Building Businessसेवाएँ

खंड 44

गोपनीयता करार (परस्पर)

किसी संभावित साझेदार, आपूर्तिकर्ता, खरीदार या निवेशक के साथ व्यवसाय योजना, डिज़ाइन, कीमतें या ग्राहकों का विवरण साझा करने से पहले इसका उपयोग करें।

आपकी जानकारी

आपका दस्तावेज़

यह नमूना केवल सामान्य मार्गदर्शन के लिए है; यह कानूनी सलाह नहीं है। अपने राज्य में स्टाम्प शुल्क और पंजीकरण के नियम अवश्य जाँच लें। परस्पर गोपनीयता करार यह करार हस्ताक्षर का स्थान में दिनांक करार की तारीख को निम्नलिखित के बीच बनाया गया: पहला पक्ष: नाम (व्यक्ति या व्यवसाय), निवासी/स्थित पहला पक्ष: पता ("पहला पक्ष"); और दूसरा पक्ष: नाम (व्यक्ति या व्यवसाय), निवासी/स्थित दूसरा पक्ष: पता ("दूसरा पक्ष")। दोनों पक्ष जानकारी साझा करने का उद्देश्य के उद्देश्य ("उद्देश्य") से एक-दूसरे के साथ कुछ जानकारी साझा करना चाहते हैं। वे निम्नलिखित पर सहमत हैं। 1. गोपनीय जानकारी। "गोपनीय जानकारी" का अर्थ है ऐसी कोई भी व्यावसायिक, तकनीकी या वित्तीय जानकारी, जो एक पक्ष ("प्रकट करने वाला") दूसरे पक्ष ("प्राप्तकर्ता") को उद्देश्य के लिए लिखित में, ईमेल से, चित्रों, नमूनों या मौखिक रूप से देता है, जिसमें कीमतें, लागत, ग्राहकों और आपूर्तिकर्ताओं का विवरण, डिज़ाइन, सूत्र, प्रक्रियाएँ और योजनाएँ शामिल हैं। 2. क्या गोपनीय नहीं है। जानकारी गोपनीय नहीं मानी जाएगी, यदि प्राप्तकर्ता दिखा सके कि वह: (क) पहले से सार्वजनिक थी, या प्राप्तकर्ता की किसी गलती के बिना सार्वजनिक हो गई; (ख) साझा किए जाने से पहले ही प्राप्तकर्ता को ज्ञात थी; (ग) किसी ऐसे अन्य व्यक्ति से वैध रूप से मिली, जो उसे साझा करने के लिए स्वतंत्र था; या (घ) प्राप्तकर्ता ने स्वतंत्र रूप से विकसित की। 3. प्राप्तकर्ता के कर्तव्य। प्राप्तकर्ता: (क) गोपनीय जानकारी का उपयोग केवल उद्देश्य के लिए करेगा; (ख) उसे किसी के साथ साझा नहीं करेगा, सिवाय अपने ऐसे साझेदारों, निदेशकों, कर्मचारियों या सलाहकारों के, जिन्हें उद्देश्य के लिए उसकी आवश्यकता है और जो उसे गोपनीय रखने के लिए बाध्य हैं; (ग) उसकी सुरक्षा कम से कम उतनी सावधानी से करेगा, जितनी वह अपनी गोपनीय जानकारी की करता है; (घ) किसी अनधिकृत उपयोग या प्रकटीकरण की जानकारी मिलते ही प्रकट करने वाले को तुरंत बताएगा। 4. कानून द्वारा आवश्यक प्रकटीकरण। यदि कोई न्यायालय या सरकारी प्राधिकरण प्राप्तकर्ता से गोपनीय जानकारी माँगे, तो प्राप्तकर्ता उसे दे सकता है, परंतु जहाँ अनुमति हो, पहले प्रकट करने वाले को सूचित करेगा और केवल उतना ही बताएगा जितना आवश्यक है। 5. जानकारी लौटाना। प्रकट करने वाले के माँगने पर, या चर्चा समाप्त होने पर, प्राप्तकर्ता सारी गोपनीय जानकारी और उसकी प्रतियाँ लौटा देगा या नष्ट कर देगा, और इसकी पुष्टि लिखित में करेगा। 6. कोई अन्य अधिकार नहीं। जानकारी साझा करने से प्राप्तकर्ता को उस पर कोई स्वामित्व या लाइसेंस नहीं मिलता। किसी भी पक्ष के लिए आगे कोई सौदा करना अनिवार्य नहीं है। 7. अवधि। यह करार ऊपर लिखी तारीख से साझा की गई जानकारी पर लागू है। गोपनीयता का कर्तव्य इस करार की तारीख से गोपनीयता कितने वर्ष तक वर्ष तक रहेगा। 8. उपचार। यदि कोई पक्ष इस करार को तोड़ता है, तो दूसरा पक्ष निषेधाज्ञा (उल्लंघन रोकने का न्यायालय का आदेश) और हानि के लिए क्षतिपूर्ति माँग सकता है। 9. अधिकार क्षेत्र। इस करार से जुड़े किसी भी विवाद पर किस शहर के न्यायालय के न्यायालयों का अधिकार क्षेत्र होगा। 10. पूर्ण करार। इस विषय पर यही पूर्ण करार है। कोई भी बदलाव लिखित में और दोनों पक्षों के हस्ताक्षर से ही होगा। पहला पक्ष: नाम (व्यक्ति या व्यवसाय) की ओर से: ______________________ नाम और पद: पहला पक्ष: हस्ताक्षरकर्ता और पद दूसरा पक्ष: नाम (व्यक्ति या व्यवसाय) की ओर से: ______________________ नाम और पद: दूसरा पक्ष: हस्ताक्षरकर्ता और पद गवाह: 1. ______________________ 2. ______________________

हस्ताक्षर से पहले जानें

  • गोपनीयता करार एक संविदा है, इसलिए उसे भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 की धारा 10 की शर्तें पूरी करनी होती हैं: सक्षम पक्षों की स्वतंत्र सहमति, वैध प्रतिफल और वैध उद्देश्य।
  • करार को गोपनीयता तक ही रखें। दूसरे पक्ष को आपके क्षेत्र में व्यवसाय करने से रोकने वाला खंड भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 की धारा 27 के अंतर्गत शून्य हो सकता है, जो किसी वैध व्यापार या व्यवसाय पर रोक लगाने वाले समझौते को उस सीमा तक शून्य बनाती है।
  • साझा किए गए दस्तावेज़ों पर 'गोपनीय' लिखें और क्या, कब साझा किया इसकी सूची रखें। इससे बाद में उल्लंघन साबित करना आसान होता है।
  • करारों पर स्टाम्प शुल्क हर राज्य तय करता है। अपने राज्य की दर जाँचें और उसी मूल्य के स्टाम्प पेपर या ई-स्टाम्प पर करार करें।
  • कंपनी या फर्म की ओर से हस्ताक्षर करने वाले व्यक्ति के पास इसका अधिकार होना चाहिए (जैसे निदेशक या साझेदार)।
स्रोत (1)
  1. The Indian Contract Act, 1872 (Act No. 9 of 1872): sections 10 and 27 · 1872

← सभी टेम्पलेट