§1आपको क्या मिलेगा

  • पार्टनरशिप डीड का मसौदा — हिस्सा, मुनाफ़े का बँटवारा, काम और बाहर निकलने की शर्तें
  • राज्य के रजिस्ट्रार ऑफ़ फर्म्स में पंजीकरण (जहाँ उपलब्ध हो)
  • फर्म का पैन और बैंक खाते के कागज़
  • उद्यम और GST — अगर ज़रूरी हो

§2दस्तावेज़

जो तैयार है, उस पर निशान लगाते जाइए।

§3काम कैसे होगा

  1. 1

    पार्टनरों के साथ कॉल — हिस्सा, काम और बाहर निकलना तय

  2. 2

    डीड का मसौदा और आपकी मंज़ूरी

  3. 3

    स्टांप पेपर पर डीड, हस्ताक्षर, नोटरी

  4. 4

    फर्म का पैन, पंजीकरण और बैंक के कागज़

§4सवाल-जवाब

क्या पंजीकरण ज़रूरी है?

कानून में ज़रूरी नहीं, पर बिना पंजीकरण वाली फर्म अदालत में किसी तीसरे पक्ष पर मुकदमा नहीं कर सकती। इसलिए हम पंजीकरण की सलाह देते हैं।

पार्टनरशिप और LLP में क्या फ़र्क है?

पार्टनरशिप में देनदारी असीमित है। LLP में हर पार्टनर की देनदारी उसके हिस्से तक सीमित रहती है, पर नियम-पालन ज़्यादा है।

§5यह भी देखें

→कोटेशन लें

आपका नंबर सिर्फ़ इस पूछताछ के लिए है। काम शुरू होने से पहले तय कीमत बताई जाएगी — कोई छिपा हुआ चार्ज नहीं।

हमारा हितहमारी सेवाएँ (Services) पैसे लेकर दी जाती हैं। विश्वकोश मुफ़्त है और मुफ़्त रहेगा — सेवा लेना ज़रूरी नहीं है।

स्रोत

  1. Indian Partnership Act, 1932 — registration with the state Registrar of Firms

18 अक्टूबर 2026 को जाँचा गया। सरकारी फ़ीस और नियम बदलते रहते हैं — आवेदन से पहले पोर्टल पर पक्का करें। कोई गलती दिखी? बताइए.