
खंड 36
प्रेम गणपति
Dosa Plaza · नागलापुरम, तूतुकुड़ी ज़िला, तमिलनाडु
- ₹1,000
- डोसा ठेला शुरू करने का खर्च (ठेले के किराये के अलावा) · 1992
- 43
- भारत में फ्रेंचाइज़ी सहित आउटलेट · 2012
कहानी
प्रेम गणपति तमिलनाडु के नागलापुरम के एक गरीब परिवार से थे। दसवीं के बाद उन्होंने माता-पिता और सात भाई-बहनों की मदद के लिए पढ़ाई छोड़ दी। 1990 में, 17 साल की उम्र में, एक परिचित ने उन्हें मुंबई में नौकरी का वादा किया। पहुँचते ही उस आदमी ने उनके पास के ₹200 लूट लिए और उन्हें बांद्रा में अकेला छोड़ दिया।
अगले दिन उन्हें माहिम की एक बेकरी में ₹150 महीने पर बर्तन धोने का काम मिला, और वे बेकरी में ही सोते थे। दो साल तक उन्होंने होटलों में छोटे-मोटे काम किए और पैसे बचाए। 1992 में उन्होंने लगभग ₹150 में एक ठेला किराये पर लिया, ₹1,000 बर्तन, चूल्हे और सामान पर खर्च किए और वाशी स्टेशन के सामने इडली-डोसा बेचना शुरू किया।
उन्होंने ठेला साफ़ रखा और अपनी टीम को अच्छे कपड़ों में रखा, और ठेला चल निकला। 1997 में उन्होंने ₹50,000 जमा करके एक छोटी दुकान ली और नाम रखा प्रेम सागर डोसा प्लाज़ा। उन्होंने नए-नए डोसे बनाए, एक मॉल में दुकान खोली और 2003 से फ्रेंचाइज़ी देनी शुरू की, जिसमें घोल वे खुद देते थे। 2012 तक डोसा प्लाज़ा के 11 राज्यों में 43 आउटलेट थे, साथ ही न्यूज़ीलैंड और दुबई में भी।
समय-रेखा
- 199017 साल की उम्र में मुंबई पहुँचे, लुट गए और ₹150 महीने पर बर्तन धोने लगे।
- 1992लगभग ₹1,000 से वाशी स्टेशन के सामने इडली-डोसा का ठेला शुरू किया।
- 1997किराये की दुकान में प्रेम सागर डोसा प्लाज़ा खोला।
- 2003ठाणे के वंडर मॉल में पहला फ्रेंचाइज़ी आउटलेट खुला।
- 201211 राज्यों में फ्रेंचाइज़ी सहित 43 आउटलेट; न्यूज़ीलैंड और दुबई में भी।