§1यह बिज़नेस क्या है
ऊन को धोकर, सुखाकर, धुनकर, तकली पर कातकर और रंगकर, कालीन करघे पर नीचे से ऊपर दरी बुनी जाती है, फिर कटाई, धुलाई, खिंचाई और पैकिंग होती है। रिपोर्ट भदोही–मिर्ज़ापुर कालीन क्षेत्र का वर्णन करती है, जिसे 2010 से GI टैग मिला है।
क्षमता: 10 घंटे की पाली में रोज़ 250 वर्ग फ़ुट दरी; पहले साल 60% क्षमता मानी गई।
§2क्या यह आपके लिए है?
किसके लिए
भदोही–मिर्ज़ापुर क्षेत्र का बुनकर परिवार या व्यापारी जिसकी निर्यातकों से पहचान हो।
किसके लिए नहीं
बुनाई क्लस्टर से बाहर का व्यक्ति जिसके पास प्रशिक्षित बुनकर न हों।
फ़ायदे
- रिपोर्ट के अनुसार भारत दुनिया का सबसे बड़ा कालीन निर्माता और निर्यातक है
- औज़ारों की बहुत कम लागत (₹1.50 लाख)
- यूपी में कुशल बुनकरों और निर्यातकों वाला मज़बूत क्लस्टर
नुकसान
- ऊँचा ब्रेक-ईवन (49%)
- धीमी, मेहनत वाली बुनाई
- ज़्यादातर माल निर्यात होता है, इसलिए माँग विदेशी ऑर्डरों पर टिकी
कौन-से हुनर चाहिए
- करघा बुनाई
- ऊन रंगाई और रंग मिलान
- निर्यातकों से व्यवहार
कठिनाई 3/5 क्यों: औज़ार सस्ते, पर बुनाई का हुनर और निर्यात संपर्क ही सफलता तय करते हैं।
§3बाज़ार
कौन ख़रीदता है
- कालीन निर्यातक और बाइंग हाउस
- घर-सजावट के विक्रेता
- परिवार
कैसे बिकता है
- भदोही–मिर्ज़ापुर के निर्यातकों से जॉब ऑर्डर
- फ़र्निशिंग दुकानें और मेले
- ऑनलाइन मार्केटप्लेस
जानने लायक
- रिपोर्ट के अनुसार भारत में बने लगभग 80% कालीन निर्यात होते हैं।
- मिर्ज़ापुर–भदोही क्षेत्र में लगभग 32 लाख लोग लगे हैं; 2010 का GI टैग 'भदोही का हस्तनिर्मित कालीन' नौ ज़िलों को शामिल करता है।
- रिपोर्ट घरेलू बाज़ार को लगभग ₹200 करोड़ का बताती है।
§4कच्चा माल और मशीनें
| सामान | संख्या | लागत |
|---|---|---|
| कालीन करघा | 1 | ₹1,38,500 |
| कालीन खुरचने का औज़ार | 1 | ₹1,500 |
| तकली (ऊन कातने की) | 1 सेट | ₹8,000 |
| हथौड़ा (मुगरी) | 1 | ₹1,000 |
| हाथ के औज़ार | 1 सेट | ₹1,000 |
स्रोत: PMEGP sample project report — Woolen Dari (prepared by Udyami/Samadhan)
- ऊनमुख्य कच्चा माल
- रंगऊन रँगने के लिए
- रसायनधुलाई और रंगाई के लिए
स्रोत: PMEGP sample project report — Woolen Dari (prepared by Udyami/Samadhan)
कच्चे माल के डेटाबेस में
§5लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन
- उद्यम (Udyam) पंजीकरण
- GST पंजीकरण
- विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) से कारीगर पहचान पत्र (पहचान कार्ड) — शिल्प योजनाओं और मेलों में काम आता है
- स्थानीय निकाय से ट्रेड लाइसेंस
- निर्यात करें तो कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (CEPC) में पंजीकरण
§6योजनाएँ और सब्सिडी
- PMEGPCentralचालू15–35% सब्सिडी
- MudraCentralचालू₹20 लाख तक कर्ज़, बिना कोलैटरल
- CGTMSECentralचालूबिना कोलैटरल, ₹10 करोड़ तक
- Stand-Up IndiaCentralबंद₹10 लाख – ₹1 करोड़ कर्ज़
PMEGP लागू (₹11.12 लाख); पूरी लागत MUDRA में आ जाती है; बिना गिरवी कर्ज़ के लिए CGTMSE; SC/ST और महिला उद्यमियों के लिए स्टैंड-अप इंडिया।
§7पैसा
निवेश का आधार: सिविल काम ₹6.00 लाख + प्लांट और मशीनरी ₹1.50 लाख + फ़र्नीचर और फ़िक्सचर ₹0.50 लाख + कार्यशील पूँजी ₹3.12 लाख = ₹11.12 लाख। ज़मीन अपनी या किराए की।
चालू पूँजी (वर्किंग कैपिटल): कार्यशील पूँजी ₹3.12 लाख, जिसमें बैंक से ₹2.80 लाख; 10 दिन का स्टॉक, ख़रीदारों को 15 दिन की उधारी।
रिपोर्ट पर साल नहीं छपा है — मशीनों के आज के दाम पता करें।
§8निर्यात की संभावना
निर्यात से पहले HS कोड DGFT ITC(HS) सूची में पक्का करें
निर्यात परिषद / बोर्ड: CEPC (Carpet Export Promotion Council)
- माल भेजने से पहले 8 अंकों वाली ITC(HS) लाइन DGFT या अपने कस्टम ब्रोकर से पक्की करें।
- पहली खेप से पहले DGFT से आयात-निर्यात कोड (IEC) लेना ज़रूरी है।
§9जोखिम — लोग कहाँ नाकाम होते हैं
- निर्यात ऑर्डरों में उतार-चढ़ाव
- ऊन के दाम बढ़ना
- ख़रीदार बाल-श्रम न होने का प्रमाण माँगते हैं
§1030 / 60 / 90 दिन की योजना
यह आम योजना है, जो हर बिज़नेस पर लागू होती है। इस बिज़नेस की ख़ास योजना शोध के बाद जोड़ी जाएगी।
- दिन 1–30: ऊनी दरी बुनाई की एक चालू यूनिट देखने जाएँ, 10 खरीदारों से दाम और मात्रा पूछें, और 3 सप्लायरों से कोटेशन लें।
- दिन 31–60: Udyam (उद्यम) रजिस्ट्रेशन और ज़रूरी लाइसेंस (उद्यम (Udyam) पंजीकरण, GST पंजीकरण), प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR), और योजना या लोन की फ़ाइल।
- दिन 61–90: जगह और मशीनें, ट्रायल उत्पादन, और पहले 10 ग्राहकों तक माल।
§11किससे जुड़ें
एसोसिएशन, क्लस्टर और ट्रेनिंग संस्थान — इनकी सूची बन रही है। जुड़ें
§12देखें
इस बिज़नेस पर अभी कोई एपिसोड नहीं आया है। पॉडकास्ट पर शो जल्द आ रहे हैं।
¶स्रोत
डेटा की समीक्षा: 6 अक्टूबर 2026. कोई गलती दिखी? हमें बताएँ. सिर्फ़ जानकारी के लिए — यह कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं है।
