यह क्या है
सड़ाए गए जूट (और मेस्ता) के डंठलों से निकाला गया रेशा। जूट मिलें इससे बोरे, हेसियन और बैग व वॉल हैंगिंग जैसे विविध उत्पादों के लिए धागा कातती हैं।
सफ़ेद (कोरकोरस कैप्सुलेरिस) और तोसा (कोरकोरस ओलिटोरियस) जूटमेस्तारंग, मज़बूती, जड़ की मात्रा और दोष के आधार पर ग्रेड
भारत में कहाँ बनता है
- पश्चिम बंगालNorth 24 Parganas
सबसे बड़ा जूट उत्पादक राज्य; भारत की 120 में से 89 कम्पोज़िट जूट मिलें यहीं हैं (दिसंबर 2025)।
- बिहार
पश्चिम बंगाल के बाद कच्चे जूट की खेती में दूसरा।
- असम
कच्चे जूट की खेती में तीसरा।
- ओडिशा
कच्चा जूट उत्पादक।
- झारखंड
कच्चा जूट उत्पादक।
आयात कहाँ से आता है
कम। भारत सबसे बड़ा कच्चा जूट उत्पादक है; आयात लगभग पूरा बांग्लादेश से (2025-26 में US$ 44.80 मिलियन में से US$ 44.60 मिलियन)।
- Bangladesh — 2025-26 में HS 5303 के तहत US$ 44.6 मिलियन का आयात।
- Mexico — 2025-26 में HS 5303 के तहत US$ 0.17 मिलियन का आयात।
ख़रीदने या बेचने से पहले नियम
- 2026-27 के लिए कच्चे जूट का MSP ₹5,925 प्रति क्विंटल; जूट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया MSP पर खरीदता है।
- कच्चे जूट के व्यापारियों, आयातकों और जूट मिलों का जूट आयुक्त कार्यालय में पंजीकरण पूरी तरह डिजिटल है, और रिटर्न ऑनलाइन भरे जाते हैं।
- जूट पैकेजिंग सामग्री (वस्तुओं की पैकिंग में अनिवार्य उपयोग) अधिनियम: 100% अनाज और 20% चीनी जूट बोरों में पैक होनी चाहिए।
भंडारण और रख-रखाव
गांठें सूखे, ढके गोदाम में रखें; जूट जल्दी जलता है और भीगने पर गुणवत्ता घटती है।
इसका उपयोग करने वाले बिज़नेस
जूट की बोरी (गनी बैग) बनाना →छपे जूट बैग बनाना →जूट रस्सी का थोक व्यापार →जूट वॉल हैंगिंग बनाना →
