§1यह बिज़नेस क्या है
मंदिरों में चढ़े गेंदा, गुलाब, गुड़हल और दूसरे फूल रोज़ इकट्ठा करके छाँटे, सुखाए और बारीक किए जाते हैं। रद्दी काग़ज़ भिगोकर लुगदी बनाई जाती है, फूलों और प्राकृतिक गोंद के साथ मिलाई जाती है, फिर हाथ से लैंप, फूलदान, ट्रे, गहनों के डिब्बे, दीवार सजावट, मूर्तियाँ, पेन स्टैंड, अगरबत्ती स्टैंड और दीया स्टैंड बनाए जाते हैं। चीज़ें धूप या सोलर ड्रायर में सुखाकर प्राकृतिक रंगों से रंगी जाती हैं और मंदिरों, तीर्थ की दुकानों, इको-स्टोर, पर्यटकों और कंपनियों के उपहार के लिए पैक होती हैं।
§2क्या यह आपके लिए है?
किसके लिए
मंदिर वाले शहर का स्वयं सहायता समूह, NGO या शिल्प उद्यमी जो मंदिर ट्रस्टों के साथ साझेदारी कर सके।
किसके लिए नहीं
जो तेज़, एक जैसा मशीन उत्पादन चाहता है।
फ़ायदे
- कच्चा माल मुफ़्त — वे फूल जो वरना नदियाँ गंदी करते
- मंदिर वाले शहरों में तीर्थयात्री पवित्र स्मृति-चिह्न ख़रीदते हैं
- उपहार के लिए पर्यावरण और आस्था की मज़बूत कहानी
- ज़्यादातर काम महिला समूह कर सकते हैं
नुकसान
- बरसात में सुखाना धीमा होता है
- हाथ से बनी चीज़ें अलग-अलग होती हैं और समय लेती हैं
- मंदिर समितियों से लगातार तालमेल चाहिए
- पेपर मैशे ढुलाई में नाज़ुक होता है
कौन-से हुनर चाहिए
- लुगदी बनाना और हाथ से साँचे में ढालना
- प्राकृतिक रंगों से रंगाई और फ़िनिशिंग
- फूल इकट्ठा करने की व्यवस्था
- मंदिरों, मेलों और ऑनलाइन बिक्री
कठिनाई 2/5 क्यों: आसान शिल्प और मुफ़्त कच्चा माल; मुख्य बाधाएँ सप्लाई का तालमेल और सुखाना हैं।
§3बाज़ार
कौन ख़रीदता है
- तीर्थयात्री और मंदिर की दुकानें
- पर्यटक
- शहरी परिवार और इको-स्टोर
- कंपनियों के उपहार ख़रीदार
कैसे बिकता है
- मंदिरों और तीर्थ स्थलों पर बिक्री
- शिल्प मेले और प्रदर्शनियाँ
- ऑनलाइन बिक्री
- कंपनियों के उपहार ऑर्डर
जानने लायक
- प्रोफ़ाइल में पेपर मैशे की प्लेट, कप और डिब्बे जैसे उपयोगी सामान भी हैं।
- लागत घटाने के लिए कारीगरों के साझा ढाँचे वाली सहकारी व्यवस्था का सुझाव है।
§4कच्चा माल और मशीनें
| सामान | संख्या | लागत |
|---|---|---|
| फूल बारीक करने की मशीनें | 5 | — |
| लुगदी तैयार करने की इकाइयाँ | 5 | — |
| हाथ के साँचे और औज़ार | 20 सेट | — |
| सुखाने के रैक और सोलर ड्रायर | 10 | — |
| रंगाई और फ़िनिशिंग के औज़ार | 10 सेट | — |
| पैकिंग मशीनें | 5 | — |
| कुल मशीनरी और उपकरण | — | ₹8,00,000 |
स्रोत: Uttarakhand DUY project profile — Paper Mache Products from Temple Flowers in Uttarakhand
- मंदिर के फूलों का कचरा (गेंदा, गुलाब, गुड़हल, मौसमी फूल)मंदिरों से रोज़ इकट्ठा
- रद्दी काग़ज़ और प्राकृतिक रेशे
- गोंद, प्राकृतिक रंग और पर्यावरण-अनुकूल वार्निश
स्रोत: Uttarakhand DUY project profile — Paper Mache Products from Temple Flowers in Uttarakhand
§5लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन
- उद्यम (Udyam) पंजीकरण
- GST पंजीकरण
- फूल इकट्ठा करने के लिए मंदिर ट्रस्टों से लिखित समझौता
- विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) से कारीगर पहचान पत्र (पहचान) — मेलों और योजनाओं में काम का
- स्थानीय निकाय से ट्रेड लाइसेंस
§6योजनाएँ और सब्सिडी
- PMEGPCentralचालू15–35% सब्सिडी
- MudraCentralचालू₹20 लाख तक कर्ज़, बिना कोलैटरल
- CGTMSECentralचालूबिना कोलैटरल, ₹10 करोड़ तक
PMEGP लागू (₹34 लाख); MUDRA ₹20 लाख तक; बिना गिरवी कर्ज़ के लिए CGTMSE। प्रोफ़ाइल सहायता के लिए राष्ट्रीय हस्तशिल्प विकास कार्यक्रम और स्किल इंडिया का नाम लेती है।
§7पैसा
निवेश का आधार: सर्वे और जुटाव ₹2 लाख + ढाँचा ₹5 लाख + मशीनरी और उपकरण ₹8 लाख + कच्चा माल ₹3 लाख + प्रशिक्षण ₹2 लाख + पहले साल का वेतन ₹6 लाख + ढुलाई ₹2 लाख + मार्केटिंग और ब्रांडिंग ₹3 लाख + प्रशासन ₹1 लाख + आकस्मिक ख़र्च ₹2 लाख = ₹34 लाख।
चालू पूँजी (वर्किंग कैपिटल): बजट में कच्चा माल ₹3 लाख और पहले साल का वेतन ₹6 लाख है। मंदिर ट्रस्ट फूल और जगह दान कर सकते हैं; पैसे के स्रोत के रूप में NHDP, स्किल इंडिया, सहकारी बैंक, माइक्रोफ़ाइनेंस और CSR बताए गए हैं।
प्रोफ़ाइल पर साल नहीं छपा है — मशीनों और कच्चे माल के आज के दाम पता करें।
§8निर्यात की संभावना
निर्यात से पहले HS कोड DGFT ITC(HS) सूची में पक्का करें
निर्यात परिषद / बोर्ड: EPCH (Export Promotion Council for Handicrafts)
- सजावटी पेपर मैशे हस्तशिल्प दूसरी जगह वर्गीकृत हो सकते हैं — 8 अंकों की ITC(HS) लाइन DGFT से पक्की करें।
- पहली खेप से पहले DGFT से आयात-निर्यात कोड (IEC) लेना ज़रूरी है।
§9जोखिम — लोग कहाँ नाकाम होते हैं
- पूरा न सूखने पर फफूँद
- त्योहारों के बाहर फूलों की सप्लाई घटना
- भेजते समय टूट-फूट
- मंदिर की अनुमति पर निर्भरता
§1030 / 60 / 90 दिन की योजना
यह आम योजना है, जो हर बिज़नेस पर लागू होती है। इस बिज़नेस की ख़ास योजना शोध के बाद जोड़ी जाएगी।
- दिन 1–30: मंदिर के फूलों से पेपर मैशे उत्पाद की एक चालू यूनिट देखने जाएँ, 10 खरीदारों से दाम और मात्रा पूछें, और 3 सप्लायरों से कोटेशन लें।
- दिन 31–60: Udyam (उद्यम) रजिस्ट्रेशन और ज़रूरी लाइसेंस (उद्यम (Udyam) पंजीकरण, GST पंजीकरण), प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR), और योजना या लोन की फ़ाइल।
- दिन 61–90: जगह और मशीनें, ट्रायल उत्पादन, और पहले 10 ग्राहकों तक माल।
§11किससे जुड़ें
एसोसिएशन, क्लस्टर और ट्रेनिंग संस्थान — इनकी सूची बन रही है। जुड़ें
§12देखें
इस बिज़नेस पर अभी कोई एपिसोड नहीं आया है। पॉडकास्ट पर शो जल्द आ रहे हैं।
मंदिर के फूलों से पेपर मैशे उत्पाद शुरू करना है?
DPR, लोन फ़ाइल या रजिस्ट्रेशन — WhatsApp पर पूछें।
¶स्रोत
डेटा की समीक्षा: 6 अक्टूबर 2026. कोई गलती दिखी? हमें बताएँ. सिर्फ़ जानकारी के लिए — यह कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं है।
