§1यह बिज़नेस क्या है
ताज़ी उपज (संतरा, ख़ुबानी, आड़ू, आलूबुख़ारा, चेरी, खजूर, लहसुन, प्याज़, खीरा, मशरूम, स्वीट कॉर्न, बीन्स और जड़ी-बूटियाँ) काटकर वैक्यूम ड्रायर में सुखाई जाती है। वैक्यूम में पानी कम तापमान पर उबलता है (प्रोफ़ाइल में लगभग 30 मिलीबार और 30 °C), इसलिए आम ड्रायर की तुलना में गर्मी से कम नुक़सान होता है। सूखे टुकड़े चाय के मिश्रण, बिस्किट, सॉस, सीज़निंग मिश्रण और मैरिनेड में जाते हैं, और तैयार खाना बनाने वालों और होटल चेन को बिकते हैं, जिनमें से कई विदेश में हैं।
क्षमता: रोज़ 150 किलो ताज़ी उपज; साल में 24 टन तैयार माल, औसत ₹350 किलो पर बिक्री।
§2क्या यह आपके लिए है?
किसके लिए
फल, सब्ज़ी या जड़ी-बूटी उगाने वाले इलाक़े के पास का व्यक्ति जो खाद्य सामग्री ख़रीदारों या निर्यातकों तक पहुँच सके।
किसके लिए नहीं
जो जल्दी मुनाफ़ा चाहता है — प्रोफ़ाइल में पहले साल लगभग कोई लाभ नहीं है।
फ़ायदे
- वैक्यूम में सुखाने से रंग, स्वाद और विटामिन गर्म हवा वाली सुखाई से बेहतर बचते हैं
- ऊँचा बिक्री दाम — प्रोफ़ाइल में औसत ₹350 किलो
- मौसम की बची हुई उपज काम आती है
- तैयार खाना बनाने वालों और होटल चेन से निर्यात की अच्छी माँग
नुकसान
- प्रोफ़ाइल में पहले साल का लाभ लगभग शून्य (₹0.48 लाख) है
- वैक्यूम ड्रायर महँगा है और सावधानी से चलाना पड़ता है
- ताज़ी उपज की सप्लाई मौसमी है
- निर्यात के ख़रीदार अवशेष और साफ़-सफ़ाई के कड़े मानक माँगते हैं
कौन-से हुनर चाहिए
- वैक्यूम में सुखाना और नमी पर नियंत्रण
- ताज़ी उपज की छँटाई और तैयारी
- खाद्य सुरक्षा और नमी-रोधी पैकिंग
- खाद्य निर्माताओं और निर्यातकों को बेचना
कठिनाई 3/5 क्यों: ख़ास ड्रायर और मौसमी सप्लाई, साथ में पहले साल बहुत कम मुनाफ़ा।
§3बाज़ार
कौन ख़रीदता है
- तैयार खाना बनाने वाली कंपनियाँ
- होटल चेन
- चाय, बिस्किट, सॉस और सीज़निंग मिश्रण बनाने वाले
कैसे बिकता है
- खाद्य निर्माताओं को निर्यात, ख़ासकर यूरोप
- देश के खाद्य प्रोसेसरों को सीधी सप्लाई
जानने लायक
- प्रोफ़ाइल के अनुसार भारत ने 2016-17 में ₹1,088.55 करोड़ की 87,279.99 टन सूखी और संरक्षित सब्ज़ियाँ निर्यात कीं।
- प्रोफ़ाइल के अनुसार सबसे अच्छा मुनाफ़ा आमतौर पर निर्यात में, ख़ासकर यूरोप में है।
§4कच्चा माल और मशीनें
| सामान | संख्या | लागत |
|---|---|---|
| वैक्यूम ड्रायिंग मशीन | 1 | ₹6.50 lakh |
| पैकिंग मशीन | 1 | ₹1.00 lakh |
| फ़्रीज़र | 1 | ₹1.00 lakh |
| तौल काँटा | 1 | ₹0.20 lakh |
| दफ़्तर का फ़र्नीचर और प्रयोगशाला | एकमुश्त | ₹0.70 lakh |
स्रोत: SIDBI Stand-Up Mitra project profile — Vacuum Dried Fruits, Vegetables and Herbs (2018) — निजी गाइड — स्थानीय रूप से पक्का करें
- फल: संतरा, ख़ुबानी, आड़ू, आलूबुख़ारा, खजूर, चेरीमौसम में ख़रीदी गई ताज़ी उपज
- सब्ज़ियाँ: लहसुन, प्याज़, खीरा, मशरूम, स्वीट कॉर्न, हरी और लीमा बीन्समौसम में ख़रीदी गई ताज़ी उपज
- जड़ी-बूटियाँप्रोफ़ाइल के शीर्षक में लिखी हैं
स्रोत: SIDBI Stand-Up Mitra project profile — Vacuum Dried Fruits, Vegetables and Herbs (2018) — निजी गाइड — स्थानीय रूप से पक्का करें
§5लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन
- FSSAI निर्माण लाइसेंस
- उद्यम (Udyam) पंजीकरण
- GST पंजीकरण
- जहाँ ज़रूरी हो, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सहमति
- निर्यात के लिए APEDA पंजीकरण (RCMC) और IEC
- खुदरा पैकेट के लिए विधिक माप विज्ञान (Legal Metrology) पंजीकरण
§6योजनाएँ और सब्सिडी
- PMFMECentralअस्पष्ट35% सब्सिडी, अधिकतम ₹10 लाख
- PMEGPCentralचालू15–35% सब्सिडी
- MudraCentralचालू₹20 लाख तक कर्ज़, बिना कोलैटरल
- CGTMSECentralचालूबिना कोलैटरल, ₹10 करोड़ तक
PMFME में सूक्ष्म खाद्य इकाई को ₹10 लाख तक 35% कर्ज़-आधारित सब्सिडी; ₹29.08 लाख की निर्माण परियोजना पर PMEGP लागू होती है; MUDRA में ₹20 लाख तक; बिना गारंटी कर्ज़ के लिए CGTMSE।
§7पैसा
निवेश का आधार: ज़मीन ₹4.50 लाख + इमारत ₹2.50 लाख + प्लांट और मशीनरी ₹8.70 लाख + फ़र्नीचर और प्रयोगशाला ₹0.70 लाख + शुरुआती और संचालन से पहले के ख़र्च ₹0.87 लाख + कार्यशील पूँजी मार्जिन ₹11.81 लाख = ₹29.08 लाख।
चालू पूँजी (वर्किंग कैपिटल): कार्यशील पूँजी ₹11.81 लाख (स्टॉक ₹5.91 लाख, उधारी ₹2.95 लाख, ऊपरी ख़र्च ₹2.95 लाख); मार्जिन ₹5.17 लाख, बैंक ₹6.64 लाख। पैसा: मालिक ₹7.27 लाख, बैंक ₹21.81 लाख।
SIDBI स्टैंड-अप मित्र की प्रोफ़ाइल, 2018 में डाली गई (उस पर साल नहीं छपा) — आज दाम ज़्यादा होंगे; मौजूदा लागत पता करें।
§8निर्यात की संभावना
निर्यात से पहले HS कोड DGFT ITC(HS) सूची में पक्का करें
निर्यात परिषद / बोर्ड: APEDA
- माल भेजने से पहले 8 अंकों की ITC(HS) लाइन DGFT या अपने कस्टम ब्रोकर से पक्की कर लें।
- पहली खेप भेजने से पहले DGFT से आयात-निर्यात कोड (IEC) लेना ज़रूरी है।
§9जोखिम — लोग कहाँ नाकाम होते हैं
- फ़सल ख़राब होना या ताज़ी उपज के दाम अचानक बढ़ना
- नमी लगने से सूखा माल ख़राब होना
- गुणवत्ता जाँच में निर्यात की खेप लौटना
- मौसम के व्यस्त समय में मशीन का ख़राब होना
§1030 / 60 / 90 दिन की योजना
यह आम योजना है, जो हर बिज़नेस पर लागू होती है। इस बिज़नेस की ख़ास योजना शोध के बाद जोड़ी जाएगी।
- दिन 1–30: वैक्यूम में सुखाए फल, सब्ज़ियाँ और जड़ी-बूटियाँ की एक चालू यूनिट देखने जाएँ, 10 खरीदारों से दाम और मात्रा पूछें, और 3 सप्लायरों से कोटेशन लें।
- दिन 31–60: Udyam (उद्यम) रजिस्ट्रेशन और ज़रूरी लाइसेंस (FSSAI निर्माण लाइसेंस, उद्यम (Udyam) पंजीकरण), प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR), और योजना या लोन की फ़ाइल।
- दिन 61–90: जगह और मशीनें, ट्रायल उत्पादन, और पहले 10 ग्राहकों तक माल।
§11किससे जुड़ें
एसोसिएशन, क्लस्टर और ट्रेनिंग संस्थान — इनकी सूची बन रही है। जुड़ें
§12देखें
इस बिज़नेस पर अभी कोई एपिसोड नहीं आया है। पॉडकास्ट पर शो जल्द आ रहे हैं।
वैक्यूम में सुखाए फल, सब्ज़ियाँ और जड़ी-बूटियाँ शुरू करना है?
DPR, लोन फ़ाइल या रजिस्ट्रेशन — WhatsApp पर पूछें।
¶स्रोत
डेटा की समीक्षा: 6 अक्टूबर 2026. कोई गलती दिखी? हमें बताएँ. सिर्फ़ जानकारी के लिए — यह कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं है।
