§1किसके लिए
- झारखंड के नए और मौजूदा (विस्तार/विविधीकरण/आधुनिकीकरण करने वाले) सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम
काम की है अगर
झारखंड के नए सूक्ष्म और लघु उत्पादक, ख़ासकर SC/ST, महिला या दिव्यांग उद्यमी।
समय न लगाएँ अगर
व्यापारी, ट्रांसपोर्टर, रेस्टोरेंट और नकारात्मक सूची के दूसरे काम।
§2पात्रता
- भारत सरकार के वर्गीकरण के अनुसार MSME (सूक्ष्म: P&M Rs 1 करोड़ तक और टर्नओवर Rs 5 करोड़ तक; लघु Rs 10/50 करोड़; मध्यम Rs 50/250 करोड़)
- राज्य MSME निदेशालय से व्यावसायिक उत्पादन की तारीख़ (DoP) का प्रमाणपत्र लेना ज़रूरी - सिर्फ़ Udyam काफ़ी नहीं
- परियोजना का उत्पादन नीति की अवधि में शुरू होना चाहिए
- विस्तार/विविधीकरण/आधुनिकीकरण के लिए P&M में कम से कम 33% अतिरिक्त निवेश ज़रूरी (साथ में 33% क्षमता बढ़ना / एक नया उत्पाद / 20% क्षमता + 30% ऊर्जा या प्रदूषण में कमी)
- जिन इकाइयों पर अलग क्षेत्रीय नीति लागू है (जैसे पर्यटन, IT), उनके लिए नहीं
- नकारात्मक सूची: आरा मिल; मोबाइल ड्रिलिंग/कंक्रीट इकाइयाँ; तंबाकू/गुल/गुड़ाकू; स्टेंसिल इकाइयाँ; सिलाई (RMG छोड़कर); लॉन्ड्री; फ़ोटो/वीडियो स्टूडियो, थिएटर, घड़ी मरम्मत; ब्यूटी पार्लर; माल/सवारी ढोने वाले वाहन; गेस्ट हाउस/रेस्टोरेंट; पेट्रोल पंप; तंबाकू/बीड़ी/सिगरेट; टायर रीट्रेडिंग; खनन; हार्ड/सॉफ्ट कोक; शोरूम और सर्विस सेंटर; गैर-रिफ्रैक्टरी ईंट भट्ठे (फ्लाई ऐश/रेड मड ईंट की अनुमति); पेट्रोलियम भंडारण; प्रतिबंधित वस्तुएँ
- आवेदन के समय NPA इकाइयों को ब्याज सब्सिडी नहीं
- SC/ST/महिला/दिव्यांग का अतिरिक्त लाभ सिर्फ़ राज्य के प्रमाणपत्र वाले झारखंड निवासियों को (दिव्यांगता 40% से ज़्यादा)
§3लाभ
- व्यापक परियोजना निवेश सब्सिडी (CPIS): FCI का सूक्ष्म 40%, लघु 35%, मध्यम 30%, अधिकतम Rs 15 करोड़
- SC/ST/महिला/दिव्यांग: CPIS +5% (अधिकतम Rs 15.75 करोड़)
- समय पर क़र्ज़ चुकाने पर 5 साल तक हर साल 5% ब्याज सब्सिडी: अधिकतम Rs 25 लाख (सूक्ष्म), Rs 1 करोड़ (लघु), Rs 2 करोड़ (मध्यम); MSE को CGTMSE गारंटी शुल्क वापस
- रैयतों से/सहमति अवार्ड पर ज़मीन की पहली ख़रीद पर स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क 100% वापस (JIADA लीज़ या औद्योगिक पार्क प्लॉट पर नहीं)
- गुणवत्ता प्रमाणन 100%, Rs 25 लाख तक (ISO, BIS, ZED, BEE, LEED, इको-लेबल आदि); भारत सरकार के हिस्से के बाद ZED का बाकी: सूक्ष्म 20%, लघु 30%, मध्यम 25%
- पेटेंट 50%, हर पेटेंट पर Rs 25 लाख तक (आवेदन के चरण में Rs 10 लाख तक)
- बिजली शुल्क 5 साल तक 100% वापस
- निर्यात विकास सहायता: हर मेले में स्टॉल शुल्क का 75%, Rs 4 लाख तक; हवाई किराया 75%, हर साल दो लोगों के लिए Rs 50,000 तक
- ऊर्जा और पानी ऑडिट 75%, Rs 3 लाख तक; ट्रेडमार्क 100%, Rs 3 लाख तक; SME एक्सचेंज लिस्टिंग 20%, Rs 10 लाख तक; ETP 50%, Rs 25 लाख तक; ERP 75%, Rs 1 लाख तक और ICT 75%, Rs 5 लाख तक (CMMI-3 विक्रेता); IGBC ग्रीन रेटिंग परामर्श 50%, Rs 4 लाख तक
§4नियम — सहायता का तरीका
- CPIS दो किस्तों में: 50% साल 1 में, 50% साल 3 में (देर से भुगतान)
- FCI = इमारत, प्लांट और मशीनरी और स्थायी उत्पादक संपत्ति (औज़ार, जिग, डाई, क्रेन, बिजली फिटिंग)
- DoP आवेदन तय समय में; MSME को 6 महीने तक की छूट; निदेशक 6 महीने और सचिव 1 साल की देरी माफ़ कर सकते हैं
- EDA बजट हर साल Rs 2 करोड़, पहले आओ पहले पाओ; मेले से 45 दिन पहले आवेदन; भारत सरकार से यात्रा सहायता ली हो तो नहीं
§5दस्तावेज़
जो दस्तावेज़ तैयार हो जाए, उस पर निशान लगाते जाएँ।
Udyam रजिस्ट्रेशन
§6आवेदन कैसे करें
- 1
सिंगल विंडो क्लियरेंस पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करें; आवेदन राज्य MSME निदेशालय को जाते हैं
§7फ़ायदे और नुकसान
फ़ायदे
- सूक्ष्म इकाइयों को 40% CPIS, जो पूर्वी भारत की सबसे ऊँची एक-समान दरों में है (MSME नीति 6.1)
- गुणवत्ता प्रमाणन का 100% ख़र्च Rs 25 लाख तक वापस (6.4)
नुकसान
- CPIS उत्पादन के बाद सिर्फ़ साल 1 और साल 3 में मिलता है (6.1(b))
- स्टांप ड्यूटी वापसी में JIADA और औद्योगिक पार्क के प्लॉट शामिल नहीं, जबकि ज़्यादातर MSME को ज़मीन वहीं मिलती है (6.3)
→मिलती-जुलती योजनाएँ
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¶स्रोत
18 अक्टूबर 2026 को जाँचा गया। केवल जानकारी के लिए — विभाग या बैंक से पक्का करें। कोई गलती दिखी? बताएँ.
