कहानी
पीलीभीत बाँस की बाँसुरी के लिए जाना जाता है, जिसे परिवार असम और दूसरे राज्यों से आए बाँस को काटकर, सुखाकर, गर्म सलाख़ से छेद बनाकर और सुर मिलाकर बनाते हैं। ये बाँसुरियाँ भारत और विदेश के संगीतकारों, स्कूलों और दुकानों को बिकती हैं। बाँसुरी और लकड़ी के उत्पाद पीलीभीत का ODOP उत्पाद हैं, और पीलीभीत बाँसुरी को GI टैग मिला है।
आँकड़ों में
जिन प्रकाशित स्रोतों को हम खोल सके, उनमें इस क्लस्टर के ताज़ा आँकड़े नहीं हैं।
GI टैग
- Pilibhit Bansuriआवेदन संख्या GI Application No. 824; Registration No. 588GI Registry, IP India - Application 824: Pilibhit Bansuri
नए उद्यमी के लिए रास्ते
- सुर मिली हुई कॉन्सर्ट स्तर की बाँसुरी ऑनलाइन बेचना
- स्कूलों के लिए बाँसुरी किट और सीखने के सेट
- बाँसुरी बनाने वालों को उपचारित बाँस सप्लाई करना
- पर्यटन दुकानों के लिए स्मृति-चिह्न और सजावटी बाँसुरी
क्लस्टर की मुश्किलें
- अच्छा बाँस दूर से आता है
- सुर मिलाने का हुनर कुछ ही कारीगरों के पास है
- सस्ती घटिया बाँसुरियाँ दाम गिराती हैं
- कम मार्केटिंग वाली छोटी पारिवारिक इकाइयाँ
यहाँ शुरू करने लायक बिज़नेस
बाँस की बाँसुरी बनाना →बाँस के सामान और हस्तशिल्प →लकड़ी के स्मृति-चिह्न और सोवेनियर बनाना →
