§1किसके लिए

  • नए निर्माण MSME और बड़े विस्तार (FCI और क्षमता 25%+) के बाद मौजूदा इकाइयाँ

काम की है अगर

निर्माण MSME, ख़ासकर पहाड़ी ज़िलों में खाद्य, जड़ी-बूटी, पिरूल ब्रिकेट।

समय न लगाएँ अगर

सेवा व्यवसाय, ईंट-भट्ठे, स्टोन क्रशर, फ़र्नेस वाली इकाइयाँ।

§2पात्रता

  1. निर्माण उद्यम (पर्यटन समेत सेवा क्षेत्र, और प्रतिबंधित सूची जैसे ईंट-भट्ठे, आरा मिल, स्टोन क्रशर, फ़र्नेस इकाइयाँ, स्टील इंगट, तंबाकू, पान मसाला बाहर)
  2. नई इकाई (नीति जारी होने के बाद उत्पादन) या बड़ा विस्तार (FCI और क्षमता +25%)
  3. कम से कम 70% स्थायी रोज़गार राज्य के स्थायी निवासियों को
  4. इकाई को 5 साल चलते रहना होगा; 6 महीने से ज़्यादा बंद = 18% ब्याज के साथ वसूली
  5. व्यावसायिक उत्पादन के 1 साल के अंदर पोर्टल पर पूरा दावा दाख़िल करना होगा
  6. इकाई को तोड़कर/दोबारा गठित करके, या पुरानी/इस्तेमाल की हुई मशीनरी पात्र नहीं
  7. ज़मीन नहीं गिनी जाती

§3लाभ

  • वर्कशॉप भवन + प्लांट और मशीनरी पर पूँजी सब्सिडी, क्षेत्र श्रेणी और आकार के अनुसार; प्राथमिकता वाली श्रेणियों को 5-10% अतिरिक्त

§4नियम — सहायता का तरीका

  1. श्रेणी A: ₹1 करोड़ तक P&M पर FCI का 50% (अधिकतम ₹50 लाख); लघु के लिए ₹5 करोड़ तक ₹50 लाख + ₹1 करोड़ से ऊपर का 25% (अधिकतम ₹1.50 करोड़); ₹10 करोड़ तक ₹1.50 करोड़ + ₹5 करोड़ से ऊपर का 20% (अधिकतम ₹2.50 करोड़); मध्यम के लिए ₹2.50 करोड़ + ₹10 करोड़ से ऊपर का 3.75% (अधिकतम ₹4 करोड़)
  2. श्रेणी B: 40% (अधिकतम ₹40 लाख); ₹40 लाख + 20% (अधिकतम ₹1.20 करोड़); ₹1.20 करोड़ + 16% (अधिकतम ₹2 करोड़); ₹2 करोड़ + 2.50% (अधिकतम ₹3 करोड़)
  3. श्रेणी C: 30% (अधिकतम ₹30 लाख); ₹30 लाख + 12.5% (अधिकतम ₹80 लाख); ₹80 लाख + 8% (अधिकतम ₹1.20 करोड़); ₹1.20 करोड़ + 2% (अधिकतम ₹2 करोड़)
  4. श्रेणी D: 20% (अधिकतम ₹20 लाख); ₹20 लाख + 10% (अधिकतम ₹60 लाख); ₹60 लाख + 6% (अधिकतम ₹90 लाख); ₹90 लाख + 1.50% (अधिकतम ₹1.50 करोड़)
  5. प्राथमिकता श्रेणी को 5% अतिरिक्त (अधिकतम ₹5/10/15 लाख सूक्ष्म/लघु/मध्यम)
  6. सबसे ज़्यादा प्राथमिकता श्रेणी: श्रेणी A/B में 10% अतिरिक्त (अधिकतम ₹10/15/20 लाख), श्रेणी C/D में 5%
  7. 7+ सहायक इकाइयों वाली एंकर इकाई: 5% अतिरिक्त; SC/ST/महिला/दिव्यांग के स्वामित्व वाली: 5% अतिरिक्त - हर इकाई को केवल एक विशेष श्रेणी
  8. PMEGP/PMFME/MSY की मार्जिन मनी घटाई जाती है; बाक़ी टॉप-अप के रूप में मिलता है
  9. भुगतान: सूक्ष्म को 2 बराबर सालाना किस्तों में; लघु और मध्यम को उत्पादन के बाद 5 बराबर सालाना किस्तों में

§5दस्तावेज़

जो दस्तावेज़ तैयार हो जाए, उस पर निशान लगाते जाएँ।

आवेदन फ़ॉर्म के साथ DPR

§6आवेदन कैसे करें

  1. 1

    तय पोर्टल पर GM, DIC को ऑनलाइन

  2. 2

    ज़िला अधिकार प्राप्त समिति (DM) या राज्य अधिकार प्राप्त समिति (DG उद्योग) मंज़ूरी देती है

§7फ़ायदे और नुकसान

फ़ायदे

  • दूरदराज़ पहाड़ी ज़िलों में सूक्ष्म इकाइयों को 50% तक पूँजी सब्सिडी
  • सूक्ष्म इकाइयों को सिर्फ़ 2 सालाना किस्तों में मिलती है

नुकसान

  • सेवा क्षेत्र और पर्यटन पूरी तरह बाहर
  • 70% स्थानीय स्थायी रोज़गार का नियम और 5 साल चलने का नियम, 18% ब्याज के साथ वसूली

→मिलती-जुलती योजनाएँ

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स्रोत

  1. Uttarakhand MSME Policy 2023 - English notification (Directorate of Industries)

18 अक्टूबर 2026 को जाँचा गया। केवल जानकारी के लिए — विभाग या बैंक से पक्का करें। कोई गलती दिखी? बताएँ.