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खंड 03

बही-खाता और रिकॉर्ड रखना

आसान और नियमित रिकॉर्ड बताते हैं कि आप कमा रहे हैं या नहीं, कर्ज़ लेने में मदद करते हैं, और टैक्स जाँच में आपको सुरक्षित रखते हैं। यहाँ बताया गया है कि क्या रखें और रोज़ 15 मिनट का तरीक़ा क्या हो।

मिनट
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01 बही-खाता क्यों ज़रूरी है

रिकॉर्ड के बिना आप सिर्फ़ अंदाज़ा लगा रहे हैं। बही-खाता बताता है कि कौन-सा उत्पाद कमा रहा है, किससे पैसा लेना है, किसे देना है, और असल में कितनी नकदी है।

बैंक कर्ज़ देने से पहले बैंक स्टेटमेंट और हिसाब माँगते हैं। साफ़ बही-खाते से कर्ज़ जल्दी और बेहतर शर्तों पर मिलता है।

02 क्या-क्या रखें

इन्हें कॉपी, स्प्रेडशीट या अकाउंटिंग सॉफ़्टवेयर, किसी में भी रख सकते हैं। ज़रूरी यह है कि हर एंट्री पर तारीख़ हो और उसके पीछे कोई बिल या रसीद हो।

  • रोकड़ बही (कैश बुक): नकद में आया और गया हर रुपया।
  • बैंक बही: व्यापार के खाते में हर जमा, भुगतान और शुल्क।
  • बिक्री रजिस्टर और सारे बिलों की प्रतियाँ।
  • ख़रीद रजिस्टर और सप्लायरों के सारे बिल।
  • स्टॉक रजिस्टर: क्या आया, क्या गया, क्या बचा।
  • लेनदार और देनदार सूची: किससे लेना है और किसे देना है, तय तारीख़ों के साथ।
  • कर्मचारियों का मज़दूरी और हाज़िरी रजिस्टर।
  • कर्ज़ के काग़ज़, लाइसेंस, पंजीकरण और संपत्ति के बिल।

03 क़ानून क्या कहता है

अगर आप GST में पंजीकृत हैं, तो CGST अधिनियम, 2017 (धारा 35) के तहत आपको अपने मुख्य व्यापार स्थल पर उत्पादन, स्टॉक, बिक्री, ख़रीद और टैक्स का सही हिसाब रखना होगा। धारा 36 कहती है कि ये रिकॉर्ड उस साल के वार्षिक रिटर्न की तय तारीख़ से 72 महीने (छह साल) तक रखने होंगे।

आयकर क़ानून में भी आमदनी या टर्नओवर तय सीमा पार करते ही बही-खाता रखना ज़रूरी है, और उससे ऊँची सीमा पर टैक्स ऑडिट। ये सीमाएँ बदलती रहती हैं, इसलिए आयकर विभाग की वेबसाइट देखिए या अपने मामले के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट से पूछिए।

04 रोज़ 15 मिनट का तरीक़ा

व्यापार के लिए अलग बैंक खाता रखिए और उससे कभी घर के बिल मत भरिए। इसकी जगह हर महीने अपने लिए एक तय रक़म निकालिए।

हर शाम दिन की बिक्री और ख़रीद दर्ज कीजिए, बिल फ़ाइल कीजिए, और नकदी गिनिए। महीने में एक बार अपनी बैंक बही का बैंक स्टेटमेंट से मिलान कीजिए।

उदाहरण

उदाहरण (काल्पनिक आँकड़े, असली डेटा नहीं): महीने के आख़िर में आपकी बैंक बही ₹45,800 दिखाती है पर बैंक स्टेटमेंट ₹42,300। पता चलता है कि ₹3,500 का अंतर एक ग्राहक का चेक है जो आपने 30 तारीख़ को जमा किया था और अभी क्लियर नहीं हुआ। हर महीने मिलान करने से ऐसे अंतर, और असली ग़लतियाँ, जल्दी पकड़ में आती हैं।

स्रोत (2)
  1. CBIC: Central Goods and Services Tax Act, 2017 (updated text) - sections 35 and 36 on accounts and records
  2. Income Tax Department (books of account and audit rules)