01 पहली भर्ती से पहले
काम लिखिए: व्यक्ति क्या करेगा, कितने घंटे, कितना वेतन, और अच्छा काम कैसे परखेंगे। मज़दूरी, काम के घंटे, छुट्टी और नोटिस अवधि के साथ लिखित नियुक्ति पत्र दीजिए।
उस काम के लिए राज्य सरकार की तय न्यूनतम मज़दूरी से कम मत दीजिए, तय तारीख़ पर वेतन दीजिए, और हो सके तो बैंक से दीजिए ताकि रिकॉर्ड रहे।
02 EPF कब ज़रूरी है
सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (21 नवंबर 2025 से लागू) के तहत EPF हर उस प्रतिष्ठान पर लागू है जहाँ 20 या ज़्यादा कर्मचारी हैं, उद्योग कोई भी हो।
17 सितंबर 2026 से ज़रूरी EPF कवरेज के लिए वेतन सीमा ₹25,000 महीना है; पहले यह ₹15,000 थी। इस सीमा तक कमाने वाले कर्मचारियों को कवर करना ज़रूरी है। नियोक्ता और कर्मचारी दोनों योगदान देते हैं, और सामान्य दर वेतन का 12% है। छोटे प्रतिष्ठान भी अपनी मर्ज़ी से जुड़ सकते हैं।
उदाहरण (काल्पनिक आँकड़े, असली डेटा नहीं): EPF के दायरे वाली इकाई में एक कर्मचारी ₹18,000 महीना कमाता है। 12% की दर से नियोक्ता का हिस्सा ₹2,160 महीना है, और इतनी ही रक़म कर्मचारी के वेतन से कटती है। भर्ती की असली लागत में नियोक्ता के हिस्से का बजट रखिए।
03 ESI कब ज़रूरी है
संहिता के तहत पूरे भारत में 10 या ज़्यादा कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों पर ESI लागू है। ख़तरनाक या जानलेवा काम में एक कर्मचारी होने पर भी ESI ज़रूरी है। 10 से कम कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठान, नियोक्ता और कर्मचारी दोनों राज़ी हों तो, अपनी मर्ज़ी से जुड़ सकते हैं।
ESIC की कवरेज के लिए मौजूदा वेतन सीमा ₹21,000 महीना है (दिव्यांग व्यक्तियों के लिए ₹25,000), जो 1 जनवरी 2017 से लागू है। ESI कर्मचारी को इलाज, बीमारी में वेतन और मातृत्व लाभ देता है।
- 10 और 20 की सीमा जाँचते समय सारे कर्मचारी गिनिए, ठेके और दिहाड़ी वाले भी; पक्का न हो तो EPFO या ESIC से पूछिए।
- सीमा पार करते ही EPFO और ESIC पोर्टल पर पंजीकरण कीजिए।
- हर महीने तय तारीख़ तक योगदान जमा कीजिए; देरी पर हर्जाना और ब्याज लगता है।
