§1किसके लिए
- 25 व्यवसायों के पारंपरिक कारीगर और कामगार - बढ़ई, दर्ज़ी, कुम्हार, लोहार, नाई, राजमिस्त्री, सुनार, टोकरी बुनकर, हलवाई, मोची, धोबी, मूर्तिकार, माली (फूल वाले), दूधवाले, भड़भूजा, मधुआरा; और आधुनिक व्यवसाय - मोबाइल मरम्मत, ऑटोमोबाइल मरम्मत, इलेक्ट्रॉनिक सामान मरम्मत, बिजली के सामान की मरम्मत, प्लंबर, कंप्यूटर मरम्मत, सोलर लगाना, डिजिटल फ़ोटोग्राफ़ी, सॉफ़्टवेयर और हार्डवेयर
काम की है अगर
कारीगर और मरम्मत का काम करने वाले कामगार।
समय न लगाएँ अगर
फ़ैक्टरियाँ और बड़ी इकाइयाँ।
§2पात्रता
प्रकाशित नहीं
गाइडलाइन में पात्रता की शर्तें नहीं दी गई हैं। आवेदन से पहले पोर्टल या बैंक से पूछ लें — हम अंदाज़े से सूची नहीं बनाते।
§3लाभ
- ₹10 लाख तक कर्ज़ सहायता, 15% मार्जिन मनी सब्सिडी के साथ, बिना गारंटी और बिना ब्याज (जैसा छपा है)
- प्रशिक्षण, औज़ार और बाज़ार से जोड़ना (रकम पेज पर नहीं छपी)
§4नियम — सहायता का तरीका
- ₹10.00 लाख तक कर्ज़; 15% मार्जिन मनी सब्सिडी; कोई गारंटी नहीं; कोई ब्याज नहीं (पोर्टल पर जैसा छपा है)
§5दस्तावेज़
प्रकाशित नहीं
गाइडलाइन में दस्तावेज़ों की सूची नहीं दी गई है। आवेदन से पहले पोर्टल या बैंक से पूछ लें — हम अंदाज़े से सूची नहीं बनाते।
§6आवेदन कैसे करें
- 1
DI UP MSME पोर्टल पर आवेदन करें
§7फ़ायदे और नुकसान
फ़ायदे
- सिर्फ़ पारंपरिक शिल्प नहीं, आधुनिक मरम्मत व्यवसाय भी शामिल
नुकसान
- 18 Oct 2026 तक सरकारी पेज पर पात्रता और दस्तावेज़ ख़ाली हैं
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¶स्रोत
18 अक्टूबर 2026 को जाँचा गया। केवल जानकारी के लिए — विभाग या बैंक से पक्का करें। कोई गलती दिखी? बताएँ.
