₹48.83 लाख।

Stand-Up Mitra प्रोफ़ाइल 2017 में अपलोड हुई; प्रोफ़ाइल पर साल नहीं छपा है। मशीनों और कच्चे माल के दाम अब ज़्यादा होंगे।

लोन फ़ाइल कैसे बनाएँ

§8निर्यात की संभावना

निर्यात परिषद / बोर्ड: Not verified yet

  • अभी तक कोई HS कोड या निर्यात संस्था सरकारी सूची से जाँची नहीं गई है।

§9जोखिम — लोग कहाँ नाकाम होते हैं

  • स्क्रैप और फ़ेरो-मिश्रधातु के दाम में उतार-चढ़ाव
  • महँगी बिजली
  • ढलाई में दोष और ख़रीदार का माल लौटाना
  • धूल और धुएँ पर प्रदूषण बोर्ड की कार्रवाई

§1030 / 60 / 90 दिन की योजना

यह आम योजना है, जो हर बिज़नेस पर लागू होती है। इस बिज़नेस की ख़ास योजना शोध के बाद जोड़ी जाएगी।

  1. दिन 1–30: स्टील कास्टिंग (इंडक्शन भट्ठी वाली ढलाई) की एक चालू यूनिट देखने जाएँ, 10 खरीदारों से दाम और मात्रा पूछें, और 3 सप्लायरों से कोटेशन लें।
  2. दिन 31–60: Udyam (उद्यम) रजिस्ट्रेशन और ज़रूरी लाइसेंस (उद्यम (Udyam) पंजीकरण, GST), प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR), और योजना या लोन की फ़ाइल।
  3. दिन 61–90: जगह और मशीनें, ट्रायल उत्पादन, और पहले 10 ग्राहकों तक माल।

§11किससे जुड़ें

अभी जाँचा नहीं गया

एसोसिएशन, क्लस्टर और ट्रेनिंग संस्थान — इनकी सूची बन रही है। जुड़ें

§12देखें

इस बिज़नेस पर अभी कोई एपिसोड नहीं आया है। पॉडकास्ट पर शो जल्द आ रहे हैं।

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स्रोत

  1. SIDBI Stand-Up Mitra project profile — Steel Castings (2017)

डेटा की समीक्षा: 6 अक्टूबर 2026. कोई गलती दिखी? हमें बताएँ. सिर्फ़ जानकारी के लिए — यह कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं है।