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खंड 03

ब्रेक-ईवन और दाम तय करना

ब्रेक-ईवन बिक्री का वह स्तर है जहाँ घाटा रुक जाता है, यानी न लाभ, न हानि। दाम तय करता है कि आप वहाँ कितनी जल्दी पहुँचेंगे। एक हल किए गए उदाहरण से लागत-जोड़ दाम और बाज़ार दाम की तुलना कीजिए।

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01 योगदान: हर बिक्री कितना जोड़ती है

प्रति नग योगदान = बिक्री दाम − प्रति नग बदलती लागत। यह वह रक़म है जो हर बिक्री महीने के स्थायी खर्च को पूरा करने में जोड़ती है।

ब्रेक-ईवन नग = महीने का स्थायी खर्च ÷ प्रति नग योगदान। इससे कम बिक्री पर घाटा है; इससे ऊपर हर अतिरिक्त बिक्री का पूरा योगदान मुनाफ़ा बनता है।

उदाहरण

उदाहरण (काल्पनिक आँकड़े, असली डेटा नहीं): स्थायी खर्च ₹60,000 महीना है (किराया ₹15,000, मज़दूरी ₹35,000, अन्य ₹10,000)। हर पैकेट पर माल और पैकिंग की लागत ₹30 है, और बिक्री दाम ₹50। योगदान = ₹20। ब्रेक-ईवन = ₹60,000 ÷ ₹20 = 3,000 पैकेट महीना। 4,000 पैकेट पर मुनाफ़ा = 1,000 × ₹20 = ₹20,000।

02 लागत-जोड़ दाम

लागत-जोड़ का मतलब है: प्रति नग पूरी लागत निकालिए, फिर जितना मार्जिन चाहिए उतना जोड़िए। इससे हर बिक्री अपने हिस्से की लागत पूरी करती है, अगर आप योजना जितना माल बेच पाएँ।

इसकी कमज़ोरी: यह नहीं देखता कि ग्राहक कितना देने को तैयार हैं और प्रतियोगी कितना ले रहे हैं। अगर आपकी लागत ऊँची है, तो लागत-जोड़ ऐसा दाम देता है जिसे कोई नहीं मानेगा।

उदाहरण

उदाहरण (काल्पनिक आँकड़े, असली डेटा नहीं): उन्हीं आँकड़ों में, 4,000 पैकेट बेचने की योजना हो, तो प्रति पैकेट पूरी लागत = ₹30 + (₹60,000 ÷ 4,000) = ₹30 + ₹15 = ₹45। इसमें 20% मार्जिन जोड़ने पर दाम ₹45 × 1.2 = ₹54 बनता है।

03 बाज़ार दाम

बाज़ार दाम ग्राहक से शुरू होता है: मिलती-जुलती चीज़ें किस दाम पर बिकती हैं, और ख़रीदार आपकी चीज़ के लिए कितना देंगे? फिर देखिए कि उस दाम पर आपकी लागत के बाद पर्याप्त योगदान बचता है या नहीं।

अगर बाज़ार दाम पर योगदान बहुत कम बचता है, तो रास्ता है लागत घटाना, उत्पाद बदलना या दूसरा ख़रीदार ढूँढ़ना, सिर्फ़ ज़्यादा बिक्री की उम्मीद नहीं।

उदाहरण

उदाहरण (काल्पनिक आँकड़े, असली डेटा नहीं): प्रतियोगी ऐसे पैकेट ₹48 से ₹52 में बेचते हैं। ₹54 पर आप योजना से कम बेच सकते हैं। ₹48 पर योगदान = ₹18 और ब्रेक-ईवन = ₹60,000 ÷ ₹18 = 3,334 पैकेट (3,333.3 को ऊपर पूरा किया)। यानी सिर्फ़ बराबरी पर आने के लिए ₹50 के मुक़ाबले 334 पैकेट ज़्यादा।

04 छूट का जाल

छोटी-सी छूट योगदान को कहीं ज़्यादा घटा देती है, क्योंकि वह पूरे दाम से नहीं, सीधे मार्जिन से कटती है।

  • दाम तय करने से पहले अपना ब्रेक-ईवन जानिए।
  • लागत-जोड़ दाम को निचली सीमा मानिए और बाज़ार दाम से असलियत जाँचिए।
  • छूट देने से पहले नया ब्रेक-ईवन निकालिए।
उदाहरण

उदाहरण (काल्पनिक आँकड़े, असली डेटा नहीं): ₹50 के दाम पर 10% छूट देने से दाम ₹45 हो जाता है। योगदान ₹20 से घटकर ₹15 रह जाता है, यानी 25% कमी। ब्रेक-ईवन 3,000 से बढ़कर ₹60,000 ÷ ₹15 = 4,000 पैकेट हो जाता है: सिर्फ़ स्थायी खर्च निकालने के लिए एक-तिहाई ज़्यादा बेचना होगा।

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